राखी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
राखी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, अगस्त 5

प्रभावी रहा पेडों को राखी बांधने में छिपा संदेश

नवाचार के ज़रिये छोटे छोटे प्रयोग करना बेहद असरदार होता है. जबलपुर बालभवन में ऐसा ही एक  छोटा प्रयोग किया जो  बड़ा असरदार साबित हुआ . यह प्रयोग न केवल शिक्षाप्रद रहा वरन इससे जनजन जो सन्देश विस्तारित हुआ वह  भी समुदाय के लिए चिंतन का विषय बन गया बालभवन जबलपुर  के संचालक रूप में लगभग एक माह पूर्व विचार किया कि क्यों न हम बालभवन में राखी पर्व में एक नवाचार करें जिससे समाज को नया सन्देश मिले तभी उन पौधों का स्मरण हुआ जो हमने 5 जुलाई 2017 को लगाए थे बस फिर क्या था हमने बच्चों और उनके शिक्षकों से परामर्श कर तय किया कि इस बार हम पेड़ पौधों को राखी बांधेंगे. 
जी हाँ वे पौधे जिनको बच्चों ने नाम भी दिए हैं .. झमरू, हिन्दुस्तान , आदि आदि . पेड़ पौधों के लिए राखी बनाने का काम कराया रेशम ठाकुर ने जो इन दिनों बालभवन में बच्चों की कला शिक्षक हैं.  
          नन्हें पौधों एवं वृक्षों के साथ रक्षाबंधन का त्यौहार बेहद उत्साह के साथ मनाया गया . महिला बाल विकास विभाग के महिला सशक्तिकरण संचालनालय द्वारा संचालित संभागीय बालभवन के बच्चों ने वृक्षों एवं पेड़-पौधों के साथ जीवन के अंतर्संबंधों को रेखांकित करने वाले कार्यक्रम की आवश्यकता पर को स्पष्ट करते हुए संचालक बालभवन गिरीष बिल्लोरे ने बताया – *“किसी भी संदेश को कैसे समाज के लिए असरदार हो सकते हैं पेड़ पौधों को राखी बांधने के इस प्रयोग से स्पष्ट हो जाता है !*
अध्यक्षता करते हुए श्रीमती मनीषा लुम्बा उपसंचालक महिलासशक्तिकरण ने आयोजन के उद्देश्य की प्रसंशा करते हुए कहा कि – “समाज को यह सन्देश देना बेहद जरूरी है कि पेड़ पौधे हमारे रक्षक हैं तथा वे किसी न किसी रूप में हमें सहायता ही नहीं देते बल्कि उनसे हमारा जीता जगता सम्बन्ध है तथा वे हमारे रक्षक भी हैं
मुक्ति फाउनडेशन के डा विवेक जैन ने कार्यक्रम को सबसे प्रभावकारी एवं समाज को सन्देश देने वाला कार्यक्रम निरूपित किया. कार्यक्रम में श्रीमती हर्षिता , श्रीमति अजय जैन, श्री पुनीत मारवाह, श्री एस ए सिद्दीकी, श्री रमाकांत गौतम, श्री संजय गर्ग बतौर अतिथि उपस्थित रहे. 
पौधों एवं वृक्षों के साथ रक्षाबंधन कार्यक्रम में प्रयुक्त राखियों का निर्माण सुश्री रेशम ठाकुर के निर्देशन में बालभवन के बच्चों अनमोल विश्वकर्मा राखी विश्वकर्मा, रूद्र गुप्ता, अंजली, हिमान्शु रजक हर्षिता रजक ने किया . 
पौधों एवं वृक्षों के साथ रक्षाबंधन के साथ साथ डाक्टर शिप्रा सुल्लेरे के निर्देशन में बाल कलाकारों क्रमश: वैशाली बरसैंया, उन्नति तिवारी, आयुष राजक, इशिता तिवारी सोनम गुप्ता, सजल ताम्रकार, आकर्ष जैन, हर्ष सौंधिया, अमन बेन, राज गुप्ता ने कजरी-गीत गाकर माहौल को बेहद प्रभावी बनाया. 
कार्यक्रम का संचालन बाल-अभिनेत्री कुमारी श्रेया खंडेलवाल ने किया. आयोजन में नृत्यगुरु श्री इंद्र पांडे, श्री देवेन्द्र यादव, श्रीमती मीना सोनी श्री सोमनाथ सोनी , राजेन्द्र श्रीवास्तव, श्री टी आर डेहरिया, श्री धर्मेन्द्र श्रीमती सीता देवी ठाकुर मनीषा तिवारी मुस्कान सोनी का अविस्मरणीय सहयोग रहा.
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
                          संभागीय बालभवन में “पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ” का कार्यक्रम चलाया जा रहा है. प्रत्येक पौधे की देखभाल 5-5  बच्चों के समूह द्वारा की जा रही है. वे प्रतिदिन अपने अपने पेड़ों की देखभाल स्वयमेव करतें हैं. इतना ही नहीं बच्चों ने पेड़ों के झमरू, छोटू , सरगम, हिन्दुस्तान, भारत, गजानन, घुँघरू, कीवी, चेरी, शिखा, नटवर, पप्पू  आदि नाम तक  रखें  है .
             बाल-भवन के खेल अनुदेशक एवं वृक्षारोपण प्रभारी   श्री देवेन्द्र यादव के अनुसार "पौधे लगाना ठीक है पर उनको सम्हालना कठिन काम है  बच्चे अपनी बाटल से पेड़ों में पानी देते हैं उनसे बात करते हैं  तथा उनके लिए बच्चों  थरे (सर्किल) भी बनाएं गएँ हैं   पेड़ों की देखभाल से 15 बाल समूह जुड़े हुए हैं .
For More Photo please Click Facebook 

