मंगलवार, जनवरी 27

जब जबलपुर के स्टेडियम में रेल चली

 प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकाससामाजिक न्याय तथा सहकारिता मंत्री श्री गोपाल
भार्गव ने 26 जनवरी 2015 को जबलपुर  जिला मुख्यालय में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित मुख्य समारोह में  ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली। इस अवसर पर कमिश्नर श्री दीपक खाण्डेकर एवं पुलिस महानिरीक्षक श्री डी. श्रीनिवास राव भी मौजूद थे।
   ध्वजारोहण के बाद समारोह के मुख्य अतिथि श्री भार्गव ने कलेक्टर श्री एस.एन. रूपला एवं पुलिस अधीक्षक श्री हरिनारायणचारी मिश्र के साथ खुली सफेद जिप्सी में परेड का निरीक्षण किया। इसके उपरांत श्री भार्गव ने
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के गणतंत्र दिवस संदेश का वाचन किया। सुरक्षा
बलों ने हर्ष फायर किए और राष्ट्रपति की जयकार की। तदुपरांत सुरक्षा बलों की
टुकड़ियों ने लयबद्ध कदम-ताल करते हुए शानदार मार्च पास्ट किया। मार्च पास्ट का
नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक श्री मनोज खत्री ने किया। मार्च पास्ट में
 29 वीं
वाहिनी आईटीबीपी
, 6 वीं
वाहिनी विशेष सशस्त्र बल
जिला पुलिस बल पुरूषजिला पुलिस बल महिला,रेल पुलिस बलएनसीसी तथा स्काउट एवं शौर्या-दल (प्रथम बार) शामिल थे। मार्च
पास्ट के बाद मुख्य अतिथि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री भार्गव ने सभी
प्लाटून कमाण्डर्स से परिचय प्राप्त किया। उन्होंने तिरंगे के तीन रंगों वाले
गुब्बारे भी छोड़े । श्री भार्गव ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को शाल-श्रीफल से
सम्मानित किया।
गणतंत्र दिवस समारोह में नगर के विभिन्न शिक्षण
संस्थाओं के बच्चों ने नयनाभिराम सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। शासकीय उ.मा.
विद्यालय मेडिकल के बच्चों ने योग प्रदर्शन किया। सत्य प्रकाश विद्यालय के बच्चों
ने मां सरस्वती की आराधना पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया। सेंट नार्बर्ट स्कूल की
विविधवर्णी परिधानों में सुसज्जित छात्राओं ने बेहतरीन नृत्य प्रस्तुत किया जिसे
काफी पसंद किया गया। गुरूनानक स्कूल मढ़ाताल की छात्राओं ने बुंदेलखण्ड अंचल का
बधाई नृत्य प्रस्तुत किया। लोकशैली के इस नृत्य पर दर्शक झूम उठे। इस प्रस्तुति
में अस्वच्छता का त्याग कर रोगों से बचाव के जतन का संदेश निहित था। शासकीय नवोदय
विद्यालय बरगी नगर की छात्राओं ने भी देशभक्ति से ओत-प्रोत नृत्य-गीत प्रस्तुत
किया। कार्यक्रम की सर्वाधिक प्रशंसित प्रस्तुति मलखम्ब की थी। जिला खेल एवं युवक
कल्याण विभाग की इस प्रस्तुति में नन्हें बच्चों ने मलखम्ब पर असाधारण कौशल और गजब
का संतुलन दिखाते हुए दु:साध्य आसन प्रदर्शित किए। घूमते मलखम्ब पर अद्भुत संतुलन
के साक्षी बने दर्शकों ने करतल ध्वनि से आकाश गुंजा दिया। इस प्रस्तुति को दर्शकों
का प्रतिसाद तो मिला ही स्वयं मुख्य अतिथि ने भी बच्चों के सतत् अभ्यास से हासिल
कौशल को प्रोत्साहित करने के लिए
 11हजार रूपए बतौर पुरस्कार प्रदान किए। घूमते मलखम्ब के शिखर पर बैठे
बच्चे के कंधों पर बैठी नन्हीं बच्ची देख दर्शक विस्मित रह गए। समारोह में विभिन्न
विभागों के द्वारा तैयार की गई झांकियां भी प्रदर्शित की गई। नगर निगम की झांकी
में शहर को स्वच्छ रखने की अपील की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की झांकी सम्पूर्ण
स्वास्थ्य सबके लिए तथा जिला शिक्षा केंद्र की झांकी स्कूल चलें हम अभियान पर
केंद्रित थी।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तैयार झांकी में एक्सप्रेस ट्रेन के माध्यम से महिला
हिंसा पर पूर्ण विराम और सुपोषण जैसे मसलों के बारे में प्रभावी ढंग से संदेश
सम्प्रेषित किए गए थे । झांकी में बालवियास सेवाओं एवं महिला सशक्तिकरण संचालनालय
द्वारा संचालित कार्यक्रमों यथा शौर्यादल आई. सी. पी.एस.
 , लाड़ो अभियान, आंगनवाड़ी द्वारा प्रदत्त सेवाओं महिला एवं चाइल्ड  हैल्पलाइन के
नंबरों को प्रभावी तरीके से प्रदर्शित किया गया था इतना ही नहीं स्टेडियम में
प्रवेश करते ही रेलवे स्टेशन का आभास कराती उड़घोषणा का स्टेडियम में गुंजायमान
होना एक प्रभावी प्रयोग रहा है । झाकी की परिकल्पना श्री आर सी त्रिपाठी नवपदस्थ
जिला कार्यक्रम अधिकारी की थी जिसे विभाग के सहायक संचालकों क्रमश: मनीष शर्मा गिरीश
बिल्लोरे
, अखिलेश मिश्रा, पुनीत मारवाह तथा परियोजना अधिकारी श्रीमती संजना चौकसे एवं
 दीपेन्द्रसिंह बिसेन
, के मार्गदर्शन में पूर्ण किया गया । ध्वनि प्रभाव बालभवन अनुदेशिका
सुश्री  शिप्रा सुल्लेरे के निर्देशन में  मास्टर अक्षय ठाकुर एवं बेबी
ईशिता विश्वकर्मा (प्रसिद्ध बाल गायिका ) तैयार किया  निर्माण श्री राजू का
रहा है ।
 इस
झांकी के स्टेडियम में प्रवेश करते ही रेलवे स्टेशन जैसा वातावरण निर्मित करने ध्वनि
प्रभाव से स्टेडियम में मौजूद  दर्शको ने  तालियां बाजा कर स्वागत किया गया मुख्यअतिथि एवं
अन्य  अतिथिगण सहित सभी अधिकारी गण प्रभावित
हुए बिना नहीं रह सके  सभी ने इसे काफी
पसंद किया गया ।

