महात्मा गौतम बुद्ध 583 BCE में नहीं बल्कि1865 BCE में अवतरित हुए थे :वेदवीर आर्य


आज महात्मा गौतम बुद्ध की जयंती है वैशाख पूर्णिमा पर महात्मा बुध का जन्म नेपाल के लुंबिनी उपवन में  हुआ था।
महात्मा गौतम बुद्ध की जन्म स्थली  को लेकर किसी भी तरह का कोई भ्रम नहीं है । और यह भी भ्रम नहीं है कि उनका जन्म वैशाख पूर्णिमा को ना हुआ हो । परंतु नवीनतम समीक्षाओं से पता चलता है कि महात्मा बुध का जन्म  583  बीसीई में हुआ में इस बात को लेकर बड़ा असमंजस है।
   महात्मा बुद्ध महाभारत युद्ध के 1200 वर्ष उपरांत अट्ठारह सौ चौंसठ बीसीई  लुंबिनी में जन्मे थे और वे इक्ष्वाकु वंश राजा के राजा शुद्धोधन महारानी माया देवी पुत्र थे। इसमें भी कोई शक नहीं है।
आप आपने जुरुथरुष्ट का नाम सुना होगा । जुरुथरुष्ट जब अपनी मान्यताओं को प्रचारित प्रसारित करने के लिए मध्य एशिया तक आए तब बौद्ध धर्म लगभग 29 देशों में विस्तारित था। विश्व के समकालीन 29 देशों में जोराष्ट्रीयन आईडियोलॉजी का विस्तार करने वाले जोराष्ट्र दो ने बुद्ध मत को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया और उसे अफगानिस्तान तक सीमित कर दिया तब अफगानिस्तान को बैक्ट्रिया के नाम से जाना जाता था। अर्थात बुद्ध जोराष्ट्र के पहले
मान्यताओं के हिसाब से जो राष्ट्र दो 647 से 570 bc-e में जन्मे थे तथा बुध का जन्म 563 से 483 बीसीई दर्शाया गया है। अबू रेहान की किताब  अतहर उल बाकी या नामक किताब में अबू रियान  कहते हैं कि बुद्ध का जन्म जोराष्ट्र सेकंड के पहले हुआ था। अब आप समझ सकते हैं कि अलबरूनी या अबू रियान एक कथन को ओवरलूक किया गया है।
[  ] नेपाल के लुंबिनी में उपवन महामाया देवी भ्रमण पर गई हुई थी तथा वहां महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। सारे बुद्धिज्म मानने वाले जानते हैं लुंबिनी का उपवन केवल उपवन ही था वहां किसी तरह का कोई स्ट्रक्चर बुद्ध के जन्म के पूर्व उपलब्ध नहीं था परंतु बुद्ध के बाद था एक मंदिर का निर्माण  किया गया। जिसके कार्बन डेटिंग और ओएसएल परीक्षण के प्रमाण मौजूद है।
[  ] महाभारत की समाप्ति 3162 बी सी के 1210 डायनेस्टी 1000 वर्ष प्रद्योत डायनेस्टी 138 वर्ष हिस्ट्री 360 और नंद डायनेस्टी 100 वर्ष कुल 1600 वर्ष के उपरांत बुद्ध का जन्म हुआ।
[  ] 0 गया में उपलब्ध एक लिपि में 1813 संवत में प्रकाश नेपाली मान्यताओं में 1800 वर्ष शताब्दी यानी शक संवत में उनका जन्म होना पाया माना है
इससे साबित होता है कि महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म एवं महानिर्वाण 1765 BCE में सुनिश्चित किया जाता है ।
    और इस से 80 वर्ष पूर्व महात्मा बुद्ध का लुंबिनी में जन्म हुआ था। 15 मार्च 1944 बीसीई वैशाख माह उनका जन्म स्थापित होता है। तथा इसके 80 वर्ष उपरांत 23 अप्रैल 1909 BCE में उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति हुई तथा उनका निर्वाण 5 अप्रैल 1864 ईसवी में वैशाख पूर्णिमा को हुआ था।
    इसके एस्ट्रोनॉमिकल एविडेंसेस भी उपलब्ध है। तदनुसार 8 मार्च अट्ठारह सौ चौंसठ बीसीई में चंद्र ग्रहण तथा सूर्य ग्रहण 23 मार्च 18 सो 64 ईस्वी में हुआ है तथा उसके 15 दिनों के बाद गौतम बुद्ध का निर्वाण हुआ है ।
उपरोक्त ऐतिहासिक बिंदु की पुष्टि के लिए आप the chronology of India from Manu To Mahabharat में विस्तार से देख सकते हैं अमेजॉन पर यह पुस्तक उपलब्ध है। कुछ दिन इंतजार कीजिए संस्कृति के प्रवेश द्वार नामक मेरी आगामी हिंदी कृति का जिसमें हिंदी रहस्यों पर से पर्दा हटाने की कोशिश की है।
बुद्ध जयंती पर सभी भारतीयों और विश्व के समस्त उन लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं जो बुद्ध के प्रति आस्थावान है