शनिवार, अगस्त 9

बदतमीज़ भाईयों की कलाई पर राखी मत बांधना बेटियो..

                     
        " दण्ड का प्रावधान उम्र आधारित न होकर अपराध की क्रूरता आधारित हो !" शायद आपको याद होगा ये आलेख . दिनांक 13 सितंबर 2013 को अपने मिसफ़िट ब्लाग पर इस आलेख को प्रकाशित किया था . वास्तव में क़ानून में बदलाव की ज़रूरत थी. हज़ारों मामलों में न्याय मिलेगा.  बाल-अपराधी को दंड मिलेगा हमें उम्मीद है. पर अब इससे आगे सामाजिक बदलाव के लिये  अब बालिकाओं के लिये संरक्षक क़ानून की ज़रूरत को नक़ारा नहीं जा सकता.

                       सामाजिक संरचना इतनी अधोगत हो चुकी है कि हम सामाजिक मूल्यों को स्तर नहीं दे पा रहे हैं. आज़ शाम रक्षा-बंधन की खरीदी के लिये मैंनें बहुत सी बेटियों को समूह में खरीददारी करते देखा . मन न केवल खुश था बल्कि अच्छा भी लगा  हम चर्चा ही कर रहे थे कि बेटियां अब खुद निर्णय ले रहीं हैं . देखो कितने साहस से भरी आज पावन त्यौहार की तैयारी में व्यस्त हैं. बात खत्म हुई ही थी कि कुछ शोहदे तो नहीं थे पर हाई-स्कूल + के किशोर लग रहे थे.. बेटियों पर छींटाकशी करते नज़र आए . ड्रायवर को वाहन धीमा चलाने का निर्देश देने पर उसने गाड़ी धीमी क्या लगभग  रोक ही दी. मेरा उन किशोरों को घूरना बस था कि वे तितर-बितर हो गये. गुस्सा इतना भरा था कि  मेरी कायिक भाषा प्रभावकारी बन गई थी. यह घटना इतने अंदर तक समा गई कि इन किशोर शोहदों के घर जाकर इनकी बहनों से कह दूं इन  बदतमीज़ भाईयों की की कलाई पर राखी मत बांधना बेटियो..!!

   वास्तव में यही एक उम्र होती है जब बच्चों को अनुसाशित रखा जा सकता है किंतु बच्चों से लगातार सदसंवादों के अभाव से किशोर वय की पुरुष संताने अपराध की ओर क़दमताल करती नज़र आती है. सरकार को चाहिये छेड़छाड़ छीटाक़शी को भी संगीन अपराध की श्रेणी में रखा जाकर दंड देने का प्रावधान तय कर दे. मेरा  यह प्रस्ताव  मेरे भावातिरेक का परिणाम है. तो फ़िर क्या तरीक़ा होगा ताक़ि ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण रखा जावे..