श्रम विभाग की झांकी में निर्माण श्रमिकों के
लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदर्शित की गई थी। इसके अलावा जिला
व्यापार एवं उद्योग केंद्र
लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभागवन विभागजिला पंचायतकृषि
विभाग
उद्यान विभागविद्युत
वितरण कम्पनी तथा आदिवासी विकास विभाग की झांकियां भी प्रदर्शित की गई। केंद्रीय
जेल की झांकी में ब्रिाटिशकालीन जेल और आधुनिक जेल के तुलनात्मक दृश्य प्रदर्शित
किए गए थे। ब्रिाटिशकालीन जेल में चक्की चलाता कैदी दिखाया गया था वहीं वर्तमान आधुनिक
जेल में योग प्रशिक्षण और कम्प्यूटर प्रशिक्षण के साथ टेलीफोन सुविधा प्रदर्शित की
गई थी। यातायात विभाग की झांकी भी काफी दिलचस्प थी। इस झांकी में वाहन चालकों के
लिए हेलमेट की जरूरत और वाहन चलाते समय शराब से परहेज को जरूरी बताया गया। झांकी
में एक दुर्घटना का दृश्य और पुलिस कार्यवाही प्रदर्शित की गई। यह झांकी काफी
सराही गई।
परेड में विशेष सशस्त्र बल की छठीं वाहिनी को
प्रथम
, 29 वीं
वाहिनी आईटीबीपी को द्वितीय तथा जिला पुलिस बल (पुरूष) को तृतीय स्थान प्राप्त
हुआ। झांकियों में महिला एवं बाल विकास विभाग को प्रथम
केंद्रीय जेल को द्वितीय तथा यातायात विभाग को तृतीय स्थान मिला।
मुख्य अतिथि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री भार्गव ने विजेताओं को पुरस्कृत
किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाली सभी शिक्षण संस्थाओं के प्रतिभागी
बच्चों को पुरस्कृत किया गया।


कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक श्री डी.पी.
सिंह
सीईओ जिला पंचायत श्रीमती नेहा मारव्याअपर कलेक्टर श्री छोटे सिंह एवं श्री ए.बी. सिंहआयुक्त नगर निगम श्री वेदप्रकाश एवं अन्य अधिकारी मौजूद थे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रदीप दुबे और श्रीमती संदीपा स्थापक पचौरी ने किया।

मंगलवार, जनवरी 13

संतलाल पाठक एवं रोहित गुप्ता बालश्री सम्मान से अलंकृत होंगे


संतलाल पाठक
संभागीय बाल भवन जबलपुर के प्रतिभाशाली कलाकारों क्रमश:  मास्टर संतलाल पाठक वर्ष 2011 में प्रदर्शनकारी कला एवं मास्टर रोहित गुप्ता को चित्रकला के लिए वर्ष 2012 के लिए    राष्ट्रीय बालश्री अलंकरण के लिए चयनित किया है . इन बाल प्रतिभाओं को विज्ञान भवन नई दिल्ली में 29 जनवरी 2014 को  आयोजित एक  भव्य समारोह में श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा बालश्री अलंकरण से अलंकृत किया जावेगा । इसके पूर्व वर्ष 2010 को संभागीय बाल भवन जबलपुर को पहली बार गौरव  प्रतिभाशाली बालिका कु. खुशी पाल बालश्री अलंकरण प्राप्त कर दिलाया था.
          10 जून 1996 को सतना जिले के  सामान्य कृषक श्री सत्यनारायण पाठक एवं श्रीमती आशा पाठक के घर जन्मे मास्टर संतलाल पाठक जन्म से ही नेत्रज्योति विहीन हैं । मास्टर संतलाल ने अंध मूक विद्यालय जबलपुर में अध्ययन के साथ साथ बाल भवन में सुश्री शिप्रा सुल्लेरे  से  संगीत की शिक्षा ग्रहण की है, वर्तमान में वे बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं  । इतना ही नहीं वे विशेष बच्चों के लिए एक मोटीवेटर के रूप में जाने जाते हैं । सीमित साधनों में दृढ इच्छा शक्ति एवं आत्मिक साहस के कारण संतलाल ने बाल श्री हेतु  संभागीय , ज़ोनल एवं राष्ट्रीय स्तर की चयन की कठिन  प्रक्रिया में  सहजता से सफलताएँ हासिल कीं हैं । कवि हृदय संतलाल पाठक प्ले-बैक सिंगर बनाना चाहते हैं किन्तु उच्च शिक्षा के लिए वे बी एच  यू में दाखिले के इच्छुक हैं  । साथ ही वे उमरिया कलेक्टर श्री के जे तिवारी को अपना आदर्श मानते हुए कहते हैं कि – सफलता कड़ी मेहनत एवं लगन से ही हासिल होती है । सतत साधना किसी भी बाधा को लांघने की शक्ति देती है ।
          चित्रकला के लिए बालश्री अलंकरण  वर्ष 2012 के लिए चयनित मास्टर रोहित गुप्ता पंडित लज्जा शंकर झा उ. मा. विद्यालय में वर्तमान में बारहवीं के विद्यार्थी हैं । गढ़ाफ़ाटक निवासी श्री राजीव एवं श्रीमती अलका गुप्ता के पुत्र मास्टर रोहित का सपना है कि वे देश के ख्याति प्राप्त आर्किटेक्ट के रूप में प्रतिष्ठित हों । अपनी सफलता का श्रेय अपनी गुरु श्रीमती रेणु पांडे को देने वाले रोहित ने जिला, संभाग, एवं राज्य स्तर कई पुरस्कार अर्जित किए हैं ।
रोहित गुप्ता
          बाल भवन संचालक गिरीश बिल्लोरे ने बताया – “मेरे पूर्ववर्ती अधिकारियों क्रमश: श्रीमती शालिनी तिवारी एवं श्रीमती  मनीषा लुम्बा के उचित प्रबंधन के परिणाम स्वरूप बालश्री हेतु दो बच्चों का चयन हुआ है । वर्तमान में चार अन्य प्रतिभागी ज़ोनल-स्तर के लिए  चयनित हुए हैं उम्मीद है कि इस बार भी संस्कारधानी को अधिक सम्मान मिलेगा । बाल भवन जबलपुर नें वर्ष 2015 में बच्चों के लिए गतिविधियों में कुछ अहम बदलाव भी किए गए हैं जिसमें क्रिएटिव राइटिंग, साहित्य, काव्य, एवं गद्य लेखन, वक्तव्य कला, के साथ साथ मार्शल आर्ट, वालीबाल,  थियेटर, पर  विशेषरूप ध्यान दिया जा रहा है ।    
बालश्री अवार्ड  हेतु चयनित बच्चों को नकद राशि, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र दिया जाता है ।
            

