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सितंबर, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

खुद को नया विस्तार देने जा रहा हूँ

खुद को नया विस्तार देने जा रहा हूँ  तय नहीं मंजिल मगर मैं जा रहा हूँ . मैं अकेला ही तो आया था यहाँ – इक जुड़ा दूजा जुड़ा फिर कारवां .... बात जो थी कल में अब वो कहाँ – सबके ज़ेहन में पनपते आसमाँ !      निकल के घर से बताने ये ही सबको आ रहा हूँ !! ::::::::::::::::: मखमली  बिस्तर  की  जुगतें  मत लगा -   शूल की शैया सजा दे, तेग से तकिया बना ! अतिथि हूँ आपका, कुछेक-दिन का साथ है – फिर वही यायावरी है और तड़पती आवाज़ है       मीत, अब में जा रहा हूँ गीत भी ले जा रहा हूँ !! ::::::::::::::::: सच कहूं संघर्ष हूँ !  संघर्ष का परिणाम हूँ . झुका न जो सच कभी, वो टूटता अंजाम हूँ ! गीत पीडा के मुझे अब दिल से गाने दीजिये – पल हैं जितने पास मेरे मुस्कुराने दीजिये !!      पीर इतनी है कि अब मैं मुस्कुराने जा रहा हूँ !!                        गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

बालभवन में मेरा रचनात्मक एक साल

बालभवन जबलपुर के संचालक (सहायक-संचालक स्तर ) के पद पर पूरे #365 दिन 26 सितम्बर 15  हो चुके हैं .  बालभवन में इस सफल एक साल के मौके पर  आज ज़रा सी पर्सनल बात करने का हक़ तो है न ..   आज से नई पारी पर हूँ  . आशीर्वाद दीजिये  मैंने से मुझे हम बनाने में मुश्किल से एक माह लगा और फिर शुरू हुई हम व हमारी कार्ययात्रा . सबसे पहले हमें  हमारी पहचान को बनाना था सो कोशिश की भुत झटके मिले . विरोधियों का रडार हमारे सिगनल कैच करता उसका अधकचरा विश्लेषण करता और नकारात्मक वैचारिक प्रवाह को उत्प्रेरित करता पर जब भी वार होता हम सम्हाल लेते हम सम्हाल सकते थे तो सम्हाल लिया ... मैं ये वो अकेले न सम्हाल पाते 01  नवम्बर को मानस भवन सभागार में अचानक बच्चों ने वो कमाल कर दिखाया जो किसी ने सपने में भी न सोचा था . फिर शहीद-स्मारक में   14 नवम्बर 14 को हमारी टीम ने जो किया [ जिसे रोकने की भरपूर कोशिशें की  थीं ] . वो अविस्मरनीय रहा . बच्चों की टीम ने बिना धन खर्च किये ऐसे प्रेरक कार्यक्रम को आकार दे दिया जो आज भी मेरे मानस से हटाए न हट सका है . . क्रम जारी रहा प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रानिक मीडिया सबने सच्ची कोशिशे

पब्लिक सेक्टर , प्राइवेट सेक्टर और अब पर्सनल सेक्टर से हो सकता है विश्व के 1.3 बिलियन गरीबों का भला

मित्रो यह भाषण यथा प्राप्त प्रस्तुत है जिसका  विश्लेषण  मिसफिट के आगामी अंक में प्रस्तुत  किया जावेगा .  आधुनिक महानायक महात्मा गांधी ने कहा था कि हम उस भावी विश्व के लिए भी चिंता करें जिसे हम नहीं देख पाएंगे। जब-जब विश्व ने एक साथ आकर भविष्य के प्रति अपने दायित्व को निभाया है , मानवता के विकास को सही दिशा और एक नया संबल मिला है। सत्तर साल पहले जब एक भयानक विश्व युद्ध का अंत हुआ था , तब इस संगठन के रूप में एक नई आशा ने जन्म लिया था। आज हम फिर मानवता की नई दिशा तय करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। मैं इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मलेन के आयोजन के लिए महासचिव महोदय को ह्रदय से बधाई देता हूँ। एजेंडा 2030 का विजन महत्वाकांक्षी है और उद्देश्य उतने ही व्यापक हैं। यह उन समस्याओं को प्राथमिकता देता है , जो पिछले कई दशकों से चल रही हैं। साथ ही साथ यह सामाजिक , आर्थिक और पर्यावरण के विषय में हमारी परिपक्व होती हुई सोच को भी दर्शाता है। यह ख़ुशी की बात है कि हम सब गरीबी से मुक्त विश्व का सपना देख रहे हैं। हमारे निर्धारित लक्ष्यों में गरीबी उन्मूलन सब से ऊपर है। आज दुनिया में 1.3 बिलियन लोग गर

