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अगस्त, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कितना कठिन है रोबो बच्चों का प्रशिक्षण

साभार :- न्यूज़-ट्रैक  अक्सर  दुखी माता पिता को लेकर चिंतित हो जाता हूँ । चिंता का विषय बच्चे नहीं माँ बाप होते हैं । जो बच्चों के लिए खुद नैसर्किकता से बाहर वाले  काम करते हैं कि बच्चे का यंत्र बन जाना अवश्यंभावी है  जी हां बच्चे  एक मशीन यानी रोबोट बनकर रह गए हैं ।          एक दिन अपने 10 साल के बच्चे को लेकर एक माता आईँ जिनका कहना था उनके बेटे को बेहतरीन सिंगर बना दूं ।  मोहतरमा की नज़र में बच्चा सर्वगुण संपन्न था । जाने कितनी खूबियाँ पट पट गिना गईं   ।      मैंने पूछा - बच्चे पर आप कुछ अधिक ध्यान देतीं है     वे बोलीं - साहब अगर हम इन पर ध्यान न दें तो दुनियां में पिछड़ जाएंगे ।     कुल मिला के माँ बच्चे में आइंस्टाइन से लेकर सर्वोच्च व्यक्तित्वों तक  सब कुछ का मिश्रण घोल के डालना चाहतीं थीं । विनोद वश हमने पूछा - आप अपने बेटे को कैसा गायक बनाना चाहतीं हैं ? उत्तर था  एकदम किशोर कुमार जैसा ! ये अलहदा बात है कि ये युग  हनी सिंग का युग  है ।      उस बच्चे की दिनचर्या देखें तो आप हम  से अधिक बड़ा हो गया है वो सुबह 5 बजे उठता है । 7 बजे स्कूल जाता है 2 बजे लौटता है स्कूल से लंच लेता

"मुझे कन्यादान शब्द से आपत्ति है

जब ये ट्विट किया कि  "मुझे कन्यादान शब्द से आपत्ति है..निर्जीव एवम उपयोग में आने वाली वस्तु नहीं है बेटियां ..!" और यही फिर  इसे वाट्स एप  पर डाला  तो लोग बचाव की मुद्रा में आ एन मेरे सामने आ खड़े हुए... बुद्धिवान लोग  मुझे  अज्ञानी संस्कृत और  संस्कृति का ज्ञान न होने वाले व्यक्ति का आरोप जड़ने  लगे . कुछेक ने तो संस्कार विधि नामक पीडीऍफ़   भेज दी . क्या बताऊँ सोशल-मीडिया  के विद्वानों को कि भाई मेरा आशय साफ़ है ..... कि बेटी को वस्तु मत कहिये ... आपकी बेटी में एक आत्मा है जिसका और खुद आपका  सर्जक ईश्वर है... हमको आपको सबको देह के साथ कुछ साँसें दान में मिलीं हैं..  ! बेटी आत्मजा है.. जिसका जन्म एक आत्मिक और आध्यात्मिक घटना है. पर परम पंडितों को लगा मैं धर्म विरुद्ध हूँ.. अरे भाई ... समझो .. बेटी दान देने की वस्तु नहीं बल्कि पुत्र के समतुल्य आपकी संतान है. उसे संघर्ष में मत डालो .... कोई खाप पंचायत ब्रांड सीमाओं में मत जकड़ो उसका दान नहीं सम्मान के साथ परिवार बसाओ उसका विवाह संस्कार संपन्न करवाओ.. परन्तु उसकी आत्म-ध्वनि को सुनो ....... समझो ....... उसे देवी कहते हो फिर भी