           

सोमवार, जनवरी 12

रेलवे क्रासिंग वाला किशोर और बाइक वाला


साहेब ये  घोड़ा है
इसकी पीठ पर सवार बादशाह की रौबीली मूंछ
सुनहरी रकाब , ये देखिये घोड़े की  झबरीली पूंछ   
दस रुपये में ..... आपको घोडा तो क्या  बादशाह भी नहीं मिलेगा ....
खरीद लीजिये न ..... आपके दस रुपये बहुत काम आएंगे .......
आपकी बेटे  के चेहरे पर हंसी,
बेटी  के मुखड़े पर मुस्कान लाएँगे .....
साब दे दूँ..... दो ले लीजिये बीस रुपए बेकार नहीं जाएंगे ...
बोलो साब बोलो ..... जल्दी बोलो .....
गाड़ी आने वाली है गेट खुल जाएगा ।
आपका घोडा यहीं रह जाएगा ...
          अनचाहे विक्रेता से खीज कर आलीशान कार के काँच ऊपर चढ़ गए । शाम आसरा भी टूटता नज़र आया हताश किशोर की हताश आंखें पीछे वाले बाइक सवार नें पढ़ लीं, कार का शीशा चढ़ते हुये जो देख रहा था ...... बाइक सवार ने पचास का नोट देकर कहा ये ये मुझे दे दो
सा, छुट्टे ... बीस दीजिये न ...
नहीं है ......
कोई बात नहीं कल लौटूँगा न तब वापस ले लूँगा ..... रोज़ निकलता हूँ ।
साब आप ले जाओ ... छुट्टे कल दे देना !
          बाइक सवार युवक ने लगभग डपट कर उसे बीस की जगह पचास थमा दिये । किशोर ने बाइक का नंबर नोट किया ...........
         किशोर कई दिनों तक उस बाइक का इंतज़ार करता रहा । बाइक वहाँ से कभी भी नहीं निकली ।
       दस बरस बाद उसी  रेलक्रासिंग पर उसी  पुरानी बाइक के ठीक पीछे रुकी आलीशान कार कार से एक युवक उतरा उसने बाइक सवार प्रौढ़ को प्रणाम किया .... जेब से तीस रुपए निकाले उसके हाथ में देते हुए कहा – “मेरे पास बरसों से आपकी अमानत रखी है सर, आप मुझे फिर कभी वापस न मिले ?” वैसे उस दिन आपके दिये पैसे से मेरे घर में सबने भरपेट खाना खाया था । ये मेरा कार्ड है सर ..... आप शहर आएँ मेरे स्टूडिओ में मूर्तियां बनवाता हूँ ।
          बाइक पर सवार व्यक्ति ने मुस्कुरा कर दस रुपए रख लिए ।

             कुछ दिनों बाद सचाई समझने के गुंताड़े में  महानगर में स्टूडिओ का पता खोजते खोजते बाइक वाला प्रौढ़ जब स्टूडिओ पंहुचा तो उसकी  बाइक पर सवार मिट्टी से बनी मूर्ति वो भी उसके अपने युवा काल की देख भौंचक था । 

