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मई, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नक्सलवाद आतंकवाद का सहोदर ..

                                                      बेशक़ इनको    माओत्से तुंग की आत्मा कोस रही होगी   .... नक्सली हिंसक प्रवृत्ति के ध्वज वाहकों को.क्योंकि वे कायर न थे ऐसा ब्रजेश त्रिपाठी जी ने अपने ब्लाग पर   दरभा - दर्भ और डर के दंश   शीर्षक से लिखे आलेख में लिखा है.                            कोसे न कोसे नक्सलवाद के पुरोधाओं को समझाना  अब ज़रूरी हो गया है कि "भारत भारत है यहां माओ के फ़लसफ़े को कोई स्थान नहीं..!!"                   पर अब सवाल यह है कि लाल खाल पहने इन आतंकियों अंत कैसे होगा . इनके सफ़ाए के लिये किस तकनीकि का प्रयोग किया जाए कि भोले भाले आदिवासियों जिनका इस्तेमाल यह कायर समूह बतौर ढाल करता है को बिना हानि पहुंचाए समस्या का अंत हो.             नक्सलवाद को विस्तार मिलने की सीधी वज़ह ये है कि उनके द्वारा सबसे पहले गतिविधि क्षेत्र के वाशिंदों के मानस पर अपने आप को अंकित किया.. उनसे बेहतर संवाद सेतु बनते ही उनमें एक भय का वातावरण भी बना दिया ताकि वे (   क्षेत्र के वाशिंदे ) भयाधारित प्रीति से सम्बद्ध रहें.                                          

Nirvana Pithadhishwar Acharya Mahamandleshwar Maharaj Shri Swami Vishvadewanand took Samadhi on 7th May 2013.By Swami Anantbodh Chaitany ji

Born in virtuous and sacred Brahman family on 12-12-1949, he showed signs of fervor towards spirituality during his childhood. He read many Vedic scriptures in his childhood which progressively developed in him a resolve to lead a Sanyasi’s (A life of renunciation) life for the welfare of mankind. Pujya Nirvana Pithadhishwar Acharya Mahamandleshwar Maharaj Shri Swami Vishvadewanand Guriji was initiated into an order of Sanyasis of Adi Shankaracharya, by one of the greatest saints revered Pujya Nirvana Pithadhishwar Acharya Mahamandleshwar Swami Shri Atulananda Puriji (Vedant keshari). He studied M.A.in English,Acharya in Darshan , Vedas, Upanishads, Yoga and other ancient scriptures under the guidance of great saints ofIndia. Following Vedic tradition of Great Sanyas Ashram Elise Bridg Ahemdabad and the land of scholars the great tradition of Govind Math, Varanasi, he spent many years of life in intense penance and Sadhana (spiritual practices for self realization) at many places i

भूमंडलीकरण के भयावह दौर और गदहे-गदही के संकट

भूमंडलीकरण के भयावह दौर में गधों की स्थिति बेहद नाज़ुक एवम चिंतनीय हो चुकी है . इस बात को लेकर समाज शास्त्री बेहद चिंतित हैं. उनको चिंतित होना भी चाहिये समाजशास्त्री चिंतित न होंगे तो संसद को चिंतित होना चाहिये. लोग भी अज़ीब हैं हर बात की ज़वाबदेही का ठीकरा सरकार के मत्थे फ़ोड़ने पे आमादा होने लगते हैं. मित्रो  -" ये... अच्छी बात नहीं..है..!" सरकार का काम है देखना देखना और देखते रहना.. और फ़िर कभी खुद कभी प्रवक्ता के ज़रिये जनता के समक्ष यह निवेदित करना-"हमें देखना था , हमने देखा, हमें देखना है तो हम देख रहे हैं ".. यानी सारे काम देखने दिखाने में निपटाने का हुनर सरकार नामक संस्था में होता है. जी आप गलत समझे मैं सरकार अंकल की बात नहीं कर रहा हूं.. मै सरकार यानी गवर्नमेंट की बात कर रहा हूं. हो सकता है सरकार अंकल ऐसा कथन कहते हों पर यहां उनको बेवज़ह न घसीटा जाये. भई अब कोई बीच में बोले मेरी अभिव्यक्ति में बाधा न डाले.. रेडी एक दो तीन ......... हां, तो अब पढिये अर्र तुम फ़िर..! बैठो.... चुपचाप..  तुमाए काम की बात लिख रहा हूं..तुम हो कि जबरन .. चलो बैठो..     