"वास्तविकता ये है कि लोग अति कुंठित होते जा रहे हैं"

बुकर सम्मान पाने वाली अरुंधती जैसी प्रतिष्ठित लेखन कर्म में जुटीं लेखिका गांधी को नकार रहीं हैं .  हर कोई किसी दूसरे के धार्मिक रिचुअल्स को खारिज कर रहा है  पाकिस्तानी टीवी पर अन्य धर्मों के खिलाफ विषवमन कर रहा है  यानी जिसे देखिये अपने अपने स्केल लेकर भारत में सौजन्यता बिगाड़ने में सक्रीय हैं .  प्रधान मंत्री  की यात्राओं को लेकर फूहड़ मज़ाक करते लोग       इस सब बातों को लेकर आज मैंने एक ट्विट किया - "वास्तविकता ये है कि लोग अति कुंठित होते जा रहे हैं...!"  पर न जाने क्यों आज़कल कुछ लोग न जाने क्यों मेरे ट्विटस और फेसबुकिया पोस्टों को सर्वथा व्यक्तिगत मान के मुझे नसीहत देने तक पर उतारू हो जाते हैं .  सो हम ठहरे लेखक लिख ही देते हैं ऐसों के लिए ... लिख देते हैं वो भी बुन्देली मैं -                                                                               - "बड्डा आज जे लिख गया कल उसने वो लिक्खा था .. !" अब बताओ भैया अगर हम कछु लिखें तो का इन ओरों पूछ खें लिखबी का .. ! हमाओ लिक्खो कोई कलेऊ नैंयाँ जो कि तुमाए हिसाब सेई बनै .. हम हमाए हिसाब से लिख रए ह

नार्मदीय ब्राह्मण समाज के प्रादेशिक समागम में बुजुर्गों समाज सेवियों , महिलाओं एवं युवा प्रतिभाओं को सम्मानित

जबलपुर / दिनांक 19 सितम्बर 15 नार्मदीय लोक पत्रिका प्रकाशित करने वाले नार्मदीय लोकसेवा ट्रष्ट इंदौर द्वारा नार्मदीय ब्राम्हण समाज जबलपुर के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 19 सितम्बर 15 को एक सम्मान सराहना कार्यक्रम का आयोजन किया कलेक्टर शहडोल श्री मुकेश शुक्ल (IAS), की अध्यक्षता एवं श्री काशीनाथ उपाध्याय (खंडवा ) के मुख्य आतिथ्य एवं डा. एस डी उपाध्याय (अध्यक्ष, नार्मदीय ब्राह्मण समाज जबलपुर), श्री मदन सराफ (इंदौर), श्री आर. बी शर्मा, श्री गोविन्द गुहा (भोपाल) के विशेष आतिथ्य में संपन्न हुआ . प्रादेशिक स्तर के इस आयोजन का मूल उद्देश्य नार्मदीय लोक सेवा ट्रस्ट इंदौर द्वारा नियतकालिक मासिक-पत्रिका “नार्मदीय-लोक” के माध्यम से संवाद मे निरंतरता बनाए रखना एवं नार्मदीय समाज के वरिष्ठ आधार स्तंभों एवं मातृशक्ति को सम्मानित एवं समादरित करना तथा युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना रहा है कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा माँ नर्मदा के पूजन-अर्चन हुआ तदुपरांत नार्मदीय समाज जबलपुर के कलाकारों ने चरणबद्ध संगीतमय प्रस्तुतियां दीं . एवं समस्त अतिथियों का नार्मदेय परिवार जबलपुर के सदस्यों ने स्