गुरुवार, जनवरी 8

वेदों की वैज्ञानिकता और दादा परसाई

 11दिसम्बर,1983' पूछो परसाई सेस्तम्भ में  भिलाई से सुरेश कुमार जैन ने परसाई जी से एक सवाल किया था कि -"वेदों की वैज्ञानिकता को आप क्या मानते हैं ? "
उत्तर कुछ ये था -  वेदों की वैज्ञानिकता से आपका क्या अर्थक्या यह अर्थ है कि वेदों में आधुनिक विज्ञान हैकुछ पुरातनवादी यह दावा करते हैं कि आज जो वैज्ञानिक खोजें हुई हैंवे सब वेदों में हैं। यह मूर्खता हैअंधविश्वास है।अगर यह बात सही होती तो ये भारतीय वैज्ञानिकों को पहले ही बता देते कि अमुक वेद की ऋचाओं में अणु विस्फोट से ऊर्जा उत्पन्न करने का सूत्र दिया है। हम क्यों हाथ जोड़ते पश्विम के देशों के।
वेद हैं और वेदांग हैं फिर उपवेद हैंभाष्य हैं। इनकी रचना एक साथ नहीं हुई। सबसे प्राचीन ऋग्वेद हैं। उस समय आर्य केवल शिकार पर निर्भर नहीं रहे थे । वे खेती करने लगे थे।उनकी छोटी-छोटी बस्तियां बस गयीं थीं ।वे प्रकृति के हर तत्व और क्रिया को चामत्कारिक मानते थे और प्रकृति से संघर्ष भी चला था। जो पत्थर की रगड़ से आग पैदा करते थे,वे कितना विज्ञान जानते थे उससे बहुत अधिक विज्ञान तो सिंधु घाटी के पास था ।
वेदों की रचना हजार सालों में हुई होगी । फिर उपवेद की रचना हुई ।विज्ञानगणित,ज्योतिषचिकित्सा शास्त्र आदि की जानकारी वेदों और उपवेदों में है ।
      यह सही है कि ज्यामिति(ज्यामेट्री ) और गणित के कुछ सिद्धांत भारत में सबसे पहले खोजे गए।शून्य,दशमलव दुनिया को भारत ने ही दिए ।आयुर्वेद एक पूर्ण चिकित्सा शास्त्र है । चरक ने औषधि और सुश्रुत ने शल्य क्रिया पर श्लोक लिखे। वाग्भट्ट ने चिकित्सा शास्त्र को और आगे बढ़ाया।बाणभट्ट ने तारों,ग्रहो,उपग्रहों का अध्ययन किया। उसके शिष्यों ने इसे आगे बढ़ाया ।
यह सब चारों वेदों में है ,यह कहना गलत है । यह कहना भी गलत है कि वेदमंत्र ब्रह्मवाणी है । सारा विज्ञान वेदों में मानने वाला बड़ा सुखी मुर्ख रह सकता है । असल में उत्पादन के साधन,जीवन के रूप,समाज व्यवस्था आदि के साथ धीरे-धीरे ज्ञान और विज्ञान का विकास हुआ।
यह गर्व गलत नहीं है कि हमारे पूर्वजों ने कुछ ज्ञान दुनिया को पहली बार दिया। इस अर्थ में प्राचीन ग्रीक भी हमसे पीछे थे ।  मगर इस कारण पीछे लौटना,उस प्राचीन को स्वर्णयुग मानना, उसकी याद करके आधुनिकता को नकारना-हमारे देश और समाज के लिए घातक है । यह पुरानी रस्सी से फांसी लगाकर आत्महत्या करने की तरह है ।ज्ञान और विज्ञान की लगातार विकासशील परम्परा होती है । किसी युग में विज्ञान शिखर पर पहुंच जाए और फिर समाज उस विज्ञान से वंचित हो जाए,ऐसा नहीं होता। यह तभी होता है जब पूरी सभ्यता किसी कारण मिट जाए ।
 गणित एवं आयुर्वेद पर अपने टिप्पणी देते हुए परसाई जी ने अन्य सभी वेदों के लिए साफ तौर पर लिखा है कि - "हम प्राचीन युग को स्वर्णयुग मान कर उसके पीछे आधुनिकता को नकारें न ....  " 
