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कौन टाइप के हो समीर भाई

                                    जनम दिन मुबारक हो समीर भाई      कौन टाइप के हो   समीर भाई  , हमाए जनम के ठीक चार महीने पहले यानी 29 जुलाई 1963 को दुनियां मेँ तुम  आए. को जाने कब बडे भये हमें न ई पता इत्तो जानत हैं की     हमाइ तुमाइ पहचान  कालेज के दौर में भइ थी. तब तुम  सदर से जबलपुर की नपाई शुरू    कर दिन भर में कित्ता जबलपुर नाप जोख लेत हते ..  हम तो भैया बस अंजाद (अंदाज़)   लगाते रह जाते की अधारताल से आबे  वारे  दोस्त बताते - '' यार , लाल से तो अब्भई   अधारताल मे मिले बो रांझी जाएंगे . तब   भैया आपके पास लेम्ब्रेटा रही है न । हमें का मालूम हतो   कै हमाई तुमाई मुलाक़ात बीस साल बाद ब्लॉगर के रूप में   भई है वरना तुमाई लम्ब्रेटा की फोटू नंबर के साथ हेंचवा लेते   नितिन पोपट   भैया से .तुम कौन   टाइप हो तुमई  हेंचवा लेते ।           एक बात और हमाओ तुमाओ जबलपुर अब बदल गयो भैज्जा सिटी काफी हाउस में सदर में गंजीपुरा वारे काफी हाउस में अब कोऊ ऐसी चर्चा                  सुनो तुमाए सदर वालो कॉफ़ी-हाउस भौतई बदल गओ है  नई  होय आज कल के एक बीता कमर बारे मौड़ा-मोड़ी आत है

महिलाओं एवम बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम के लिये समन्वित कोशिशें आवश्यक जस्टिस के. के. लाहौटी

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री के.के. लाहोटी ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के प्रति बढ़ते अपराध की रोकथाम का दायित्व पूरे समाज का है । समाज में नागरिक, शासन तंत्र और न्यायपालिका सभी शामिल है ।   पहला दायित्व है अपराध करने की मनोभावना पर पूर्ण अंकुश लगे और यदि अपराध होता है तो अपराधी को शीघ्र कठोर दण्ड मिले ।  पीड़ित को त्वरित राहत पहुंचायी जाय ।        मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री लाहोटी शनिवार को जबलपुर के तरंग प्रेक्षागृह में मध्य प्रदेश राज्यविधिक सेवा प्राधिकरण और मध्य प्रदेश पुलिस (महिला अपराध)जबलपुर जोन के संयुक्त तत्वावधान में महिला एवं बच्चों के अधिकारों की संरक्षा और उनके प्रति बढ़ते अपराधों की रोकथाम में न्यायपालिका,पुलिस और प्रशासन के दायित्व विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को मुख्य अतिथि कीआसंदी से संबोधित कर रहे थे ।  कार्यशाला की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक श्री नंदन दुबे ने की । मचासीन अतिथि         संभागायुक्त जबलपुर संभाग दीपक खाण्डेकर, प्रमुख सचिव महिला बाल विकास बी.आर. नायडू, कार्यशाला में 15 जिलों के कलेक्टर्स

आप बोलोगें "मुकुल जी, आपका तो जलजला है..!!"

डा. अवध तिवारी फ़न उठा  कर  मुझको  ही डसने चला है, सपोला वो ही मेरी, आस्तीनों में पला है.! वक़्त मिलता तो समझते आपसे तहज़ीब हम - हरेक पल में व्यस्तता और तनावों का सिलसिला है. जो कभी भी न मिला, न मैं उसको जानता- वो भी पत्थर आया लेके जाने उसको क्या गिला है. हमारी कमतरी का एहसास हमको ही न था - हम गए गुज़रे दोयम हैं ये सबको पता है.  जीभ देखो इतनी लम्बी, कतरनी सी खचाखच्च - आप अपनी सोचिये, इन बयानों में क्या रखा है .? ये अभी तो ”मुकुल” ही है- पूरा खिलने दीजिये- आप बोलोगें "मुकुल जी, आपका तो जलजला है..!!"                    

ज्ञानरंजन जी के घर से लौट कर

                  ज्ञानरंजन जी   के घर से लौट कर बेहद खुश हूं . पर कुछ दर्द अवश्य अपने सीने में बटोर के लाया हूं . नींद की गोली खा चुका पर नींद न आयेगी मैं जानता हूं . खुद को जान चुका हूं . कि उस दर्द को लिखे बिना निगोड़ी नींद न आएगी .   एक कहानी उचक उचक के मुझसे बार बार कह रही है :- सोने से पहले जगा दो सबको . कोई गहरी नींद न सोये सबका गहरी नींद लेना ज़रूरी नहीं . सोयें भी तो जागे - जागे . मुझे मालूम है कि कई ऐसे भी हैं जो जागे तो होंगें पर सोये - सोये . जाने क्यों ऐसा होता है            ज्ञानरंजन   जी ने मार्क्स को कोट किया था चर्चा में विचारधाराएं   अलग अलग हों फ़िर भी साथ हो तो कोई बात बने . इस   तथ्य से अभिग्य मैं एक कविता लिख तो चुका था इसी बात को लेकर ये अलग बात है कि वो देखने में प्रेम कविता नज़र आती है :-  प्रेम   की   पहली   उड़ान     तुम   तक   मुझे   बिना   पैरों   के   ले    आई ..! तुमने   भी   था   स्वीकारा   मेरा   न्योत