दसवें वैश्विक हिन्दी सम्मेलन पर कुमारेन्द्र सिंह सेंगर की प्रारम्भिक रपट

श्री कुमारेन्द्र सिंह सेंगर  दसवें विश्व हिन्दी सम्मलेन , २०१५ का आयोजन ३२ वर्ष बाद भारत देश में १०-१२ सितम्बर को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित हुआ. इस सम्मलेन में सहभागिता करने का अवसर मिला. पहले दिन देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सम्मलेन का उद्घाटन किया गया. ‘ रामधारी सिंह दिनकर सभागार ’ में हुए उद्घाटन सत्र में अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने हिन्दी के विकास पर , उसके संवर्धन पर , अन्य भाषाओं के शब्दों के स्वीकार्य पर , डिजिटल दुनिया में हिन्दी के अधिकाधिक उपयोग आदि पर जोर दिया. उनके अतिरिक्त मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वागत भाषण , विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सम्मलेन की प्रस्तावना और आभार व्यक्त वी० के० सिंह द्वारा किया गया. उद्घाटन सत्र में ही दसवें विश्व हिन्दी सम्मलेन से सम्बंधित डाक टिकट का लोकार्पण किया गया. इसके साथ-साथ गगनांचल पत्रिका के विशेषांक का , सम्मलेन की स्मारिका और एक पुस्तक ‘ प्रवासी साहित्य : जोहान्सवर्ग से आगे ’ का विमोचन किया गया. .          उद्घाटन सत्र के पश्चात् सम्मलेन को विभिन्न सत्रों में विभक्त किया गय

कम से कम हिन्दी भाषा को सियासी परिधि से मुक्त रखिये राजेश जोशी जी

 भारत में साहित्यकारों का एक विशेष वर्ग खुमारी के संसाधनों की कमी के चलते राजधानी में दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के एन पहले भोपाल में एक प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी कुंठा वमन करता नज़र आ रहा है . उनकी ही भाषा में कहा जाए तो इस प्रेस वार्ता में उनके विषय चुक गए हैं अब उनको हिन्दी में बाज़ार नजर आ रहा है . आरोप बहुत लगाए गए पर सब सियासी अधिक नज़र आ रहे हैं जिन मुद्दों का साहित्य से दूर दूर तक का कोई वास्ता नहीं ... !          ‘ हिंदी जगत: विस्तार एवं संभावनाएं ’ के मुख्य बिंदु पर होने वाले इस सम्मलेन को सियासी मुद्दों की परिधि में घेरने की कोशिश बेमानी है . राजेश जोशी साहब जैसे विद्वान साहित्यकार जाने किस मज़बूरी में हैं मेरी उनको सलाह है कि  कम से कम हिन्दी  सम्मलेन को सियासत से मुक्त रखिये  राजेश जोशी जी   . आपने व्यवस्था को कभी सुझाया  होगा ... शायद कि - हिन्दी को क़ानून की भाषा बनाओ .. ? हो सकता है कहा हो ........ ? पर पहले कोई नतीज़ा निकला.. ?  कैसे निकलता ....... उसे तो आज निकलना था. प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा है कि -"न्याय - प्रक्रिया की भाषा हिन्दी हो सकती है . "  क्या इससे

सु-स्वागतम् : 10वाँ विश्व हिन्दी सम्मेलन :शिवराज सिंह , मुख्यमंत्री मध्य-प्रदेश

व्यवस्था में लगे  अधिकारी  अदभुत समारोह स्थल एक पूर्वावलोकन       भारत के हृदय स्थल मध्यप्रदेश की सुंदर राजधानी भोपाल में 10 वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में देश-विदेश से पधारे सभी हिन्दी-प्रेमियों का साढ़े सात करोड़ मध्यप्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत , वंदन , अभिनंदन। सार्वजनिक जीवन में सामाजिक , धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन करने और उनमें शामिल होने के अवसर आते ही रहते हैं। सभी आयोजनों का अपना-अपना विशिष्ट महत्व होता है , लेकिन कुछ अनुष्ठान ऐसे होते हैं , जिनमें थोड़ा-सा योगदान करके भी जीवन में सार्थकता का बोध बढ़ जाता है। दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के आतिथ्य का अवसर मिलना मेरा परम सौभाग्य है। इस तीन दिन के हिन्दी महाकुंभ में करीब 39 देशों तथा भारत के कोने-कोने से करीब 2500 से अधिक हिन्दी-प्रेमी हिन्दी को और आगे बढ़ाने की दिशा में चिंतन , मंथन करेंगे। सम्मेलन की अवधि में सभी प्रतिभागियों तथा अतिथियों के सत्कार का विनम्र दायित्व निभाते हुए मुझे अत्याधिक आनंद और आह्लाद का अनुभव हो रहा है। हमारा हर्ष इस एक बात से कई गुना बढ़ जाता