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जुलाई, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सर्वदा होती हो तुम माँ

सर्वदा  होती हो तुम  माँ हाँ भाव के प्रभाव में नहीं वरन सत्य है मेरा चिंतन तुम सदा माँ हो ... माँ हो माँ  हो तुम .... विराट दर्शन कराती हो कृष्ण को क्योंकि तुम खुद विराट हो... विराट दर्शाना माँ जब किसी माँ को स्तनपान कराते देखता हूँ तो रोमांचित हो अपलक देखता ही रह जाता हूँ.. सव्यसाची तुम बहुत याद आती हो ........ पूरे विश्व शिशु को क्षुधा मिटाती माँ तुम्हारी शत-शत वन्दना क्यों न करूँ ? सुहाती नहीं है कोई वर्जना तुम अहर्निश करती जो अमिय-सर्जना माँ सोचता हूँ विराट तुम ही है.. 

किसी ने न दिया था आशीर्वाद पुत्रीवती भव:

मेरी बेटी Shivani Billore 6 महीने विदेश में रहेगी ... खुशी इस बात की नहीं है मुझे बल्कि खुश इस लिए हूँ कि वो मेरे एक गीत (  "मधुर सुर न सुनाई दे जिस घर में वो घर कैसा"  ) को अर्थ दे रही है.. " वो बेटी ही तो होती है कुलों को जोड़ लेती है अगर अवसर मिले तो वो मुहाने मोड़ देती है युगों से बेटियों को तुम परखते हो न जाने क्यूं.. ? जनम लेने तो दो उसको जनम-लेने से डर कैसा.. ? और # अमेया वो हमारे कुल की बेटी जो पहली US नागरिक है..... बड़ी बात क्या है........ बड़ी बात ये है कि - "दौनों बेटियाँ ही तो हैं "                                             :::::::::::::::::::::::::::::::: ये 1999 की एक यादगार तस्वीर है . मेरी बेटियों ने अपनी ममेरी बहनों के साथ तस्वीर खिंचवाई मुझे याद है दफ्तर से लौट कर इनसे निपटना बड़ा मुश्किल काम हुआ करता था. इस आलेख के लिखे जाने के ठीक 17 बरस पहले ... हम दौनों के पीछे फोटो खिंचवाने वाली ये बेटियाँ बेटों से कम कहाँ ..? बेटे न हमारे हैं न बच्चों के मामा जी के ..... लोगों से खूब आशीर्वाद मिले - पुत्रवती भव: कहा..

हम न चिल्लर न थोक रहे .!!

प्रिय से मिलना जो पूजा है, लोग हमें क्यों रोक रहे . हिलमिल के पूजन कर लें, दर्द रहे न शोक रहे . ! जब जब मौसम हुआ चुनावी, पलपल द्वार बजाते थे- जैसे ही ये मौसम बदला,हम  चिल्लर न थोक रहे .!! बहन-बेटियाँ पेश करो ! शर्म न आई बेशर्मो – भीड़ के जाहिल देखो कैसे जोर से ताली ठोक रहे ..? लाखों प्राण निगलने वाले- झुलसाते हैं घाटी को – बाईस इनके मरे तो देखो कैसे छाती ठोक रहे ? मनमानस के बंटवारे को, कैंची जैसी चली जुबां - लाल माई के अब तो जागो- वो पथ में गढ्ढे खोद रहे . 

वक्त कम है, बहुत काम मुझे जाने दे !!

बहुत मसरूफ हूँ , मत रोक मुझे जाने दे ! वक्त कम है,  बहुत  काम ! मुझे जाने दे    !! मैं  तो उसमें समाना चाहता हूँ... वो लहर जा रही है मत रोक चले जाने दे !! बहुत हैं मुद्दे जो बातों से नहीं सुलझेंगे- साफ़ होंगें सभी मसले वक्त आने दे !! उस दरगाह से उठ फुर्र हुई गौरैया - चुग्गा मंदिर में दिखा जाके उसे खाने दे !! सांझ टीवी पे जुड़े लोग हल्ले वाले -   गीत कबिरा और  मीरा के मुझे गाने दे .