दाना मांझी बनाम : सरकार मीडिया और सिस्टम

पलपल इंडिया पर प्रकाशित समाचार देखिये      दाना मांझी द्वारा पत्नी की लाश ढोते हुई तस्वीर ने पूरे देश में हलचल मचा कर रख दी. कालांहडी के भवानीपुरा के हॉस्पिटल में दाना माझी को अपनी पत्नी की लाश ढोने के लिए एंबुलेंस न मिलने पर सिस्टम की भी खूब आलोचना हुई. तस्वीर के सामने आने के बाद जांच के आदेश दिए गए , विरोध-प्रदर्शन किए गए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाए जाने का आश्वासन भी दिए गए. लेकिन अब खुद उस शख्स ने सामने आकर कहा है कि उसने किसी से मदद नहीं मांगी थी. उसने कहा कि उसकी हालत उस वक्त बहुत दयनीय थी और उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए. माझी ने बताया कि उसने खुद किसी से मदद नहीं मांगी थी. उसने हॉस्पिटल प्रशासन को भी सूचित नहीं किया था और अपनी पत्नी की लाश लेकर वह चुपचाप निकल पड़ा था. यहां तक कि उसने गांव तक पत्नी के शव को ले जाने के लिए भी किसी ग्रामीण से भी मदद नहीं मांगी थी. जब मुझे पता चला कि अब वह जीवित नहीं बची है तो मैं बिना किसी को कुछ बताए शव को ले जाने लगा. उस वक्त फीमेल वार्ड में कोई अटेंडेंट मौजूद नहीं था इसलिए मैंने खुद ही शव को घर तक कंधे पर ले

अमृता के डांस कांसेप्ट से वेडिंग और कार्पोरेट इवेंट्स में मस्ती का डबल डोज : सुमित वर्मा

देश की जानी मानी डांस परफार्मर और नृत्य श्री से सम्मानित अमृता जोशी ने अपने नए कांसेप्ट के जरिये वेडिंग संगीत और कार्पोरेट इवेंट्स में मस्ती की रंगीनियत बढ़ा दी है। उनके थीम बेस्ड डांस परफोर्मेंस से रिश्तों में नई मिठास और अपनापन दोगुना हो जाता है तो कार्पोरेट इवेंट्स भी उत्साह- उमंग के डबल डोज से निखर जाते हैं। अमृता की फुल ऑन एनर्जी और मस्त अदाएं किसी भी शाम को यादगार बना सकती हैं। ऐसे में यदि उनके द्वारा कोरियोग्राफ किये डांस हों तो मौज- मस्ती सिर चढ़ कर बोलती है।   अमृता न केवल कथक की ट्रेंड डांसर हैं ,  बल्कि उन्होंने फोक , राजिस्थानी , मराठी , गुजराती , पंजाबी और अन्य डांस स्टाइल में कई सालों का रियाज किया है। शादी की संगीत संध्या बने यादगार बालीवुड फिल्मों और सुपर हिट डांस नम्बर्स पर अमृता अपने स्टाइल में कोरियोग्राफ किए गीतों से ऐसा समां बांध देती हैं कि शादी की संगीत संध्या यादगार हो जाती है। वो बताती हैं कि मारवाड़ी , गुजराती-सिन्धी , पंजाबी परिवारों के लिए अलग- अलग ढंग से गीत- संगीत वाले कार्यक्रम बनाये हैं। परिवार से मिलकर और बातकर वो अपने थीम को क्रिएटिवली तैयार कर

