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आज़ मिसफ़िट बातें :- सल्लू मियां अब कहावत बदल दी जावेगी

अपने दबंग सल्लू मियां यानी सलमान खान से विवेक ओबराय कान पकड़ के (अपने)एवम किंग खान ने हाथ जोड़कर माफ़ी मांगी इस बात को पब्लिक लगभग भूल गई थी...कि समाचार चेनलस को मौका चाहिये था विवेक और शाहरुख की माफ़ीनामा वाली क्लिपिंग्स दिखाने का सो हज़ूर आज़ दबंग के प्रमोशन मीटिन्ग में पत्रकारों ने पूछ ही लिया . दबंग सल्लू मियां ने बताया कि उनने किसी को भी माफ़ नहीं किया . एक पत्रकार पूछना चाह रहा था:-भाईजान, तो उनकी माफ़ी क्या थी पर बेचारा दबंगियत से डरासहमा कुछ न पूछ सका. पूछता तो कुछ उल्टा सीधा ज़वाब मिलता . शायद ये सोच के भी न पूछा हो:-”सलमान से खुदा भी डरता है...?”   ___________________________________________________________________________________ _ मिसफ़िट पर उन बुकीज़ का हार्दिक  स्वागत है जिनके द्वारा क्रिकेट का खेल एक तरह से नियंत्रित किया जाता है. पर अपने पाबला जी और ललित जी कुछ समझते ही नहीं. सही-गलत के गुणा-भाग में लगे हैं. अरे भाई आज़ समझे कि न मैं तो कब से इन दौनो साहबान को बता रहा था किरकिट का खेल बुकी भैया लोग खिलवाते हैं पर कोई माने तब न...? अब सारे ब्लागर्स मिल के इन बुकीज़ का स्वागत करने

एक कविता --शिल्पकार ललीत शर्मा जी की .....मेरे मुख से ................

आज ये कविता ललित शर्मा जी के ब्लॉग से ---जितनी मुश्किल गाने में हुई ,उतनी ही पोस्ट लगाने में भी ...... आदरणीय ललित जी से क्षमा माँगते हुए सुना रही हू क्योकि इसे गाने के लिए थोडा बदलना पडा मुझे ..... इसे पढ़िए यहाँ -------- शिल्पकार के मुख से .. .

व्यंग्य: ये आपके मित्र करते क्या हैं..!”

                                              आज़ आफ़िस में मैने सहकर्मी को  बातों बातों में बताया  मेरे एक मित्र   हैं जिनके पास शब्दों का अक्षय भण्डार है. विचारों की अकूत सम्पदा है, कुल मिला कर ज्ञानवान उर्जावान मेरे मित्र को हम अपने बीच का ओशो मानते हैं. उनकी  तर्क-क्षमता  के तो भाई हम कायल हैं....  सहकर्मी  ने पूछा कि :”ये आपके मित्र करते क्या हैं..!”  मैं :-  सोचा न आपने ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचना भी चाहिये जी ज़रूरी है पर आपको बता दूं कि वो उस कार्य को नही  करते हैं जो आप हम  करते करते हैं. जैसे हम-आप नौकरी-धन्धा आदि कुछ करते हैं है न वो ये नहीं करते. जी शादी -शुदा हैं...? ...न भई न ये भी नहीं की उनने .  तो फ़िर क्या..करते है ..? जी , एक बात बताओ..?  पूछो...? आपने अपने सहकर्मी के खिलाफ़ बास से कल चुगली की थी न...? सहकर्मी :- अरे ये कोई बात हुई... भाई गलत बातें साहब को बताना ज़रूरी थी  न सो बता दिया. इसमें चुगली जैसी बात कहां..? जो भी हो वो ये नहीं करते ...! सहकर्मी थोड़ा झल्लाया पर उसकी खीज पता नहीं क्यों उभर नहीं पाई. एक दीर्घ चुप्पी के बाद उसने पूछा-सा’ब, अब तो बताईये वे करते क्या

सचमुच रिश्ते आभाषी नहीं होते

  भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना गीत के भावों के ओतप्रोत आज का दिन भारतीय संस्कृति का वो त्यौहार है जो मन मानस की    पाकीज़ा सोच को आज और                              ( अर्चना चावजी के स्वर में राखी का उपहार ) पुख्ता कर देता है. आज के लिए बहन फिरदौस का जिक्र सबसे पहले करूंगा जिनकी राखी मुझे सबसे पहले मिली ..... और मिला ये संदेश  रक्षाबंधन के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं...                                                                                                                       फ़िरदौस ख़ान            तभी हरनीत का फोन मिला भैया आ रही हूं कि सेल फोन ने बताया कि शोभना चौधरी का संदेश खुलने को बेताब है माथे पे तिलक  चेहरे पे प्यार  मुंह में मिठाई  तोहफा-उपहार  कच्चे धागे ने  किया हाथों का श्रंगार  लो मन गया राखी का त्यौहार  प्यारे  भैया राखी के इस अवसर पर प्यार दुआएँ भेज रही हूँ दूर भले हूँ तन से लेकिन मन में भैया दूर नही हूँ इस राखी को बाँध कलाई पर, तुम देना मान तुमसा भाई पाकर मैं एक खुशनसीब बहन बनी हूँ आपकी बहन श्रद्धा  जैन   इस के अलावा हम सारे भाई  जी ह