टिप्पणियाँ

अजय कुमार झा ने कहा…
अद्भुत जानकारी , बहुत ही सामयिक और सार्थक। आज के दिन पढ़ी गई सबसे शानदार पोस्ट गिरीश भाई।
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 27-05-2021को चर्चा – 4,078 में दिया गया है।
आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
धन्यवाद सहित
दिलबागसिंह विर्क
आभार अजय जी विर्क जी
नमन
Anita ने कहा…
उत्तम जानकारी !
कविता रावत ने कहा…
बुद्ध जयंती पर बहुत अच्छी सामयिक जानकारी प्रस्तुति
मन की वीणा ने कहा…
बहुत अच्छी जानकारी ।
शोधपूर्वक।
शिशिर ने कहा…
महाभारत काल बुद्ध के बाद का काल है। आप बिना रिफरेंस का इतिहास लिख रहे हैं इसलिए आपको जानकारी नहीं है कि महाभारत गुप्त काल मे लिखा गया।
शिशिर जी महाभारत काल की बात कर रहा हूं आप लोगों को तो 2000 साल ईसा पूर्व से आगे की समझ है ही नहीं। आप प्रमाण भी दीजिए की महाभारत काल का लेखन गुप्त काल में लिखा गया इसके क्या प्रमाण है। वामपंथियों का एक करीबी रिश्तेदार यानी आप जैसों का जिसका नाम बख्तावर खिलजी था ने सारा साहित्य जलाया। अभी जब मैं आपको पूरा नक्शा दिखाने जा रहा हूं तब आप जैसे विचारकों की पेट में कितना दर्द होगा इसका अंदाज मुझे है।
आप सभी अध्ययन में बहुत कमजोर है। आपने तो दास कैपिटल के तीनों एडिशन नहीं पढ़े होंगे
जी आप ही रेफरेंस डाल दीजिए मैंकाले मैक्स मूलर के रिफरेंस तो आपकी लाइब्रेरी में उन तीनों से भरे होंगे
बेनामी ने कहा…
प्रिय वसंत जी कविता रावत जी मन की वीणा जी आप सभी का हृदय से आभार
अनीता जी रावत दीदी धन्यवाद
शिशिर जी जिस भाषा का प्रयोग कर रहे हैं उस भाषा का अर्थ है
वह भाषा शुद्ध वामपंथी मूर्खतापूर्ण विचार है।
इन्होंने महाभारत को गुप्त काल में लिखा होना बताया है
यह कैसे संभव है वेद व्यास की व्यवस्था महाभारत युद्ध के बाद तक जारी रही।
महाभारत काल में ही कलयुग आ चुका था। विद्या कोई व्यक्ति ना होकर व्यवस्था है जैसे कुलपति कोई भी व्यक्ति उस पर बैठ सकता है लेकिन मानसिक रूप से दिव्यांग वामपंथी प्रगतिशील लेखन करने वाले लोग भारतीय संस्कृति को इतिहास में शामिल नहीं करने की कसम खा चुके हैं और यह युद्ध में लगातार लड़ रहा हूं आप भी शामिल होकर सहयोग दें और यदि अगर आप यह भी नहीं कर सकते तो कृपया आशीर्वाद बना कर रखिए