अलविदा साज़ जबलपुरी जी : संजीव वर्मा सलिल

                                    जबलपुर, १८ मई २०१३. सनातन सलिल नर्मदा तट पर पवित्र अग्नि के हवाले की गयी क्षीण काया चमकती आँखों और मीठी वाणी को हमेशा-हमेशा के लिए हम सबसे दूर ले गयी किन्तु उसका कलाम उसकी किताबों और हमारे ज़हनों में चिरकाल तक उसे जिंदा रखेगा. साज़ जबलपुरी एक ऐसी शख्सियत है जो नर्मदा के पानी को तरह का तरह पारदर्शी रहा. उसे जब जो ठीक लगा बेबाकी से बिना किसी की फ़िक्र किये कहा. आर ्थिक-पारिवारिक-सामाजिक बंदिशें उसके कदम नहीं रोक सकीं. उसने वह सब किया जो उसे जरूरी लगा... पेट पालने के लिए सरकारी नौकरी जिससे उसका रिश्ता तन के खाने के लिए तनखा जुटाने तक सीमित था, मन की बात कहने के लिए शायरी, तकलीफज़दा इंसानों की मदद और अपनी बात को फ़ैलाने के लिए पत्रकारिता, तालीम फ़ैलाने और कुछ पैसा जुगाड़ने के लिए एन.जी.ओ. और साहित्यिक मठाधीशों को पटखनी देने के लिए संस्था का गठन-किताबों का प्रकाशन. बिना शक साज़ किताबी आदर्शवादी नहीं, व्यवहारवादी था. उसका नजरिया बिलकुल साफ़ था कि वह मसीहा नहीं है, आम आदमी है. उसे आगे बढ़ना है तो समय के साथ उसी जुबान में बोलना होगा जिसे समय समझता है. हा

मुझे ज़हर और ज़ख्म की भी ज़रूरत है ला देना .

मिसफ़िट की पाठक संख्या अब "एक लाख"                       मा दक सुकन्या के दीवाने बहुतेरे थे उनमें से एक था मेरा अनाम दोस्त नाम तो था उसका पर किसी को अकारण तनाव नहीं देना चाहता . सुकन्या पर डोरे डालने वाला किसी कम्पनी का ओहदेदार मुलाज़िम है . आज़ अचानक उससे मुलाक़ात हुई.. काफ़ी घर में बैठा उदास कुछ सोच रहा था. दोस्त है सोचा उदासी दूर कर दूं इसकी. बातों का दौर चला भाई मेरी बातों में आ गये और जो कुछ कहा पेश-ए-नज़र है......................                                            मित्र ने बताया कि उसे एक लड़की से इश्क़ हो गया था. इश्क़ इक तरफ़ा था पर इश्क तो था. एक रविवार सुबह सवेरे उसकी मुलाक़ात उस सुकन्या से हुई .. मित्र की बात ज़रा धीमी गति से चल रही थी सो मैने कहा- भई, ज़रा ज़ल्दी पर तफ़सील से बयां करो दास्ताने-बेवफ़ाई.. उसने जो बताया  कुछ यू था........ अनाम मैंने पूछा - मुझे , कुछ देर का साथ मिलेगा सुकन्या.. सुकन्या -   क्यों नहीं ! ज़रूर मिलेगा , सुकन्या के   उत्तर में मादक खनक ... ने दीवाना बना दिया था. .. अनाम को बातें बहुत हुईं देर तक चलीं बातों ही बातों

"झंपिंग ज़पांग..झंपिंग ज़पांग.के बाद . गीली गीली......!!"

                        हमारे देश के  चिंरंजीव श्री संत ,   अजीत चंदीला  और अंकित चव्हाण की    पाकिस्तान की डी कम्पनी के गुर्गे  मास्टर सलमान ,   कुमार ,   विक्की ,   जंबू ,   बबलू ,   गुलाब मुहम्मद ,   उमर भाई ,   कासिफ भाई ,   रेहमद भाई ,   शरीफ भाई और डॉक्टर जावेद. भारत में इसके सूत्रधार रमेश व्यास,  मनोज मेट्रो ,   बंटी ,   जीजू जनार्दन , जूपिटर के साथ जैसे ही झंपिंग झपांग शुरु हुई कि दिल्ली के पोलिस वाले साहब ने उनकी सुत्तन गीली गीली कर दी..  कहानी की शुरुआत शुरु से होती है.. जब फ़रहा मैडम से आईपीएल वाले ज़िंगल के लिये बात करने गये थे.. फ़रहा को शायद कहा होगा कि "भाई सिर्फ़ मैच नहीं देखने का क्या....... बेट भी.." आखिरी के शब्द बोलो न बोलो फ़रहा मैडम जनता जान जाएगी..    इस पूरे खेल में भी  जीजू तत्व प्रधान है..आज़कल जो भी मामले उभरते हैं उनमें  जीजू तत्व की उपस्थिति सदा मिलती है. अब बताइये सारी खुदाई एक तरफ़ कोई झुट्टा थोड़े न कहा होगा.. सटीक मुहावरा है.. है न वाड्रा सा’ब. आप भी तो जीजू हो कि नईं अर्र बुरा न मानो दद्दा हम तो मज़ाक या कर रये हैं.. राहुल की तरफ़ से..

