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समय चक्र हूँ आऊंगा, लौट तुम्हारे गाँव ।।

न मैं बीता हूँ कभी , नया बरस क्या मीत ? बँटवारा तुमने किया, यही तुम्हारी रीत ।। पंख नहीं मेरे कोई, कहाँ हैं  मेरे पाँव - समय चक्र हूँ आऊंगा, लौट तुम्हारे गाँव ।। एक सिंहासन के लिए, मत कर गहन प्रयास सहज राज मिल जाएगा, दिल में रहे मिठास जिनके मन कुंठा भरी, जले भरम की आग ऐसे सहचर त्यागिये - न रखिये अनुराग ।। नए वर्ष की मंगल कामनाएं

मुझे रियलस्टिक फ़िल्में ही पसंद हैं जैसे ... दंगल,

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यूँ तो मुझे फ़िल्में देखना सबसे कष्टदाई काम लगता है. क्योंकि बहुधा फ़िल्में रियलिटी से दूर फैंटेसी में ले जातीं हैं. परन्तु हालिया रिलीज़ फिल्म दंगल की आन लाइन टिकट बुक कराने मेरी बेटी ने एमस्टर्डम से पूछा तो सबसे पहले मैंने उसके कथानक की जानकारी ली . फिर कथानक सुनकर कर  यकायक मुझे कामनवेल्थ गेम्स की महिला कुश्ती में भारत की  असाधारण विजय का समाचार धुंधला सा याद आया. किसी अखबार में विजेता गीता के पिता के जूनून की कहानी याद आई पर बस इतनी की एक पिता ने अपनी बेटियों को लड़कों के साथ भी कुश्ती के मुकाबले में खड़ा किया .जो सामाजिक परम्पराओं को तोड़ने की पहल थी. हिन्दी पट्टी वाले राज्यों में  हरियाणा जैसे प्रांत की स्थिति बेटियों के मामले लगभग सामान ही है. और वहां से आयकानिक रास्ते निकल पड़ें तो तय है बदलाव करीब है. आज जब  @ aamir_khan की फिल्म दंगल देखी तो लगा लम्बी लड़ाई लड़नी होती है बदलाव के लिए .  यहाँ पाठकों से पूरी शिद्दत से कहना चाहता हूँ कि आप फिल्म  दंगल अवश्य देखिये. आपकी सोच अवश्य बदलेगी. और अगर   #Geeta_Phogat  ( गीता फोगट )    की बायोपिक   Dangal   को देखकर भी नज़रिया न बदला तो

हार नहीं मानूंगा रार नहीं ठानूंगा :डॉ. सौरभ मालवीय

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भारतरत्न  श्रीयुत अटलबिहारी बाजपेई जी   जन्म दिवस 25 दिसंबर  भारतीय जहां जाता है , वहां लक्ष्मी की साधना में लग जाता है. मगर इस देश में उगते ही ऐसा लगता है कि उसकी प्रतिभा कुंठित हो जाती है. भारत जमीन का टुकड़ा नहीं , जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है. हिमालय इसका मस्तक है , गौरीशंकर शिखा है , कश्मीर किरीट है , पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं. दिल्ली इसका दिल है. विन्ध्याचल कटि है , नर्मदा करधनी है. पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघाएं हैं. कन्याकुमारी इसके चरण हैं , सागर इसके पग पखारता है. पावस के काले-काले मेघ इसके कुंतल केश हैं. चांद और सूरज इसकी आरती उतारते हैं , मलयानिल चंवर घुलता है. यह वन्दन की भूमि है , अभिनन्दन की भूमि है. यह तर्पण की भूमि है , यह अर्पण की भूमि है. इसका कंकर-कंकर शंकर है , इसका बिंदु-बिंदु गंगाजल है. हम जिएंगे तो इसके लिए , मरेंगे तो इसके लिए. यह कथन कवि हृदय राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी का है. वह कहते हैं , अमावस के अभेद्य अंधकार का अंतःकरण पूर्णिमा की उज्ज्वलता का स्मरण कर थर्रा उठता है. निराशा की अमावस की गहन निशा के अंधकार में हम अपना मस्तक आत्म-गौरव के साथ

भ्रमर दंश सहे कितने, उसको कैसे कहो, कहूंगा ?