ब्रह्मपुत्र का सपूत : जाधव पीयेंग 👌

यह कहानी वाट्स एप के ज़रिये प्राप्त हुई मूल लेखन की जानकारी नहीं है अज्ञात लेखक को नमन आभार  अविश्वसनीय, बेजोड़, अदभुत कहानी, आसाम में रहने वाले एक आदिवासी की जिसके कामो की गूंज ब्रह्मपुत्र की लहरों में बहते, सोंधी जंगली हवाओं में महकते, घने पेड़ो की सरसराहट से होते, हज़ारो किलोमीटर दूर दिल्ली में "राष्ट्रपति भवन" तक पहुंची। इस सीधे साधे आदिवासी का नाम है “जाधव पीयेंग”। चलिए कहानी शुरू होने के पहले छोटी सी जानकारी दे दूँ। “ब्रह्मपुत्र” नदी को पूर्वोत्तर का अभिशाप भी कहा जाता है। इसका कारण है कि जब यह आसाम तक पहुँचती है तो अपने साथ लम्बी दूरी से बहा कर लायी हुई मिटटी, रेत और पहाड़ी पथरीले अवशेष विशाल “द्रव मलबे” के रूप में लाती है, जिससे  नदी की गहराई अपेक्षाकृत कम हो चौड़ाई में फैल किनारे के गांवो को प्रभावित करती है। मानसून में इसके चौड़े पाट हर साल पेड़ पौधो, हरियाली और गांवो को अपने संग बहा ले जाते हैं।  ब्रह्मपुत्र नदी का विशालता से फैला हरियाली रहित, बंजर रेतीला तट लगभग रेगिस्तान लगता था। चलिए अब आते है हमारे कहानी के नायक “जाधव पियेंग” पर। वर्ष 1979 में जाधव 10 वी परीक्षा

अतिथि लेखन : ऋषिकेश मुंजे की नज़र से ज़ाकिर-नाईक

              ऋषिकेश मुंजे     एक महाशय हैं .."जाकिर नाइक"। ....टीवी के चैनल बदलते हुए ....एक उर्दू चैनल आता है peace tv ... उस पर तकरीर करते हुए ये अक्सर दिखाई दे जाते हैं। ...पहले जब ये दिख जाते थे तो एक जिज्ञासु प्रवृत्ति का होने की वजह से मैं इन्हें कुछ देर सुन भी लेता था । इनकी विद्वता एवं गजब की स्मरण शक्ति का मैं कायल था । श्रोताओं के किसी भी प्रश्न का उत्तर इतने तार्किक ढंग से.. तथ्यों के आधार पर देते हुए सुनता था तो लोगों के साथ साथ मैं भी हैरान हो जाता था। इन्हें "कुरान शरीफ" की इतनी अच्छी पकड़ है कि सुरा , आयत एवं पेज नंबर तक जुबानी याद है।                       यही नहीं..वेदों के अध्यायों , श्लोकों एवं मंत्रों को भी बड़ी सहजता से उद्ध्रित करते हैं । इस्लामिक विद्वान तो हैं ही साथ ही सनातन एवं ईसाई धर्मों पर भी अच्छी पकड़ है। अपने तर्कों के द्वारा ये हर हाल में इस्लाम को सभी धर्मों से श्रेष्ठ बताने में कोई कसर बाकी नहीं रखते हैं।...चलिए ये भी ठीक है...सभी धर्म प्रचारक अपने अपने धर्मों को अच्छा ही साबित करना चाहते हैं। परंतु..अभी कुछ ही दिनों पहले

बच्चो जो निरंतर काम करता है वो हारता नहीं.. जीतता है ...

