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सितंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तीन साल पहले यू एन ओ में मोदी जी ने क्या कुछ कह था

श्री मोदी यूएनओ में ~~~~~~~~~ आधुनिक महानायक महात्मा गांधी ने कहा था कि हम उस भावी विश्व के लिए भी चिंता करें जिसे हम नहीं देख पाएंगे। जब-जब विश्व ने एक साथ आकर भविष्य के प्रति अपने दायित्व को निभाया है, मानवता के विकास को सही दिशा और एक नया संबल मिला है। सत्तर साल पहले जब एक भयानक विश्व युद्ध का अंत हुआ था, तब इस संगठन के रूप में एक नई आशा ने जन्म लिया था। आज हम फिर मानवता की नई दिशा तय करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। मैं इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मलेन के आयोजन के लिए महासचिव महोदय को ह्रदय से बधाई देता हूँ। एजेंडा 2030 का विजन महत्वाकांक्षी है और उद्देश्य उतने ही व्यापक हैं। यह उन समस्याओं को प्राथमिकता देता है, जो पिछले कई दशकों से चल रही हैं। साथ ही साथ यह सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण के विषय में हमारी परिपक्व होती हुई सोच को भी दर्शाता है। यह ख़ुशी की बात है कि हम सब गरीबी से मुक्त विश्व का सपना देख रहे हैं। हमारे निर्धारित लक्ष्यों में गरीबी उन्मूलन सब से ऊपर है। आज दुनिया में 1.3 बिलियन लोग गरीबी की दयनीय जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। हमारे सामने प्रश्न केवल यह नहीं है कि गरीबों की

न ही तुम हो स्वर्ण-मुद्रिका- जिसे तपा के जांचा जाए

जितनी बार बिलख बिलख के  रोते रहने को मन कहता उतनी बार मीत तुम्हारा भोला मुख मेरे ही सन्मुख है रहता....! ************************* सच तो है अखबार नहीं तुम, जिसको को कुछ पल बांचा जाये. न ही तुम हो स्वर्ण-मुद्रिका- जिसे तपा के जांचा जाए. मनपथ की तुम दीप शिखा हो यही बात हर गीत है कहता जितनी बार बिलख बिलख के ........... ************************* सुनो प्रिया मन के सागर का जब जब मंथन मैं करता हूं तब तब हैं नवरत्न उभरते अरु मैं अवलोकन करता हूँ हरेक रतन तुम्हारे जैसा..! तुम ही हो , मन  है कहता. जितनी बार बिलख बिलख के ............... मनके मनके साझा करतीं पीर अगर तो मुस्कातीं तुम । पर्व दिवस के आने से पहले कोना कोना चमकाती तुम ! दुविधा अरु संकट के पल में मातृ रूप , तुम में मन लखता ।। जितनी बार बिलख बिलख के ............ *गिरीश बिल्लोरे मुकुल* छाया :- मुकुल यादव

मातृत्व एवम न्यायपूर्णता स्वर्गारोहण का एकमात्र रास्ता..!

💐💐💐 वन वन भटकते रहे कुछ योगियों ने अहर्निश प्रभू से साक्षात्कार की उम्मीद की थी । 20-25 बरस बीतते बीतते वे धीरे धीरे परिपक्व उम्र के हो गए !  कुछ तो मृत्यु की बाट जोह रहे थे । पर प्रभू नज़र न आए । नज़र आते कैसे उनके मन में सर्वज्ञ होने का जो भरम था । श्रेष्ठतम होने का कल्ट (लबादा) ओढ़कर घूम रहे थे । कोई योग में निष्णात था तो कोई अदृश्य होने की शक्ति से संपृक्त था । किसी को वेदोपनिषद का भयंकर ज्ञान था तो कोई बैठे बैठे धरा से सौर मंडल की यात्रा पर सहज ही निकल जाता था ।    परमज्ञानीयों में से एक ज्ञानी अंतिम सांस गिन रहा था । तभी आकाश से एक  यान आया ।और योगियों के जत्थे के पास की आदिम जाति की बस्ती की एक झोपड़ी के सामने उतरा।   यान को देख सारे योगी सोचने लगे लगता है कि यान के चालक को भरम हुआ है। इंद्र के इस यान को कोई मूर्ख देवता चला रहा है शायद सब दौड़ चले  यान के पास खड़े होकर बोले - है देव्, योगिराज तो कुटिया में अंतिम सांसे गिन रहे हैं । आप वहीं चलिए ।  देव् ने कहा- हे ऋषियों, मैं दीनू और उसकी अर्धांगिनी को लेने आया हूँ।  महायोगी के लिए यम ने कोई और व्यवस्था की होगी ।  ऋषियों

