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सुकुमा काण्ड पर तीन कविताएँ

आतंकवादी   वृथा कल्पनाओ से डरे सहमे         बेतरतीब बेढंगे नकारात्मक विचारो का सैलाब     शुष्क पथरीली संवेदना कटीले विचारो से लहू-लुहान सूखी-बंज़र भावनाओ का निर्मम               " प्रहार " कोरी भावुकता रिश्ते रेत सामान हरियाली असमय वीरान उजड़ता घरोंदा बिखरते अरमान     टूटती-उखड़ती साँसे जीवन              "   बेज़ान  " स्वयं से डरी सहमी अंतरात्मा           औरो को डराती शुष्क पथरीली पिशाची आत्मा का           "   अठ्ठाहास  " वृथा कल्पनाओ से डरे सहमे बेतरतीब         बेढंगे आतंकवादी       सब के सब एक सामान           आतंकवादी.......     भगवानदास गुहा , रायपुर छत्तीसगढ़      मैं खामोश बस्तर हूँ , लेकिन आज बोल रहा हूँ। अपना एक-एक जख्म खोल रहा हूँ। मैं उड़ीसा , आंध्र , महाराष्ट्र की सीमा से टकराता हूँ। लेकिन कभी नहीं घबराता हूँ दरिन्दे सीमा पार करके मेरी छाती में आते हैं। लेकिन महुआ नहीं लहू पीकर जाते हैं। मैं अपनी खूबसूरत वादियों को टटोल रहा हूँ मैं खामोश बस्तर हूँ भाई साहब लेकिन आज बोल रहा  हूँ। गु

बाल भवन के नन्हें कलाकारों का गौरैया के प्रति समर्पण

बाल भवन के नन्हें कलाकारों का गौरैया के प्रति समर्पण देकर सभी भावविभोर हो गए। अभिनय के दौरान बच्चों के हावभाव ने छात्र-छात्राओं का दिल जीत लिया। इसके बाद सभी ने एक सुर में गौरैया को वापस लाने का संकल्प लिया। अवसर था विस्डम पब्लिक स्कूल और शासकीय मानकुंवर बाई कॉलेज में नईदुनिया द्वारा आयोजित नुक्कड़ नाटक का। नाटक के दौरान नन्हें कलाकारों ने गौरैया को वापस लाने की अपील की। इस दौरान उन्होंने गौरैया की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। नाटक में पेड़ दादा और बैल चाचा का दर्द भी बताया गया। बच्चों ने बताया कि विलुप्त होती गौरैया अब केवल वाट्सअप और फेसबुक पर ही नजर आती है। उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि गौरैया को वापस लाने के लिए सभी से आंगन और छत पर दाना-पानी रखने कहा। नाटक में कहा गया कि घरों में लगी जालियों के कारण गौरैया अपने पास नहीं आती। इनका रहा सहयोग - निर्देशन- संजय गर्ग - गीत रचना- गिरीश बिल्लौरे - संगीत- शिप्रा सुल्लेरे - बाल भवन के उप संचालक गिरीश बिल्लौरे के निर्देशन में बाल भवन के कलाकारों ने नाटक तैयार किया। नन्हें कलाकार- वैशाली बरसैंया, आस्था अग्रहरि, वैष्णवी

बालनाट्य एवं अभिनय कार्यशाला हेतु पंजीयन

                     संभागीय बालभवन जबलपुर द्वारा बाबा भीम राव अम्बेडकर जयंती दिनांक   14 अप्रैल 2016 से 30 जून 17 तक बालनाट्य एवं अभिनय कार्यशाला आरम्भ होगी. इस   हेतु   पंजीयन के लिए अभिभावक अपने बच्चों का नाम पंजीकृत करा सकते हैं . कार्यशाला का संचालन श्री संजय गर्ग द्वारा किया जावेगा.   पंजीयन के आधार पर बच्चों को राजा मानसिंह तोमर के एक वर्षीय अभिनय डिप्लोमा परीक्षा में शामिल होने की पात्रता भी होगी .      

*बहू ने बनाई फिल्म सास और दादी सास से कराया अभिनय*

कलाकार के लिए उम्र मायने नहीं रखती जबलपुर के  मशहूर गायक आभास एवं संगीतकार में श्रेयस जोशी की 75 वर्षीय दादीजी श्रीमती पुष्पा जोशी इन दिनों मुम्बई में हैं । उनकी मौजूदगी का लाभ उठाया पौत्र वधू हर्षिता ने और बुजुर्गों की स्थिति पर एक भावात्मक शार्ट फिल्म बनाई ।   इस शार्ट फिल्म के निर्माण में हर्षिता ने घर के सदस्यों की मदद ली । यूट्यूब पर भावुक कर देने वाली इस फिल्म में घर के बुजुर्गों की पीडा को रेखांकित करने में सफलता पाने वाली बहू हर्षिता का कहना है - "शार्ट फिल्म जायका हमारी बुजुर्गों के प्रति सोच में बदलाव के लिए प्रेरित करेगी"            यूट्यूब फिल्म को मात्र 8 घंटे में ही 1000 से अधिक दर्शकों का देखा जाना कथानक और स्क्रीन-प्ले की सुगढ़ता का परिचायक है .. बधाई देते हुए एक दर्शक श्री अतुल कैशरे ने कहा कि -    हर्षिता जोशी द्वारा निर्देशित लघु फिल्म "जायका " यू ट्यूब पर देखी , बहुत पसंद आई । इसने मुंशी प्रेमचंद की कहानी " बूढी काकी " की याद ताजा कर् दी । यह फिल्म अत्यंत ही मार्मिक बनाई गई हैं ।   एक उम्रदराज महिला जो जीवन भर अपने बच्चो क

विजातीय विवाहों पर उग्रता क्यों

भारतीय संवैधानिक आस्था पर प्रहार करना कोई हितकारी कदम तो नहीं हैं. फिर ऐसी क्या वज़ह है  कि कुछ जातियां अपने अस्तित्व इज्ज़त  को बचाने के नाम पर  अंतर्जातीय विवाह पर बेहद हंगामा कर रहे हैं  ..? विवाह क्या है.......... वेदों  में वर्णित वंशानुक्रम को आगे ले जाने के लिए बनाई गई सांस्थानिक  व्यवस्था  ही विवाह के रूप में अधिमान्य हैं परन्तु मुझे अब तक कन्या की जाति के सन्दर्भ में कोई आज्ञा देखने को नहीं मिली. अपितु मनु स्मृति में जिन विवाहों का उल्लेख मिला वो 8 प्रकार के हैं एक विवरण अनुसार इस लिंक  ( http://www.ignca.nic.in/coilnet/ruh 0029. htm ) मौजूद विवरण अनुसार विवाह के बारे में स्पष्ट किया गया है और ये आप सब जानते ही होगें 1.      ब्राह्म : इसमें कन्या का पिता किसी विद्वान् तथा सदाचारी वर को स्वयं आमंत्रित करके उसे वस्रालंकारों से सुसज्जित कन्या , विधि- विधान सहित प्रदान करता था। 2.      दैव : इस प्रकार के विवाह में कन्या का पिता उसे वस्रालंकारों से सुसज्जित कर किसी ऐसे व्यक्ति को विधि- विधान सहित प्रदान करता था , जो कि याज्ञिक अर्थात् यज्ञादि कर्मों में निरत करता था।