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आभार :- नितिन कुमार पामिस्ट     एक अकेला कँवल ताल में ,   संबंधों की रास खोजता !       रोज़ त्राण फैलाके अपने   , तिनके-तिनके पास रोकता !! बहता दरिया  चुहलबाज़ है ,   तिनका तिनका छीन कँवल से , दौड़ लगा देता है अक्सर ,    पागल सा फिर त्राण  मसल के !   है सबका सरोज प्रिय किन्तु   ,   उसे दर्द क्या. ? कौन सोचता !!      एक अकेला कँवल ताल में ,   संबंधों की रास खोजता ! रात कुमुदनी जागेगी तब,  मैं विश्रामागार रहूँगा भ्रमर दंश सहे कितने , उसको कैसे कहो , कहूंगा ? कैसे पीढा व्यक्त करूंगा – अभिव्यक्ति की राह खोजता !!               जाग भोर की प्रथम किरन से , अंतिम तक मैं संत्रास भोगता !

जबलपुर में एक लाख से अधिक स्कूली बच्चों ने रचा इतिहास : श्री अभिमनोज

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जबलपुर.   ‘‘ हम सब ने ये ठाना है शहर को नम्बर 1 बनाना है ’’ जैसे नारों के साथ शहर के एक लाख से अधिक स्कूली बच्चों ने आज इतिहास रच दिया. शहर के 448 शासकीय और अशासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी पूरे उत्साह के साथ सड़कों पर आये और बड़ों को स्वच्छता का संदेश दिया. स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत जबलपुर को साफ सुथरा रखने और देश में जबलपुर को प्रथम स्थान दिलाने इस महाअभियान का आयोजन किया गया. कहीं हाथों में बैनर पोस्टर लेकर विद्यार्थियों ने स्व्च्छता का संदेश दिया तो कहीं छात्र छात्राओं ने आम लोगों और व्यापारियों को डस्ट बिन का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया. स्वच्छता को लेकर पहली बार आयोजित इस व्यापक जागरूकता अभियान के दौरान महापौर डॉ श्रीमती स्वाती सदानंद गोडबोले , एमआईसी सदस्य और निगमायुक्त श्री वेदप्रकाश भी स्कूली विद्यार्थियों के बीच पहुंचे और उनका उत्साह बढ़ाया. महापौर ने कहा कि स्वच्छता को लेकर स्कूली विद्यार्थियों में आई जागरूकता समाज के लिए अच्छा संकेत है और उनके माध्यम से बड़े भी साफ सफाई के प्रति प्रेरित होंगे . स्वच्छता क्रांति का नजारा एक ही समय में शहर भर के स्कूली विद्य

धर्मेंद्र पानी की टंकी पे चढ़े थे वो सरकारी थी : बीडीओ रामगढ़

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फिल्मों को नया डायमेंशन देना शोले ने किया । शोले एक बदलाव की फिल्म कही जा सकती है ।  अब आप ही बताएं कि पानी की टंकी के सवाल पर डायरेक्टर का माथा फिर गया था कि जिस गाँव में बिजली नहीं वहां पानी की टंकी का  का होना ? असल बात कौनों को नईं मालूम जो हमको रामगढ़ वाले बीडीओ ने सुनाई बीडीओ साब रिटायर्ड हैं । इन दिनों वे मानसिक रूप से कन्फ्यूज़ हैं । केजरीवाल मोदी जी पप्पू भैया अम्मा बुआ आदि वाले खबरिया विचार के बीच उनने बताया - हाँ तो गिरीश बाबू उस व्हेन आई वाज़ बीडीओ एट रामगढ़ गौरन्मेंट डिसाइडेट टू प्रोवाइड टेप वाटर एट रामगढ़   और फिर टेंडर हुआ पाइप और टंकी बनाने का टंकी बन गई पाईप का टेंडर रुक गया किसी कमीशनी रीज़न से । रहा बिजली का मुद्दा तो तर् खिंच रहे थे । खामखां बेकार पड़ी टंकी पर धर्मेंद्र को चढ़वाने का आइडिया हमारे बड़े बाबू का । सिप्पी को उसने ही उकसाया था तब वो सीन जोड़ा गया बाद में उसी ने कानूनी नोटिस भेजा अतिरिक्त किराए का । अब बड़े बाबू ठहरे बड़े बाबू उस दौर में सिप्पी साहेब से टंकी का किराया भी वसूला गया । खजाने में जमा है कुछ हमाई जेब में  चलिए छोड़िये बेवज़ह सिप्पी साब पे टंकी को ल

प्राण हूँ कपड़े बदलने जा रहा हूँ !!