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  सूफीवाद ने मोहब्बत का पैग़ाम दिया । हमारे संत कवियों ने भी तो यही किया था । सूफीवाद हर धर्म की जड़ में मौज़ूद है.. क़बीर जब बोले तो अध्यात्म बोले खुलकर बोले । क़बीर मीरा तुलसी रसखान बुल्ले शाह, यहां तक कि लोकभजनों में भी यही सब है ।  रामायण महाभारत में न तो राम की पूजा न ही कृष्ण की पूजा का कोई विधान आदेशित है न ही कोई प्रक्रिया बताई है । परंतु शास्त्रों ने नवदा भक्तियोग को अवश्य किया है । राम मर्यादा जिसे उर्दू में हुदूद कहते हैं कहा है । तो कृष्ण ने कर्मयोग का सिद्धांत तय किया है ।  मित्रो, राक्षसों का वध तब ही हुआ जब वे आतंकी हमला करने लगे । जब भी मानवाधिकारों को किसी ने भी लांघा तो उसे दण्ड मिला । फिर वो ऋषि मुनि, देवता, गन्धर्व, और राक्षस ही क्यों न हों ।     पूजा अर्चना आराधना भक्ति के लिए किसी मुहूर्त की ज़रूरत कहाँ..? एक बार ख्याल आया कि पूजा कब स्वीकारेगा परमात्मा..? बुद्धि ने समझाया- जब तुम्हारा मन करे तब ब्रह्म के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करो । योग निद्रा में रहो कौन रोकता है ?  मन ने पूछा - तो त्रिसंध्या का अर्थ क्या है ? बुद्धि ने कहा- त्रिसंध्या का अर्थ है कर्म के द

"क्या खास है नई शिक्षा नीति में"

मेरे बाल सखा भाई #श्रीपद_कायंदे का सबसे पहली आभार व्यक्त करना चाहूंगा जिन्होंने यह चाहती मैं नेट यानी न्यू एजुकेशन पॉलिसी पर अपने विचार रखूँ ।   नेप यानी न्यू एजुकेशन पॉलिसी हिंदी में कहें तो नई शिक्षा नीति। अधिकांश लोगों का यह आरोप है कि नई शिक्षा नीति को नीति बनने के पूर्व जनता के सामने नहीं लाया गया। नई शिक्षा नीति के लिए ऐसा आरोप मिथ्या और तथ्य हीन है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा विधिवत प्रचार प्रसार किया गया।      भारत में कैसी शिक्षा प्रदान की जाए इस संबंध में आजादी के बाद से ही काफी कोशिश जारी रही। मैकाले की शिक्षा प्रणाली शिक्षा व्यवस्था को मुक्त कराने की कोशिश 1968 से प्रारंभ है। 1986 में आए बदलाव जिसमें आंशिक बदलाव 1992 में किया गया आज तक लागू है 2020 की पॉलिसी आने के बाद और आगामी 2 या 3 वर्षों में इसे विधिवत लागू हो जाने के बाद की परिस्थितियां आज एकदम अलग ही होना तय है । यह शिक्षा प्रणाली बुनियादी स्तर पर आमूलचूल परिवर्तन के लिए सक्षम है ऐसा सिर्फ मेरा मानना नहीं है बल्कि प्रख्यात शिक्षा शास्त्री सोनम वांगचुक का भी मत है इतना ही नहीं टिप्पणी कार योगेंद्र यादव भी

आओ....खुद से मिलवाता हूँ..!! भाग 04

गंदगी स्वच्छता और ज्ञान का अभाव कुछ ऐसा प्रसव पूर्व और दशक के बाद की सावधानियाँ उच्च मध्यम वर्ग तक को नहीं मालूम थी और वह काल भारत सरकार के लिए भी संकट का काल था । मेरे जन्म के समय का भारत टीनएजर भारत था । तब का भारत कैसा था मुझसे ज्यादा तो उन्हें मालूम होगा जो भारत में 1947 से 1955 के बीच 5 या 6 वर्ष के रहे होंगे ।   उस दशक के बारे में इससे ज्यादा कुछ लिखने के लिए मेरे पास बहुत कुछ नहीं है इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं  पूरी कहानियां जिसे पढ़कर लगता है कि  तब का मध्यम वर्ग आज के निम्न वर्ग के समान ही रहा होगा ऐसा मेरा मानना है हो सकता है मैं गलत ही हूं या गलत भी हूँ ।      मेरे मुंबई वाले काका जिनका नाम रमेशचंद्र बिल्लोरे है की शादी इटारसी के ऐन पहले गुर्रा नाम की स्टेशन में पिताजी पदस्थ थे से संपन्न हुई। और मैं पहली बार बरात में गया अपने काका की शादी में। बहुत कम उम्र थी। पर आश्चर्य होता था कि जो भी मुझे देखता मेरे विषय में बात करता था। कहते हैं कि मैं बहुत सुंदर दिखता था परंतु खड़ा नहीं हो पाता था मुझे कोई ना कोई गोद में ले जाकर एक जगह से दूसरी जगह पर रख देता था। और वह