पाकिस्तान 69 बरस का एक नासमझ बच्चा राष्ट्र :01

1948 तक मुक्त बलोचस्तान के मसले पर लालकिले से भारत के प्रधानमंत्री  श्री नरेंद्र मोदी की अभिव्यक्ति से पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि आयातित विचारकों के ज़ेहन में खलबली देखी जा रही है. भारत का बलोच लोगों के हित में बोलना एक लुहारी हथौड़ा साबित हुआ है. प्रधानमंत्री जी का बयान दक्षेश ही नहीं विश्व के लिए एक खुला और बड़ा बयान साबित हुआ है. उनका यह बयान बांगला देश विभाजन की याद दिला रहा है जब इंदिरा जी ने पूरी दृढ़ता के साथ न केवल शाब्दिक सपोर्ट किया बल्कि सामरिक सपोर्ट भी दिया. मोदी जी की अभिव्यक्ति एक प्रधानमंत्री के रूप में बड़ी और ज़वाबदारी भरी बात है. बलोच नागरिक इस अभिव्यक्ति पर बेहद अभिभूत हैं. अभिभूत तो हम भी हैं और होना ही चाहिए वज़ह साफ़ है कि खुद पाकिस्तान लाल शासन का अनुगामी  बन अपने बलात काबिज़ हिस्से के साथ जो कर रहा है उसे कम से कम भारत जैसे राष्ट्र का कोई भी व्यक्ति जो मानवता का हिमायती हो बर्दाश्त नहीं करेगा . मेरे विचार से श्री नरेन्द्र दामोदर मोदी के खिलाफ आयातित विचारधाराएं जो भी सोचें आम राय बलोच आवाम के साथ है. यहाँ अपनी समझ से जो देख पा रहा हूँ कि आयातित विचारधाराएं कभ

जबलपुर में प्रस्तावित ब्लागर्स मीट 2016 हेतु प्रारम्भिक सर्वे

सम्माननीय चिट्ठाकार महोदया / महोदय                               सादर अभिवादन                    चिट्ठाकारिता पर माह अक्टूबर 16 में एक मीट प्रस्तावित  है. आप नीचे दिए प्रारूप में अपनी राय अवश्य दीजिये साथ ही ब्लागर्स मीट में उपस्थिति हेतु  सहमति अथवा असहमति से भी स्पष्ट रूप से अवगत करावें .  मेरा ईमेल पता है ... girishbillore@gmail.com  क्रम जबलपुर ब्लागर्स मीट 2016  01 चिट्ठाकार  02 मुख्य ब्लॉग / ब्लाग्स   का नाम और URL  03 डाक पता फोन नंबर EMail सहित  04 जबलपुर ब्लागर्स मीट हेतु प्रस्तावित तिथि (आपकी ओर से )    05 आप परिवार के साथ आ सकतें हैं. ऐसी स्थिति में   आपके साथ आने वाले परिवार के सदस्यों की संख्या  06 ब्लागर्स मीट में आवास आहार व्यवस्था   स्वयं / रिश्तेदार के घर जाना चाहेंगे आयोजन समिति द्वारा की गई व्यवस्था चाहेंगे 07  आने का मार्ग रेल मार्ग रेलवे स्टेशन : जबलपुर  / मदनमहल

एंटी चुगलखोरी ड्राप

                          जिनके लिए कोई साहित्यकार लिखता है वो या तो अनपढ़ होता है अथवा अत्यधिक व्यस्त या फिर  इतना अहंकारी मानो सैकड़ो रावण समाए हुए हैं उनमें . आज के दौर में पढ़ने वालों की तादात कम ही है .   _______________________________________________________________ *गिरीश बिल्लोरे मुकुल*                                                                                    मुझे उन चुगली पसन्द लोगों से भले वो जानवर लगतें हैं , जो चुगलखोरी के शगल से खुद को बचा लेते हैं । इसके बदले वे जुगाली करते हैं  । अपने आप को श्रेष्ठ साबित करने वालों को आप किसी तरह की सजा दें न दें कृपया उनके सामने केवल ऐसे जानवरों की तारीफ जरूर कीजिये । कम-से-कम इंसानी नस्ल किसी बहाने तो सुधर जाए। आप सोच रहे होंगें , मैं भी किसी की चुगली कर रहा हूँ , सो सच है परन्तु अर्ध-सत्य है !                   मैं तो ये चुगली करने वालों की नस्ल से चुगली के समूल विनिष्टीकरण की दिशा में किया गया एक प्रयास करने में जुटा हूँ । अगर मैं किसी का नाम लेकर कुछ कहूँ तो चुगली समझिये । यहाँ उन कान से देखने वाले लोगों को भी ज