          परसाई जी यहाँ सही हैं ...... खासकर बोको-हराम एवं आई एस आई एस के संदर्भ में तो एक तरफा सटीक बात कही थी उनने । किसी धर्म पंथ में समयानुसार देश काल परिस्थितियों के अनुरूप परिवर्तन स्वाभाविक हैं धर्म कानून-व्यवस्था को रेग्यूलेट नहीं करता वरन मानवता के प्रति सजगता या कहूँ कि "मानवता-सापेक्ष"  बनाने की व्यवस्था को आकार देने की कोशिश करता है । ऐसे में धर्माधारित राज्य  की परिकल्पना करना सर्वथा गलत है । इस हेतु विचारक विद्वान आध्यात्मिकता को स्वीकारते हुए प्राणियों के लिए धर्म के सिद्धान्त को सर्वोपरि मानते हैं । न कि धर्म के लिए प्राणी जुटाने पर भरोसा रखते हैं । कुल मिला कर  परसाई जी सही कह गए थे । परंतु परसाई जी के इस जवाब को केवल सनातन से जोड़कर देखना भी गलत है । उनके इस महान उत्तर को आज के संदर्भ में व्यापक रूप से देखा और समझा जाना चाहिए । पर ये नही भूलना चाहिए कि उनका मत ही अंतिम सत्य है विकी में लिखा यह आलेख या गलत है अथवा परसाई जी इस बारे में न जान पाएँ हों ................ 
शिवकर बापूजी तलपदे (1864 - 17 सितम्बर 1917) कला एवं संस्कृत के विद्वान तथा आधुनिक समय के विमान के प्रथम आविष्कर्ता थे। उनका जन्म ई. 1864 में मुंबईमहाराष्ट्र में हुआ था ।[1] वो ‘जे.जे. स्कूल ऑफ़ आर्ट, मुंबई’ से अध्ययन समाप्त कर वही शिक्षक नियुक्त हुये ।[2] उनके विद्यार्थी काल में गुरू श्री चिरंजीलाल वर्मा से वेद में वर्णित विद्याओं की जानकारी उन्हें मिली। उन्होनें स्वामी दयानन्द सरस्वती कृत ‘ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका’ एवं ‘ऋग्वेद एवं यजुर्वेद भाष्य’ ग्रंथों का अध्ययन कर प्राचीन भारतीय विमानविद्या पर कार्यकरने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने संस्कृत सीखकर वैदिक विमानविद्या पर अनुसंधान आरंभ किया ।[3]
शिवकर ने ई. 1882 में एक प्रयोगशाला स्थापित किया और ऋग्वेद के मंत्रों के आधार पर आधुनिक काल का पहला विमान का निर्माण किया ।[4]इसका परीक्षण ई. 1895 में मुंबई के चौपाटी समुद्र तट पर कियागया था । इस कार्यक्रम में उपस्थित प्रत्यक्षदर्शियों में सयाजीराव गायकवाड़, लालजी नारायण, महादेव गोविन्द रानाडे आदि प्रतिष्ठित सज्जन उपस्थित थे । शिवकर विमान को जनोपयोगी बनाना चाहते थे लेकिन उन्हें अंग्रेज सरकार से किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मिली थी ।[5] शिवकर ने ई. 1916 में पं. सुब्राय शास्त्री से महर्षि भरद्वाज की यन्त्रसर्वस्व - वैमानिक प्रकरण ग्रन्थ का अध्ययन कर ‘मरुत्सखा’ विमान का निर्माण आरंभ किया । किन्तु लम्बी समय से चलरही अस्वस्थता के कारण दि. 17 सितम्बर 1917 को उनका स्वर्गवास हुआ एवं ‘मरुत्सखा’ विमान निर्माण का कार्य अधूरा रह गया ।[6] 
     मेरा मत है कि -"सभ्यता आधुनिक बदलाव  के अभाव में स्थिर जल की तरह होती है । जिसमें मलिनता का उत्पादन स्वाभाविक है ।" आप भी यही सोच सकें तो बेहतर होगा ...............................    
  


