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आज़ मिसफ़िट बातें :- सल्लू मियां अब कहावत बदल दी जावेगी

एक कविता --शिल्पकार ललीत शर्मा जी की .....मेरे मुख से ................

व्यंग्य: ये आपके मित्र करते क्या हैं..!”

सचमुच रिश्ते आभाषी नहीं होते