जन्मपर्व की बधाई आशा ताई

जन्म पर्व की हार्दिक बधाई आशा ताई आशा भोसले (जन्म: 8 सितम्बर 1933) हिन्दी फ़िल्मों की मशहूर पार्श्वगायिका हैं। लता मंगेशकर की छोटी बहन और दिनानाथ मंगेशकर की पुत्री आशा ने फिल्मी और गैर फिल्मी लगभग 16 हजार गाने गाये हैं और इनकी आवाज़ के प्रशंसक पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। हिंदी के अलावा उन्होंने मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, भोजपुरी, तमिल, मलयालम, अंग्रेजी और रूसी भाषा के भी अनेक गीत गाए हैं। आशा भोंसले ने अपना पहला गीत वर्ष 1948 में सावन आया फिल्म चुनरिया में गाया।    लता जी आशा जी  सहित सभी गायकों के बारे में बहुत कुछ इंटरनेट पर   विकिपीडिया पर मौजूद है । आप देख सकते हैं परंतु मेरे नज़रिए से  से मैंने आशा जी  की आवाज को एक्सप्लेन कर रहा हूं ।  आशा जी की दिलकश आवाज युवाओं की दिल धड़काने के लिए काफी होती थी हमारे दौर में इश्क और मोहब्बत सबसे बड़ा वर्जित विषय था परंतु मुकेश का गीत याद ही होगा हर दिल जो प्यार करेगा वह गाना गाएगा । जिसे आज क्रश कहा जाता है तब भी हुआ करता था, और उसे अभिव्यक्त करने के लिए आशा जी सुमन कल्याणपुर  और लता ताई के सुर पर्याप्त हुआ करते थे । आज आशा ज

गिद्ध मीडिया...!आलेख- सलिल समाधिया

 ! ----------------- बस करो यार !!  हद होती है किसी चीज की ! उस पर आरोप लगा है, वह दोषी सिद्ध नहीं हुई है अभी ! कानून अपना काम कर रहा है, उसके बाद न्यायालय अपना काम करेगा ! आपका काम मामले को उजागर करना था, कर दिया न ! अब बस करो,  हद होती है किसी चीज की !! वह भी एक स्त्री है,उसकी भी अपनी निजता है, कुछ गरिमा है !! टी.आर.पी के लिए कितना नीचे  गिरोगे ! यह ठीक है कि सुशांत के परिवार को न्याय मिलना चाहिए ! यह भी ठीक है कि अगर सुशांत की मृत्यु में कुछ Fowl play नज़र आता है तो उसकी जांच होनी चाहिए.. सो वो हो रही है ! देश की सबसे सक्षम जांच एजेंसियां आप अपना काम कर रही हैं ! जिम्मेदार मीडिया होने के नाते आप का काम उन तथ्यों को सामने लाना था.. जो संदेहास्पद थे ! वह काम आपने कर दिया ! आपको धन्यवाद,  अब बस कीजिए !!!  अन्य मसले भी हैं देश में! NCRB (National Crime Records Bureau) के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1,20,000 से अधिक आत्म हत्याएं होती हैं ! साल 2019 में 1,39, 123 आत्महत्याएं रजिस्टर हुई हैं ! Crime against women की संख्या 3,59,849 है !(October 21, 2019 NCRB ) मादक पदार्थो, ह

भीष्म पितामह के तर्पण के बिना श्राद्ध कर्म अधूरा क्यों ?