मंगलवार, जनवरी 6

भारतीय-अमेरिकी के नाम पर अमेरिका में बिजनेस स्कूल


 एक शीर्ष निजी अमेरिकी विश्वविद्यालय ने अपने पहले बिजनेस स्कूल का नाम एक भारतीय अमेरिकी रियल इस्टेट कारोबारी के नाम पर रखा है। रॉकफोर्ड विश्वविद्यालय ने पुरी बिजनेस स्कूल की स्थापना का ऐलान किया है। इस स्कूल को फर्स्ट रॉकफोर्ड ग्रुप के संस्थापक और अध्यक्ष सुनील पुरी ने 50 लाख डॉलर का योगदान दिया है। पुरी ने रॉकफोर्ड विश्वविद्यालय से 1982 में अपनी पढ़ाई की थी और वर्ष 2013 में संस्थान ने उन्हें डॉक्टर ऑफ हयूमन लेटर्स की मानद उपाधि से सम्मानित किया था। इस संबंध में पुरी ने कहा यह मेरे और मेरे परिवार के लिए महत्वपूर्ण है कि पुरी बिजनेस स्कूल में छात्र, अध्यापक और समुदाय न केवल आपस में संवाद कर सकते हैं बल्कि वहां का पाठयक्रम भी इस प्रकार तैयार किया गया है कि विश्वविद्यालय आगे बढ़ने और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी कर सके। उन्होंने कहा कि यहां छात्रों को नवउत्कर्ष की अपार संभावनाएं मिलेंगी। पुरी ने कहा कि उनकी सफलता में रॉकफोर्ड कॉलेज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और इसके एवज में वह पुरी बिजनेस स्कूल के माध्यम से संस्थान के लिए कुछ करना चाहते हैं। पिछले सप्ताह आयोजित जिस समारोह में रॉकफोर्ड विश्वविद्यालय ने पुरी बिजनेस स्कूल की स्थापना की घोषणा की उसमें सीनेटर डिक डर्बिन भी मौजूद थे। उन्होंने कहा रॉकफोर्ड विश्वविद्यालय के लिए प्रतिबद्धता की खातिर अपने मित्र सुनील पुरी को सम्मानित करते हुए तथा पुरी बिजनेस स्कूल उन्हें समर्पित करते हुए मुक्षे खुशी हो रही है। डर्बिन ने कहा वर्ष 1979 में जब पुरी रॉकफोर्ड विश्वविद्यालय आए थे तब उनके पास न तो धन था और न समुचित शिक्षा थी। लेकिन उनके पास उम्मीद और कुछ कर गुजरने का साहस था। रॉकफोर्ड विश्वविद्यालय ने उन्हें एक मौका दिया और आज उन्होंने खुद कहा कि उनकी सफलता में संस्थान के योगदान को वह भूले नहीं हैं। मीडिया को जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि नये बिजनेस स्कूल के पाठ्यक्रम में अर्थशास्त्र, बिजनेस एंड एकाउंटिंग (ईबीए) कार्यक्रम के साथ साथ संस्थान की कारोबार संबंधी गतिविधियां भी शामिल होंगी। मुंबई में जन्मे पुरी वर्ष 1979 में रॉकफोर्ड कॉलेज में पढ़ने के लिए अमेरिका चले गए थे। वहां से उन्होंने 1982 में बैचलर ऑफ साइंस इन एकाउंटिंग में स्नातक किया।

सोमवार, जनवरी 5

Ten Kings By Ashok Banker

Under the aegis of Club Literati and Arera Club  ‘Author Speaks’ session was organized in association with Amaryllis, an imprint of Manjul Publishing House. India’s epic storyteller Ashok Banker talked about his latest book TEN KINGS and read interesting portions from it. Ashok Banker is an internationally acclaimed bestselling author of 42 books which have sold more than 20 lakh copies in 16 languages across 58 countries.  New York Times describes his work as “being better written than many books in the genre..”. His historical mega serial ‘Chakravartin Ashok Samrat’  is being aired on Colors channel  from 5th January 2015.
TEN KINGS set in 3400 BCE, is the riveting story of a legendary battle between King Sudas and the combined invading force of ten kings from neighboring regions. The battle decided the future course of the region’s history and laid the foundation of bharatvarsha.

In this interactive session moderated by Kaneez Razavi , senior editor with Amaryllis the audience participated enthusiastically. Additional Chief Secretary Aruna Sharma was the Chief Guest on this occasion. She lauded the contribution of Banker and hoped that it will kindle interest among the youth to know more about our ancient past. Waseem Akhtar, Secretary of Arera Club, Vikas Rakheja,MD Manjul Publishing House and a large number of club members were present on this occasion. The program was compeered by Madiha Khan. Seema Raizada, Founder President of Club Literati proposed a vote of thanks.