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गुरुवार, अप्रैल 5

कर्जे की भाषा के ज़रिये सफल क्रांतियाँ क्या संभव है..?

कर्जे की भाषा के ज़रिये
सफल क्रांतियाँ क्या संभव है..?
तुमने जो कुछ  किया मीत  वो
केवल   प्रयोग अभिनव है..!!

अपनी अपनी भाषा में ही
आज क्रांति की अलख जगालो.!
सच कैसे बोला जाता है
मीत ज़रा खुलकर समझा दो..!!


एक पड़ाव को जीत मानकर
रुके यही इक  भूल  थी साथी !
जिन दीपों से जगी मशालें-
उन दीपों की बुझ गई बाती..!


 रुको कृष्ण से जाओ पूछो-
 शंखनाद कैसे करतें हैं....?
             बैठ के पल भर साथ राम के
              पूछो हिम्मत कैसे भरते हैं.?

       







शुक्रवार, मई 13

एक आंदोलन जो जी न सका

अजन्मा आंदोलन 
अबोध विचारों के
के बीच के आकर्षण से
गर्भस्त हुआ
गर्भ में ही 
मारा गया 
हां ऐसा होना तय था 
आंदोलन का भ्रूण
विग्रह और स्वापेक्षी आग्रह के   
निषेचन का परिणाम हो
तब अक्सर ऐसा ही होता है..!!
यक़ीन आया
हर कोई गांधी सा 
न सुभाष सा, न ही अन्ना सा 
प्रेरक कैसे हो सकता है
 रंगे सियारों की 
अधीनता मत स्वीकारो 
अपनी अपनी रीढ़ में शक्ति भरो
अपना संकल्प खुद करो
उठो जागो
अभी भी कुछ नहीं हुआ है
उतार फ़ैंको 
कवच 
आओ साथ मेरे 
बिना किसी को अनदेखा कर
हम करतें हैं
एक नई शुरुआत
पहले अपने झुण्ड में 
जहां रंगे-सियार न हों








मंगलवार, मई 10

दोस्तो एक आंदोलन करो

दोस्तो
एक आंदोलन करो
बहुत ज़रूरी है आंदोलन करो
करो या मरो
दोस्तो
इस बात के लिये आंदोलन करो
कि मुझे लोग ताक़तवर मानें
मेरी औक़ात को पहचाने
तुम ने क्या कहा ..?
बीहड़ों का शेर कभी आंदोलन नहीं करता
हां कहा तो सही
पर ये भी तो सही है
गीदड़ भी षड़यंत्र से रच लेते हैं
बताओ कितने नाहर उनकी चाल से बच लेतें हैं..?
आंदोलन करो न
आंदोलन के लिये हामी भरो न !!
बता दो
कि तुम भी एक हुज़ूम
की ताक़त रखते हो..!
लड़ो विरोध करो
व्यवस्था का
क्या कहा- “उसे सुधारना.है.?
नामाकूल
वो सुधरी तो तुम किस काम के होगे
चलो
उठाओ झण्डे
तुम लाल उठा लो
ए बाबू तुम पीला
अरे तू कहां जा रहा है
दुरंगा छोड़ कर..
ऐन वक्त पर मेरा हाथ छोड़ कर
अरे मूरख
हल्ला बोल हल्ला..!
अरे
वैसे ही जैसे धौनी घुमाता है जब बल्ला
तू मचाता है हल्ला !!
चल उठा
जाति के नाम पर
धर्म के नाम पर
वर्ग के नाम पर
डायरेक्ट
इन डायरेक्ट के नाम पर
हो जा लामबंद
सरकारी बाबूओं सा..?
जिसका दांव जब लगे
तब उसके भाग जगे
चलो
आग लगाओ
तोड़ो 
फ़ोड़ो
शहर गांव जलाओ
मित्र को अमित्र
चित्र को विचित्र
बनाओ न 
आओ 
रेज़ा रेज़ा कर दो
सम्बंध
तार तार कर दो अनुबंध
तुम जो
ये न कर सके तो
शायद महान न बन पाओगे
क्या कहा..?
हां, 
सच कहा
"दूसरों को अपमानित किये बिना 
सम्मान कहां पाओगे  ?"