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जून, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शास्त्री जी नाराज़गी छोडिये : केवल भाई क्षमा मांगिये तकनीकी समस्या बताते हुए ..

" आज से ब्लॉगिंग बन्द"   का उदघोष कर डॉ. रूपचंद्र शास्त्री   ' मयंक '    जी ने एक बार फ़िर ब्लाग जगत में खलबली मचा दी . मसला मेरी दृष्टि में एक तरह की मिसअंडर स्टैंडिंग है . .   www.blogsetu.com   को लेकर. जहां तक मेरा मानना है शास्त्री जी ने हिंदी ब्लागिंग को वो सब दिया जो ज़रूरी था उनकी वज़ह से ही हिंदी ब्लागिंग में कुछ नए नवेले प्रयोग हुए.. खटीमा सम्मेलन इस बात का सर्वोच्च उदाहरण है. जिसमें वेबकास्टिंग को स्थान मिला.. और आगे गूगल को जिसे हैंगआउट के रूप में सुविधा के रूप में सबको देना ही पड़ा .     जहां तक   ब्लाग सेतु     का सवाल है उसके निर्माता भाई   केवलराम   की जीवटता को नकारना बेमानी होगा.     वैसे इन दौनों महारथियों के बारे में कुछ भी कहना सूरज भैया के सामने दीपक रखने वाला काम ही होगा. दौनो महानुभाव योग्य ही नहीं सुयोग्य और क्षमतावान हैं.           ब्लाग सेतु     के पूर्व से   चर्चामंच   पाठकों तक नि:स्वार्थ लिंक उपलब्ध कराने का काम कर रहा है. किंतु अचानक ब्लाग जगत में हुए ऐसे विवाद से मन पीढ़ा से भर आया है. अच्छा होता कि बात केवल शास्त्री जी एवम केवल भा

शुभ यात्रा की विश पूरी करें : हिदायतों का ध्यान रखें

यह आलेख फ़ेसबुक के   GreenYatra   से सामुदायिक समझ को बढ़ाने के लिये प्रस्तुत किया जा रहा है  आजकल नए बने ताज एक्सप्रेस वे पर रोजाना गाड़ियों के टायर फटने के मामले सामने आ रहे हैं जिनमें रोजाना कई लोगों की जानें जा रही हैं.एक दिन बैठे बैठे मन में प्रश्न उठा कि आखिर देश की सबसे आधुनिक सड़क पर ही सबसे ज्यादा हादसे क्यूँ हो रहे हैं ? और हादसों का तरीका भी केवल एक ही वो भी टायर फटना ही मात्र , ऐसा कोन सी कीलें बिछा दीं सड़क पर हाईवे बनाने वालों ने ? दिमाग ठहरा खुराफाती सो सोचा आज इसी बात का पता किया जाये. तो टीम जुट गई इसका पता लगाने में. अब सुनिए हमारे प्रयोग के बारे में. मेरे पास तो इको फ्रेंडली हीरो जेट है सो इतनी हाई-फाई गाडी को तो एक्सप्रेस वे अथोरिटी इजाजत देती नहीं सो हमारे एडमिन पेनल की दूसरी कुराफाती हस्ती को मैंने बुला लिया उनके पास BMW X1 SUV है ( ध्यान रहे असली मुद्दा टायर फटना है) सबसे पहले हमनें ठन्डे टायरों का प्रेशर चेक किया और उसको अन्तराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ठीक किया जो कि 25 PSI है. (सभी विकसित देशों की कारों में यही हवा का दबाव रखा जाता है जबकि हमारे देश में लोग