प्रिय बच्चो ,              सबको ढेर सारा प्यार           चकमक से आप का जुड़ जाना मुझे बहुत अच्छा लगा . प्यारे बच्चों मैं बालभवन जबलपुर में नन्हे मुन्नों का मित्र हूँ.   मेरे कमरे में साहित्य कक्षा भी लगती है.  बच्चे कविता,कहानी, लेख, लिखने के गुर सीखते हैं. शिप्रा दीदी अपने कमरे में गाना-वाना सिखातीं हैं, सोमनाथ जी तबला सिखाते हैं तो रेनू दीदी वाह क्या कहने वो तो कमाल हैं पेंटिंग, हस्तकला, मूर्तिकला, सिखातीं हैं. इन दिनों बच्चों को हमने कई बातें सिखाईं और उनसे ढेर सारी अच्छी बातें सीखीं . इस साल हमारे शिवा ने बालभवन गीत लिखा जिसे मध्य-प्रदेश के सभी बालभवनों का गीत के रूप में स्वीकार लिया. और हाँ इस गीत को गाया है आपके सत्शुभ्र मिश्रा अंकल ने जो खुद मेरी तरह विभाग के ऑफिसर हैं. बच्चो हम बड़े हो गए ... पर सच हम बच्चे नहीं बन पाएंगे... पर  हम लकी हैं जो आपके  आप सबके बीच  हैं अपने बीते बचपन को आप सबमें देख पा रहे हैं. आप सब आने वाले कल को सुन्दर बनायेंगे न तो कुछ बातें ज़रूर सोचना ....... जानते हो क्या सोचना है... आपको सोचना है... अगर कामयाब बनाना है तो कामयाबी के लिए कोई शार्ट-कट

*Why I love ‎Mother Helen Keller‬..?*

Today I Tweet &  Post on  Whatsapp –“Why I love  Mother Helen Keller ..? because she has taught me Don't kill your voice although the Lion before you ” if you want to know about my Mother you must read this story on http://www.biography.com  Synopsis Helen Adams Keller was born on June 27, 1880 in Tuscumbia, Alabama. In 1882, she fell ill and was struck blind, deaf and mute. Beginning in 1887, Keller's teacher, Anne Sullivan, helped her make tremendous progress with her ability to communicate, and Keller went on to college, graduating in 1904. In 1920, Keller helped found the ACLU. During her lifetime, she received many honors in recognition of her accomplishments. Early Life Helen Keller was the first of two daughters born to Arthur H. Keller and Katherine Adams Keller. She also had two older stepbrothers. Keller's father had proudly served as an officer in the Confederate Army during the Civil War. The family was not particularly wealthy and earned in

असली विकास भैया बनाम सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें

                एक टी वी के एंकर एवं प्रस्तोता को सरकार की इतनी चिंता थी कि वे वेतन आयोग के विरोध में उतरने वाले कर्मियों का डी एन ए टेस्ट करने लगे वे दार्शनिक होकर चाणक्य को भी अपने संवाद में ले आए. उधर तो सरकार ने विकास भैया की वज़ह से  वेतन आयोग, की सिफारिशों के लिए लगभग 24 फीसदी इजाफा कर पाई ...... यूं तो विकास भैया की उम्र   इस 15 अगस्त को 69 साल की हो जाएगी. पर   सत्ता पर जिस दल को भी जनता जब से  काबिज कराती है तब से वो दल प्रचारित करता है कि- "विकास पैदा हो गया है .. अब" अब आप तय करो कि विकास भैया की वास्तविक उम्र क्या है. मेरे हिसाब से विकास भैया 15 अगस्त 2016  को 69 के हो जाएंगें.             हम मुद्दे पे आते हैं.....   टी वी के एंकर  महाशय कह रहे थे कि - "कर्मचारी निकम्मे हैं.. हालांकि उनकी शैली इतनी अच्छी है कि महाराज ने बड़ी चतुराई से निकम्मा और भ्रष्ट कहा.. विदेशियों का हवाला देकर व्यवस्था को दोषपूर्ण बताया."       यहाँ मुझे अचरज हो रहा है देख महान हस्तियों से अटा-पड़ा है क्या 69 सालों  में व्यवस्था सुधारने में कोई भी सकम्मा अभ्रष्ट व्यक्ति न प्रसूता