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नवंबर, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

*बुद्ध कब मुस्कुराओगे*

बाना अलाबेद बुद्ध कब मुस्कुराओगे तथागत सुना है  गुना भी है  जब मुस्कुराते हो तब कुछ न कुछ बदलता है   * सीरिया की बाना अलाबेद ने*   बम न गिराने को कहा है   अब फिर मुस्कुराओ   बताओ   बच्चे स्कूल जाना चाहते हैं   गाना गाना चाहते हैं *इशिता* की मानिंद   लिखना चाहतें हैं *बीनश* की तरह क्रिएटिव अब बम न गिराओ   हमारी किलकारियां उनके बम   से ज़्यादा असरदार है   वो जो धर्म हैं   वो जो पंथ हैं   वो जो सरकार हैं   जी हाँ किलकारियां   उन सबकी आवाज़ से ज़्यादा असरदार हैं   बुद्ध अब तो मुस्कुराओ एक शान्तिगीत गाओ   * गिरीश बिल्लोरे मुकुल*

देश का धन देश में : एक आर्थिक विमर्श 2

       प्रभाव दिखने लगे हैं आज वाट्स एप के ज़रिये किसी ने बताया- “पूरे देश में नोटबंदी का जो प्रभाव हुआ है उसके आंकड़े रिजर्व बैंक ने पेश कर दिए हैं. आरबीआई ने आज आंकड़ें जारी कर बताया है कि नोटबंदी का ऐलान होने के बाद 10 नवंबर से 27 नवंबर के बीच बैंकों में 33948 करोड़ रुपये बदले गए हैं. इसी बीच यानी 10 नवंबर से 27 नवंबर के बीच देश भर के बैंकों में 8 , 11 , 033 करोड़ रुपये जमा हुए हैं. कुल मिलाकर इस दौरान 8 , 44 , 982 (8 लाख 44 हजार 982 करोड़ रुपये) का बैंकों में ट्रांजेक्शन हुआ है.” दूसरी और उर्जित पटेल साहब का ये बयान भी आया - ‘ हम बैंकों से व्यपारियों के बीच पीओएस (प्वाइंट आफ सेल) मशीनों को बढावा देने का अनुरोध कर रहे हैं ताकि डेबिट कार्ड का उपयोग ज्यादा प्रचलित हो. ' पटेल ने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक ने 1,000 और 500 रुपये के नोट जमा करने से बैंकों की जमा में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण बढी हुई नकदी पर 100 प्रतिशत सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) की भी घोषणा की है. उन्होंने कहा कि एक बार सरकार अपने वादे के अनुरुप पर्याप्त मात्रा में एमएसएस (बाजार स्थिरीकरण योजना) बांड जारी

देश का कालाधन देश में : आर्थिक विमर्श 1

करेंसी के बंद होने या कहें सरकार द्वारा बंद करने के बाद की परिस्थियां ऐसी क्यों हैं कि जनता कष्ट भोगने के बावजूद भी सरकार के साथ कड़ी है. ? ऐसा लगता है जनता को बेहद भरोसा है और  उम्मीद भी है कि सरकार का हर कदम जनोन्मुख है. सरकार की यह कोशिश आर्थिक विषमता को दूर करेगी. प्रथम दृष्टया दिख भी यही रहा है. अपने बिस्तर के नीचे नोट बिछा कर गर्वीली नींद सोने वालों के लिए- “मेरे प्यारे देशवाषियों” से प्रारम्भ होने वाला भाषण भयावह लग रहा होगा पर गरीब व्यक्ति निम्न और उच्च मध्यवर्ग का व्यक्ति दाल-रोटी के साथ  बिना सलाद खाए चैन की नींद सो रहा है.  चिल्लर के अभाव में  जाड़े के दिनों में मूली-अमरूद के सलाद का जुगाड़ जो नहीं हो पा रहा ... जब स्व. राजीव जी ने कहा था – “हम एक रुपये भेजते हैं आप तक पंद्रह पैसे पहुंचाते हैं तो बड़ा प्रभावित थी जनता तो एक दिन का उपवास भी तो रखा था स्व. शास्त्री जी की सलाह पर... !” यानी इस देश की जनता जब किसी को प्रधान-मंत्री जी बनाती है तो विश्वास की डोर से खुद-ब-खुद बांध जाती है उस व्यक्तित्व से ..! इसी तंतु के सहारे देश का प्रजातंत्र बेहद शक्तिशाली नज़र आता है. भ