मानव तस्करी की मंडी में मासूम :संजय स्वदेश

साभार :- चित्र   पंजाब केसरी से साभार बीते दिनों केरल पुलिस के 16 अधिकारियों ने झारखंड के 123 बच्चों को केरल से जसीडीह स्टेशन पहुंचाया गया। ये बच्चे मानव तस्करी के जरिए केरल के अनाथालय में पहुंचाया गया था। पिछले वर्ष भी इसी तरह थोक में बच्चों की मानव तस्करी की एक और मामले का पर्दाफाश हुआ था। राजस्थान के भरतपुर रेलवे स्टेशन से 184 बाल मजदूरों को मुक्त करा कर पटना पहुंचाया गया। आए दिन देश के हर राज्य के अखबारों में बच्चों के गायब होने की खबर किसी ने किसी पन्ने के कोने में झांकती रहती हंै। देश बड़ा है। आबादी बड़ी है। संभव हो आपके आसपास कोई ऐसा नहीं मिले , जिसके बच्चे होश संभालने से पहले ही गायब हो चुके हो। इसलिए आपको जानकार थोड़ा आश्चर्य होगा , लेकिन हकीकत यह है कि आज देशभर में करीब आठ सौ गैंग सक्रिय होकर छोटे-छोटे बच्चों को गायब कर मानव तस्करी के धंधे में लगे हैं। यह रिकार्ड सीबीआई का है। मां-बाप का जिगर का जो टुकड़ा दु:खों की हर छांव से बचता रहता है , वह इस गैंग में चंगुल में आने के बाद एक ऐसी दुनिया में गुम हो जाता है , जहां से न बाप का लाड़ रहता है और मां के ममता का आंचल। किसी के अंग

धर्म, आस्तिकता और नास्तिकता पर पाखंड का साया : बी.पी. गौतम

आलेख में प्रकाशित सामग्री  पर लेखक का सर्वाधिकार है. ब्लाग स्वामी   ईश्वर और धर्म के विषय में अधिकतम ज्ञान अर्जित करने की दिशा में असंख्य लोग स्वाभाविक ही जुटे रहते हैं। जब , जहां और जैसे अवसर मिलता है , वैसे स्वयं को सतुंष्ट करने के प्रयास करते रहते हैं। मनुष्य की इसी स्वाभाविक इच्छा का धूर्त और शातिर किस्म के लोग दुरुपयोग कर रहे हैं। धूर्त और शातिर किस्म के लोगों ने ईश्वर और धर्म को धंधा बना लिया है , जिससे लोग द्वंद से निकलने की जगह और गहरे में फंसते जा रहे हैं। बचपन में एक कहानी सुनी थी , जिसमें बताया गया था कि एक गांव में चार अंधे रहते थे। उस गांव में एक बार हाथी आया। चारों अंधों ने हाथी को छूने की उत्सुकता व्यक्त की , तो महावत ने हाथी को छूकर अनुभूति करने की अंधों को अनुमति दे दी। इसके बाद चारों अंधे अपने अनुभवों को आपस में बांटने लगे। हाथी का पैर छूने वाले अंधे ने कहा कि हाथी एक खंबे जैसा होता है। हाथी के पेट पर हाथ घुमाने वाले अंधे ने कहा कि हाथी ढोल की तरह होता है। कान पकड़ने वाला अँधा उन दोनों को मूर्ख बताते हुए बोला कि हाथी सूप की तरह होता है और पूँछ पकड़न

“वनिता-चेतना” ब्लागके तीसरे वर्ष में प्रवेश किया

  महिला बाल कल्याण गतिविधियों की सूचनाएं न्यू-मीडिया में प्रसारित प्रकाशित करना कराना इस कारण आवश्यक हो गया है ताकि विकास के लिये उठाए गए क़दम की जानकारी नेपथ्य में नचली जावे .  विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे समयानुकूलित साईंस का दर्ज़ा दिया जा सकता है. विकास की गतिविधियों में संलग्न रहना  बिना नए प्रयोगों के कठिन हो जाता है.प्रयोंगों का प्रकाशन एवम उनसे प्राप्त फ़ीडबैक दस्तावेजीकरण जैसी आवश्यकताओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता . साथ ही नक़ारात्मक समाचारों का दैनंदिन प्रकाशन जो बहुधा व्यक्तिगत कारणों से संपृक्त होते हैं .. विकास गतिविधियों को   को निरुत्साहित करतें हैं.... पी आर ओ श्री अतुल खरे ने कहा विकास-सूचनाएं  अपेक्षाकृत अधिक आवश्यक हैं  मीडिया को  चाहिये कि उत्साही टीमों को चीयर अप करे...!  मुझे बस मुझे श्री खरे की उक्ति से  अपने लिये रास्ता मिल गया ... और विकास वार्ता के बाद अपने विभाग के विकास समाचारों के लिये वनिता-चेतना के साथ मिल कर छोटा सा प्रयोग कर दिया वनिता-चेतना ब्लाग के रूप में.. डा. निशा जैन एवम स्नेही आशुतोष केवलिया का आभारी हूं.. क्षमा प्रार्थना के साथ कहन