मृत्यु से अभिसार करने जा रहा हूँ मैं किसी से प्यार करने जा रहा हूँ साँसों की पूंजी खजाना सब लुटा एक नया व्यापार करने जा रहा हूँ कौन हूँ तुम जानते हो जिसे मैं नहीं वो , जिसे तुम पहचानते हो .. वो भी नहीं हूँ न गलत हो तुम , मैं भी सही हूँ .. चीथड़े देखे हैं तुमने , पहना मैं वही हूँ प्राण हूँ कपड़े बदलने जा रहा हूँ !! किसे घातक प्रहारों से मरूंगा... तुम्हारे कहने से क्या मृत्यु - वरूंगा ? तयशुदा साँसें जब चुकने लगेंगी- रातरानी सा मैं झरने लगूंगा ...! लड़खड़ाया हूँ बहुत अब सम्हलने जा रहा हूँ ..!! गिरीश बिल्लोरे मुकुल  

डूबे सूरज मैं उठा लेता हूँ भोर अपनी है बता देता हूँ

डूबे सूरज मैं उठा लेता हूँ भोर अपनी है बता देता हूँ ::::::::::: “ पूस की रात ” पुआलों पे बिछे बारदाने चिलम के साथ निकल आते किस्से पुराने .. पेड के पीछे छिपे भूत से डरा था कल्लू रोज़ स्कूल में हम सब लगे उसको चिढाने चीख चमरौटी की सुनके गाँव डरता था पहन चप्पल जो निकला वही तो मरता था हमने झम्मन को चच्चा कहा तो सब हँसने लगे पीठ पीछे हमको ताने कसने लगे ...!! किसी को छूने से धर्म टूटता या बचता है ...! न जाने कौन ?   भरमजाल ऐसा रचता है ? कितने सूरज बिन ऊगे ही डूब गए ...   दीप कितने कुछ पल में ही रीत गए आज़कल खोज रहा हूँ डूबते सूरज कहीं मिल जाते हैं उनको मैं उठा लेता हूँ कभी कुरते के पाकिट में छिपा लेता हूँ ! वक्त मिलते ही उनको मैं उगा देता हूँ भोर सूरज की  है सबको मैं बता देता हूँ !!

जबलपुर के खाते में 2015 के दो बालश्री एवार्ड

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जबलपुर के खाते में 2015 के दो बालश्री एवार्ड जबलपुर बालभवन की श्रेया और अभय के साथ छिंदवाडा की फातिमा खान  ने श्रेष्ठता साबित की, बालभवन की सतत गतिविधियों की वजह से मिली सफलताएं                  श्रेया को  थियेटर एवं अभय को मूर्तिकला का राष्ट्रीय बाल श्री अवार्ड मिला राष्ट्रीय बालश्री चयन प्रक्रिया  2015 में जबलपुर बालभवन के मास्टर अभय को मूर्तिकला के लिए राष्ट्रीय सम्मान हेतु चुना गया है। जबकि बेबी श्रेया खंडेलवाल को अभिनय के लिए राष्ट्रीय बाल श्री सम्मान से अलंकृत किया जायेगा।                     मास्टर अभय सोधिया के पिता श्री कैलाश सौंधिया प्राईवेट संस्थान में कार्यरत है। मध्यम वर्गीय परिवार से संबंधित  अभय फाइन आर्ट कालेज के प्रथम वर्ष का विद्यार्थी है अभय  इस सम्मान को पाकर बेहद उत्साहित है उनका कहना है कि वे बालभवन में बिताये 6 वर्षें को अमूल्य दिन मानते हैं उनका कहना है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मूर्ति कला को आगे ले जावेगें अपनी सफलता का श्रेय बालभवन एवं अपनी गुरू श्रीमति रेनु पांडे को देते है .  साथ  मातापिता के सर्पोट के बिना यह उपलब्धि  संभव ही न थी  यह सम्मान

झुककर सूरज उठा रहा हूँ .. मुझको झुकने की ताकत देना ......

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कल रात   इशिता सीनियर और इशिता   जूनियर कलर्स के राइजिंग स्टार्स म्यूजिकल कार्यक्रम के लिए चुनने की खबर जब वाट्सएप के ज़रिये फ्लेश की तो सबका स्नेह मिला और आज यानी 09 दिसंबर 2016 शुक्रवार   को बालश्री  2015 के रिज़ल्ट की खबर को प्रिया भल्ला ने आज के दिन को   बालभवन जबलपुर का *गुडफ्रायडे* बताया  समाचार अनुसार     *बाल अभिनेत्री   श्रेया खंडेलवाल* को     *थियेटर* के लिए तथा     * अभय सौंधिया* को मिला  *मूर्तिकला* के लिए राष्ट्रीय बालश्री एवार्ड 2015 हासिल  हुआ    बाल अभिनेत्री   श्रेया खंडेलवाल     अभय सौंधिया इस बीच शानदार नवम्बर को न भूलते हुए इन चार सितारों को न भूलूंगा जिनने दिल्ली में प्रथम स्थान पाया शानदार समूह गीत गाकर ....   याद हैं न मास्टर अब्दुल रहमान अंसारी , मास्टर प्रगीत शर्मा , मास्टर चन्दन सेन , एवं आदर्श अग्रवाल... जी हाँ ये ही थे दिल्ली के विजेता