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रविवार, जून 22, 2008
"सावधान सतयुग आ रहा है...!"
मैँ गंभीर हो गया हूँ इस मुद्दे पर डर भी लग रहा है सरकारी आदमीं हूँ रोज़िन्ना झूठ की सेंचुरी मारने के आदेश हैं इस सिस्टम के......?
सो सोचा रहा हूँ कि व्ही0 आर0 एस0 ले लूँ....?
वो दिन दूर नहीं जब तकनीकी के विकास के की वज़ह से लाईडिटेक्टर मशीन,ब्रेन-मेपिंग मशीन,आम आदमी की ज़द में आ सकती है और फ़िर सतयुग के आने में कोई विलंब न होगा ।
गुरुवार, जून 19, 2008
प्रतियोगिता:-"गीत लिखिए" अन्तिम तिथि 15 जुलाई 2008
:-"ख़ुद से कैसे भाग सकेगा अंतस पहरेदार कड़क हैं"
इस मुखड़े पे
गीत लिख भेजिए अन्तिम तिथि 15 जुलाई 2008
email:- girishbillore@gmail.com
अथवा
girishbillore@hotmail.com
मुझे आपके एक गीत की प्रतीक्षा है
अन्तिम तिथि तक प्राप्त गीत प्रकाशित कर दिए जाएंगे
प्रकाशित गीतों पर विशेषज्ञों की राय,(गुणांक),तथा पाठकों की राय (गुणांक) के आधार पर विजेताओं की घोषणा कर दी जावेगी !
पुरूस्कार राशी के रूप में न होकर "...........................!"
के रूप में होगा
सोमवार, जून 16, 2008
कचनार विशेषांक:अनुभूति में
अनुभूति का कचनार विशेषांक में आपका भ्रमण ज़रूरी सा हो गया है ।
आपकी टिप्पणियाँ सादर आमंत्रित हैं
सादर
सोमवार, जून 02, 2008
प्रतियोगिता:-"गीत लिखिए"
:-"ख़ुद से कैसे भाग सकेगा अंतस पहरेदार कड़क हैं"
इस मुखड़े पे
गीत लिख भेजिए अन्तिम तिथि 30 जून 2008
email:- girishbillore@gmail.com
अथवा
girishbillore@hotmail.com
नियमों की प्रतीक्षा कीजिए मुझे आपके एक गीत की प्रतीक्षा है
अन्तिम तिथि तक प्राप्त गीत प्रकाशित कर दिए जाएंगे
प्रकाशित गीतों पर विशेषज्ञों की राय,(गुणांक),तथा पाठकों की राय (गुणांक) के आधार पर विजेताओं की घोषणा कर दी जावेगी !
पुरूस्कार राशी के रूप में न होकर "...........................!"
के रूप में होगा !!
शुक्रवार, मई 30, 2008
हिन्दयुग्म का पड़ाव ...!!
पहली कविता को छापने का जोखिम उठा कर काव्य-पल्लवन सामूहिक कविता-लेखन विषय-चयन किया है :-अवनीश गौतम जी ने । तारीफ देखे पहली कविता की प्रविष्ठियाँ चार भागों में छापनी पडी ...... वाह...!....वाह...!!
हिन्द-युग्म
जोखिम भरे काम करने वालों के लिए सराहना ज़रूरी है ......!!
प्रथम भाग में
ममता पंडित दिव्य प्रकाश दुबे सुमित भारद्वाज सीमा सचदेव अजीत पांडेय समीर गुप्ता प्रेमचंद सहजवाला पावस नीर रचना श्रीवास्तव लवली कुमारी हरिहर झा राहुल चौहान सतपाल ख्याल पीयूष तिवारी आलोक सिंह "साहिल" अर्चना शर्मा रंजना भाटिया सजीव सारथी विपुल कमलप्रीत सिंह
दूसरे भाग में
सविता दत्ता शोभा महेन्द्रू देवेन्द्र कुमार मिश्रा महक डॉ॰ शीला सिंह गोविंद शर्मा रश्मि सिंह अभिषेक पाटनी अवनीश तिवारी विजयशंकर चतुर्वेदी आदित्य प्रताप सिंह डा. आशुतोष शुक्ला अमित अरुण साहू रेनू जैन सुरिन्दर रत्ती मंजू भटनागर शिवानी सिंह श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' अमिता 'नीर' कु० स्मिता पाण्डेय
तीसरे भाग में
देवेंद्र पांडेय डा. रमा द्विवेदी अशरफ अली "रिंद" ममता गुप्ता रजत बख्शी राजिंदर कुशवाहा गरिमा तिवारी विनय के जोशी डा0 अनिल चड्डा यश छाबड़ा कवि कुलवंत सिंह एस. कुमार शर्मा मीनाक्षी धनवंतरि शुभाशीष पाण्डेय शिफ़ाली पूजा अनिल अविनाश वाचस्पति निखिल सचन सोमेश्वर पांडेय सुनील कुमार सोनू
और ताज़ातरीन चौथे भाग में *** प्रतिभागी रहे
राकेश खंडेलवाल सीमा गुप्ता सतीश वाघमारे संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी ब्रह्मनाथ त्रिपाठी 'अंजान' मैत्रेयी बनर्जी सतीश सक्सेना विवेक रंजन श्रीवास्तव "विनम्र" आशा जोगळेकर राहुल गडेवाडिकर मधुरिमा कुसुम सिन्हा महेंद्र भटनागर शैलेश भारतवासी मनीष वंदेमातरम स्वाति पांडे तपन शर्मा गोविन्द शर्मा डॉ॰ एस के मित्तल राजीव तनेजा
यानी कुल अस्सी कवितायेँ जमा हुई किसी अखबार को भी इतनी रीडर शिप और पार्टिशिपेशन कविता के मामले में कम ही मिलता है। किसे नामज़द बधाई दूँ ........मेरी समझ में नहीं आ रहा है
केवल इतना कह पा रहा हूँ
बधाइयां
हिंद-युग्म
गुरुवार, मई 29, 2008
"गिद्ध रहें न रहें गिद्धियत शेष रहेगी...!!"
sachin sharma ने कहा 80 लाख थे, 10 हजार रह गए!भईया इनकी जनरेशन की अब कोई ज़रूरत नहीं हैं । आदम जात में इनकी प्रवृत्ति ज़िंदा रहेगी ही । मौत बनते राजमार्ग! भी सच है राज के रास्ते चलते लोगों की आत्म-सम्मान,संवेदना,ईमान,सब कुछ मर जाता है । ज़िंदा रहती है केवल लिप्सा । लाशों के ढेर पर "राज" निति की बुनियाद इक एतिहासिक सत्य है।
इब्ने-इन्साँ ने खूब कहा -
" अपनी ज़ुबां से कुछ न कहेंगे चुप ही रहेंगे आशिक़ लोग,
तुम से तो इतना हो सकता है पूछो हाल बेचारों का "
SUYOG PATHAK ने गया उदय प्रकश जी का गीत स्वयम में ब्रह्म का एहसास दिलाता है।
रविवार, मई 25, 2008
गजब ढा दिया बड़े बाबू ......?

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