      गंगा और शांतनु के पुत्र देवव्रत ने शपथ ली कि मुझे आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करना है तो यह पूछा कि उसे कोई आशीर्वाद मिले . हस्तिनापुर की राजवंश की रक्षा अर्थात संपूर्ण राष्ट्र की रक्षा का दायित्व लेकर ब्रह्मचारी भीष्म पितामह के नाम से प्रसिद्ध हुए इस पर बहुत अधिक विवरण देने की जरूरत नहीं है। आप सभी इस तथ्य से परिचित ही है .         भीष्म पितामह को श्राद्ध पक्ष में याद क्यों किया जाता है यह महत्वपूर्ण सवाल है ?      सुधि पाठक आप जानते हैं कि महाभारत धर्म युद्ध होने के एक कौटुंबिक युद्ध भी था ! क्योंकि इसमें पारिवारिक विरासत का राज्य एवं भूमि विवाद शामिल था। ध्यान से देखें तो हस्तिनापुर पर दावा तो पांडव कब का छोड़ चुके थे। महायोगी कृष्ण के संपर्क में आकर उन्होंने मात्र 5 गांव मांगे थे। परंतु कुटुंब में युद्ध सभी होते हैं जबकि अन्याय सर चढ़कर बोलता है। विधि व्यवसाय से जुड़े विद्वान जानते हैं कि सर्वाधिक सिविल मामले न्यायालयों में आज भी  रहते हैं। महाभारत का स्मरण दिला कर हमारे  पुराणों के रचनाकारों ने यह बताने की कोशिश की है कि कौटुंबिक अन्याय हमारे पूर्वजों पर ही भारी

पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी शुद्धानंद नाथ का जीवन सूत्र 27 सितम्बर 1960

पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी शुद्धानंद नाथ का जीवन सूत्र 27 सितम्बर 1960 श्रीधाम आश्रम सतना* अपने मन से झूठे मत बनो। कितना भी बड़ा दुष्कर्म मन से या तन से हुआ हो उसे मंजूर करो , उसे दूसरा रंग मत दो, उसका दोस्त दूसरों पर ना करो । जो भी होता है वह अपनी ही भूल के कारण होता है। इसलिए अपने मन से और मन में भूल को मत छुपाओ, भूल की छानबीन करो। अपनी मम्मत्व भावना अपने को  निष्पक्ष विचार करने से रोकती है । इसलिए हम तो भाव को त्याग करके विचार करने का प्रयत्न करो।    जीवन के सरल से सरल पद पर रहना ही अध्यात्म कहा जाता है। जीवन में प्राप्त और अब प्राप्त वस्तुओं की प्रीति और वियोग में ही चित्र का विकास होता है। विकास की प्रक्रिया ही अध्यात्मिक साधना का अंतरंग है। इस प्रक्रिया से सिद्धि हेतु वातावरण का निर्माण अनुकूलता की रचना तथा प्रतिकूलता के साथ युद्ध करने का सामर्थ्य उत्पन्न करना होता है।    इस सामर्थ्य के के लिए बहुत सी बहिरंग साधनाएं करनी पड़ती हैं । धारणा के योग्य मनस्वी गुरु जन इस प्रकार का आदेश देते हैं। आज से आपके जीवन में एक नया जागरण होने जा रहा है । #शुद्धानंद

गिरीश के दोहे

*गिरीश के दोहे* फूटा कलसा देख तू, भय का बीन बजाय ? टूटे घड़े कुम्हार के, वंश कहां रुक जाए । हर कण क्षण नश्वर सखि, देह होय कै शान ! चेतन पथ तैं दौड़ जा, तेहि पथ पै भगवान कुंठा तर्क-कुतर्क से, जीत न सकि हौ आप ब्रह्म अनावृत होत ह्वै, जीव जो करै जब ताप कान्हा तोड़ें दधि कलश, गोपिन मन में भाग कंस वधिक श्रीकृष्ण ने, खोले जन जन भाग ।। *गिरीश बिल्लोरे मुकुल* कंस वधिक श्रीकिशन ने, खोले सबके भाग गिरीश बिल्लोरे मुकुल

विघ्नहर्ता को विदा एवम उत्तम क्षमा

*मान्यवर एवम महोदया* आपका एक एक शब्द विनम्रता और महानता का सूचक बन गया है। आप सब  मेरे जीवन के लिए  आईकॉनिक व्यक्तियों की तरह ही हैं । सभी तीर्थंकरों को नमन करते हुए उत्तम क्षमा पर्व पर्यूषण पर्व एवं बुद्धि विनायक  गणेश विसर्जन पर्व पर आप सबको को शत-शत नमन करता हूं ।   मुझसे जाने अनजाने में अगर कोई ऐसी अभिव्यक्ति हो गई हो जो आपके सम्मान और मानसिक भाव के लिए अनुचित हो इसलिए मैं बिना किसी संकोच क्षमा प्रार्थी हूं . *गिरीश बिल्लोरे मुकुल* संचालक बालभवन जबलपुर