 तरीक़ा कोई भी किशोरों को महिलाओं विशेषरूप से किशोरीयों के विरुद्ध कायिक हिंसा के प्रयासों पर कठोर दांडिक कार्रवाई के प्रावधान अवश्य हों. सार्वजनिक स्थानों को सी.सी कैमरों की ज़द में बेहद आसानी से लाया जा सकता है. साथ ही सतत-वेबकास्टिंग के प्रयोग से भी ऐसे कुत्सित प्रयासों पर रोक लग सकती है. आम नागरिक अपने किशोर होते बच्चों को अपने रडार पर रखें. आप सोचेंगे कि यह कैसे संभव है.. ? वास्तव में सतत संवाद एवं उनकी मित्रमंडली का बैकग्राऊंड जानना अत्यंत आवश्यक होगा . इससे उनकी गतिविधियां सहज समझी जा सकतीं हैं.  वरना बाल-अपराध खासकर यौन आधारित बाल अपराध नहीं रुक सकते . मेरी राय में ये सर्व प्राथमिक ज़रूरत है वरना  बाल-अपराध के लिये बने क़ानून से राहत तो मिली पर अभी दिल्ली दूर है भाई... 


सोमवार, अगस्त 23

सचमुच रिश्ते आभाषी नहीं होते

https://mail.google.com/mail/?ui=2&ik=f28b6629c4&view=att&th=12a9fbf76a62a2d0&attid=0.1&disp=inline&realattid=f_gd7j8cjz0&zw 



भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना गीत के भावों के ओतप्रोत आज का दिन भारतीय संस्कृति का वो त्यौहार है जो मन मानस की    पाकीज़ा सोच को आज और
                             (अर्चना चावजी के स्वर में राखी का उपहार )
पुख्ता कर देता है. आज के लिए बहन फिरदौस का जिक्र सबसे पहले करूंगा जिनकी राखी मुझे सबसे पहले मिली .....
और मिला ये संदेश 

रक्षाबंधन के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं...    
                                                                                                            
 फ़िरदौस ख़ान     
  
तभी हरनीत का फोन मिला भैया आ रही हूं कि सेल फोन ने बताया कि शोभना चौधरी का संदेश खुलने को बेताब है
माथे पे तिलक 
चेहरे पे प्यार 
मुंह में मिठाई 
तोहफा-उपहार 
कच्चे धागे ने 
किया हाथों का श्रंगार 
लो मन गया राखी का त्यौहार
 प्यारे  भैया
राखी के इस अवसर पर प्यार दुआएँ भेज रही हूँ
दूर भले हूँ तन से लेकिन मन में भैया दूर नही हूँ
इस राखी को बाँध कलाई पर, तुम देना मान
तुमसा भाई पाकर मैं एक खुशनसीब बहन बनी हूँ
आपकी बहन

श्रद्धा  जैन 
 इस के अलावा हम सारे भाई  जी हाँ आज हम सौ से अधिक  लोग मिल कर होटल गेलेक्सी में एकत्रित होंगे मनाएंगे रक्षाबंधन हर बरस की तरह मेरा कुटुंब बहुत बड़ा है बिल्लोरे परिवार की तीन पुश्तें जुड़ेंगी यहाँ फिर क्या खूब  दृश्य होगा आप कल्पना नहीं कर सकते ६ माह के मनन मुम्बइ वाले प्रभात की बेटी ख़ुशी /ख्वाइश  से लेकर ९० साल के बड़े पापा पुरुषोत्तम जी सहित सब सभी जुड़ेंगे बस माँ सव्यसाची न होगी जिनने दस बरस पहले ये परम्परा शुरू कराई थी ......
मेरी बेटियां अक्सर मेरी कलाई पर सजी राखियाँ गिनतीं है कोहनी तक सजा मेरा हाथ देख खूब खुश होतीं हैं 
उन लोगों को बता दूं की बेटियाँ न इस त्यौहार के वास्ते बल्कि सारी कायनात के लिए कितनी ज़रूरी हैं जो बेटियों को जन्म नहीं लेने देते सच कितने अभागे और दुष्ट होते है हैं न ..................... चलिए आज स्वप्न-मंजूषा वाली अदा जी को भी जन्म दिन की शुभ कामनाएं दें दें जो किसी की बेटी ही तो हैं जिनने देश का नाम विदेशों में रोशन किया