इमरान को आर एस एस का खौफ ................?


  


 फ्रांस के राष्ट्रपति ने जब यह कहा था कि टेररिज्म इस्लाम के लिए खतरा है तो टर्की ने उससे अपने राजनयिक संबंध तोड़ दिए और इसी क्रम में इमरान साहब ने भी ऐलान कर दिया कि हम भी राजनयिक संबंध तोड़ते हैं। पाकिस्तान के इस पढ़े लिखे नासमझ प्राइम मिनिस्टर को यह जानकारी नहीं थी कि उसके राजनीति संबंध और राजदूत दोनों ही फ्रांस में नहीं है। ऐसे नासमझ प्राइम मिनिस्टर से उम्मीद भी क्या की जा सकती है। आर एस एस को लेकर जिस तरह से पाकिस्तानी प्राइम मिनिस्टर का बयान आया है वह किसी चंडूखाने से आई खबर के आधार पर दिए गए बयान से ज्यादा कुछ नहीं है। 
   सुधी पाठकों कोई बात का अच्छी तरह से ज्ञान होगा कि पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर का ज्ञान और उन्हें जो सूचना दी जाती है उसमें आदमी और आई एस आई का इनपुट होता है। इसी आधार पर वहां का प्रधानमंत्री अपनी बात कहता है। जहां तक इमरान का सवाल है वे आर्मी द्वारा पाले गए तोते से ज्यादा हैसियत नहीं रखते हैं।
   पाकिस्तान ने हालिया दौर में जिस तरह से तालिबान का समर्थन शुरू किया है वह उनकी साइकोलॉजी को स्पष्ट करने के लिए काफी है। और यही बॉडी लैंग्वेज भारत में रह रहे स्लीपर सेल्स और अलगाववादी लोगों की है जिसका खुलासा हमने अपने पिछले आर्टिकल में कर दिया था।
    मित्रों आपको बता दें कि जिस देश में गृह युद्ध होता है उस देश में संयुक्त राष्ट्र संघ किसी ऐसे राष्ट्र को उसका ट्रस्टी बना देता है जो उसके करीब है। भौगोलिक दृष्टि से पाकिस्तान अफगानिस्तान के बहुत करीब है किंतु पाकिस्तान स्वयं तालिबान युद्ध सामग्री मुहैया कराता है पिछले दो-तीन दिनों अर्थात 16-17 जुलाई 2021 से यह बात पब्लिक डोमेन में आ चुकी है। इसके पहले कुछ झूठी अफवाह है ट्विटर के माध्यम से फैलाई जा रही थी कि भारत ने तालिबान के विरोध में लड़ने के लिए वेपन अफगानिस्तान की सरकार को दिए हैं। वैसे तो यह सच नहीं है इससे उलट पाकिस्तान तालिबान लड़ाकों के लिए औरतें भी प्रोवाइड करने पर यस सर वाले फार्मूले पर आ गया है । और अगर भारत ने निर्वाचित सरकार के लिए हथियार दिए हैं तो मानवता की रक्षा के लिए ऐसा करना गलत नहीं है ।

     आइए हम एक वीडियो भी देखते हैं जिसमें स्पष्ट तौर पर तालिबान द्वारा औरतों के ह्यूमन राइट का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है । 

Taliban trying to destroy social fabric of Afghanistan but Imran Khan

 
यहां मलाला यूसुफजई पर पिछले दिनों हुए हमलो के पीछे तालिबानी आईडियोलॉजी ही काम कर रही थी।
     विश्व के इतिहास में यह सबसे दुखद और क्रूरता घटनाओं की पुनरावृत्ति है।

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