आम आदमी का ब्लाग ट्रायल

                सुदूर समंदर में एक द्वीप है जहां से मैं एक वाकया आपके सामने पेश करने की गुस्ताखी कर रहा हूं.. उस द्वीप का वातावरण ठीक हमारे आसपास के वातावरण की मानिंद ही है. वहां एक अदालत में  एक आदमजात  किसी अपराध में कठघरे में खड़ा किया गया था.. लोग बतिया रहे थे  उस पर आरोप है  कि उसने सरकार से कुछ बेजा मांग की थी. वो सरकार से  सरकार और उसकी बनाई व्यवस्था पर लगाम लगाने की गुस्ताखी कर बैठा .        द्वीप की सरकार बड़ी  बेलगाम थी विरोधी दल के  लोग   सरकार को लगाम लगाने की सलाह दे रहे थे . सो सरकार ने    लगाम के उत्पादन अवैधानिक घोषित कर दिया भाई हैं कि अपना लगाम बनाने का कारखाना बंद न करने पे आमादा थे.. हज़ूर के कान में बात जब दिखाई दी तो उनने अपने से बड़े हाक़िम को दिखाई बड़े ने और बड़े को और बड़े ने उससे बड़े को फ़िर क्या बात निकली दूर तलक जानी ही थी.. सबने बात देखी वो भी कान से.. आप सोच रहे हो न कि बात कान से कैसे देखी होगी.. ?              सवाल आपका जायज़ है ज़नाब पर आप जानते ही हो कि  आजकल अहलकार से ओहदेदार .. हाक़िम से हुक़्मरान तक सभी के कान आंख बन गये हैं वे सब कान से

मेरी बेटी मेरा गौरव : डा. मनोहर अगनानी

यह आलेख डा. मनोहर अगनानी के ब्लाग बिटिया से साभार प्राप्त किया गया है मैंने  ,d izeq[k lekpkj&aसमाचार पत्र में sa  “Pink or Blue: A new test makes it possible to tell the sex of the foetus at seven weeks – but should we use it?”  'kh"kZd ls ,d vkys[k  पढ़ा था   जिसमें  ml VsLV dk ft+Ø fd;k x;k gS] ftlesa xHkZorh eka ds jDr ijh{k.k ls lkr lIrkg dh xHkkZoLFkk ds nkSjku gh Hkzw.k dk fyax Kkr fd;k tk ldrk gS A vkys[k esa ysf[kdk us ;g iz’u fd;k gS fd ^^D;k ge Hkkjrh;ksa  dk bl VsLV ds ek/;e ls Hkzw.k dk fyax Kkr djus dh vuqefr] bl gdhdr dk tkuus ds cktown nh tkuh pkfg, fd dqN yksx xHkZ esa csVh gksus ij rRdkyxHkZikr djkuk pkgsasxs \ ysf[kdk us vius gh bl iz’u ds mRrj esa viuh lgefrnsrs gq, ;g vk’kadk Hkh O;Dr dh gS fd laHkor% muds fopkjksa ls ;g ekuktk,xk fd os g`n;ghu gSa ,oa mUgsa dbZ yksxksa dh vkykspuk dk f’kdkj Hkh gksukiMs+xk ysf[kdk us vius bl er ds leFkZu esa ;g iz’u fd;k gS fd ;fn blijh{k.k ds ek/;e ls fyax Kkr djus dh vuqefr ugha nh tk, rks ,sls nEifRr]tks

त्रिपुरी के कलचुरि : ललित शर्मा

त्रिपुर सुंदरी तेवर सहोदर प्रदेश छत्तीसगढ़ के मशहूर घुमक्कड़ ब्लागर श्री ललित शर्मा ( जो पुरातात्विक विषयों पर ब्लाग लिखतें है) का संक्षिप्त ट्रेवलाग  बिना कांट छांट के प्रस्तुत है -जो उनके ब्लाग  ललित शर्मा . काम   से लिया गया है-   गिरीश बिल्लोरे मुकुल   )           आ ज का दिन भी पूरा ही था हमारे पास। रात 9 बजे रायपुर के लिए मेरी ट्रेन थी। मोहर्रम के दौरान हुए हुड़दंग के कारण कुछ थाना क्षेत्रों में कर्फ़्यू लगा दिया गया था। आज कहीं जाने का मन नहीं था। गिरीश दादा को फ़ोन लगाए तो पता चला कि वे मोर  डूबलिया कार्यक्रम में डूबे हुए हैं। ना नुकर करते 11 बज गए। आखिर त्रिपुर सुंदरी दर्शन के लिए हम निकल पड़े। शर्मा जी नेविगेटर और हम ड्रायवर। दोनो ही एक जैसे थे, रास्ता पूछते पाछते भेड़ाघाट रोड़ पकड़ लिए। त्रिपुर सुंदरी मंदिर से पहले तेवर गाँव आता है। यही गाँव जबलपुर के ब्लाग-लेखक श्री विजय तिवारी जी का जन्म स्थान एवं पुरखौती है। हमने त्रिपुर सुंदरी देवी के दर्शन किए और कुछ चित्र भी लिए। मंदिर के पुजारी दुबे जी ने बढिया स्वागत किया।  तेवर का तालाब ससम्मान देवी दर्शन के पश्