बालभवन जबलपुर का दबदबा रहा

दिनांक 14 अगस्त  से 20 अगस्त तक चलने वाली  समारोह का आयोजन प्रदेश के सात बालभवनों का एक साथ प्रदर्शन हुआ इस क्रम में दिनांक 18 से 20 नवंबर 2016 तक जवाहर बालभवन भोपाल में आयोजित विभिन्न  सांस्कृतिक , साहित्यिक स्पर्धाओं में संभागीय बालभवन जबलपुर का दबदबा कायम रहा। जिसमें मूर्तिकला में अंकुर विश्वकर्मा प्रथम , कविता लेखन में कुमारी उन्नति तिवारी ,   टिप्पणी मे कुमारीं बीनस खान प्रथम , संवाद  लेखन में कुमारी वैशाली बरसैयां , एकल अभिनय में कुमारी समृद्वि असाठी , कहानी लेखन में कुमारी सुनीता केवट तृतीय , टिप्पणी लेखन में देवांशी जैन , हस्तकला में तृतीय स्थान कुमारी शिखा पटेल   उपरोक्त सभी प्रतिभागी विजेताओं  को महिला बाल विकास मंत्री श्रीमति अर्चना चिटनिस द्वारा पुरूस्कृत किया गया । बॅाबी नाटक ने पलकें भिगोई श्री विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित नाटक बॉबी प्रस्तुति श्री संजय गर्ग की निर्देशन में दिनांक 19 नवंबर को इुर्ह बालिका बॉबी पर केन्द्रित इस नाटक में नौकरी पेशा दम्पती की इकलौती संतान की पीड़ा पर चित्रित किया गया है। बालरंग सभी बच्चों का कहना है कि मुख्य पात्र बॅा

मिक्की माउस ने सम्हाल बालभवन

14  नवम्बर 2016 को संभागीय बालभवन जबलपुर के रूप में  कार्य संचालन डायरेक्टर के रूप में मिक्की माउस ने सम्हाल कर बालदिवस को रोचक बना दिया  

सिमी आतंकवादी की गोली से शहीद हुए पिता श्री रविशंकर पारे के पुत्र के ज़ख्म हरे हुए

स्वर्गीय श्री रविशंकर जी पारे नार्मदीय ब्राह्मण समाज के  नांदवा त. टिमरनी जिला हरदा के मूल निवासी  स्वर्गीय श्री रविशंकर जी पारे की खण्डवा में हत्या इन्हीं 8 गुनाहगारों में से 03 ने 28/11/2009  में खंडवा जेल से भागते समय की थी ।  श्री पारे जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में कार्यरत थे. जब वे सामाजिक मीटिंग में जा  रहे थे तब इन आतंकियों नें उनकी बाईक छीनने की गरज से सीने को छलनी किया बाईक छीनी और भाग खड़े हुए.   29 नवम्बर 2009 को श्री पारे के अंतिम संस्कार  में श्री शिवराज सिंह जी ,  श्री विजय शाह जी ,  श्रीमति रंजना बघेल श्री उमाशंकर गुप्ता , श्री नन्द कुमार चौहान , प्रदेश के  DGP और  खंडवा के सभी विधायक . सी एम साहब ने कहा था ... मैं पारे साहब के बलिदान को खाली न जाने दूंगा. उनके बेटे अंकित को सरकारी नौकरी और स्व. पारे जी को शहीद का दर्ज़ा ...... दिलाऊँगा.. बाद में  श्रीमती पारे को उसी  बैंक में अनुकम्पा नियुक्ति स्वरुप   क्लर्क शिप मिली जो बच्चों क्रमश: अंकित और अक्षय की शिक्षा दीक्षा का एक आधार बना. परन्तु शहीद का दर्ज़ा न मिलना  आज भी अंकित के ह्रदय की पीढा है. ये अंकित का