नुसरत जहां निखिल प्रकरण एवम भारतीय न्याय व्यवस्था में अधिकारों का संरक्षण ।

8 जनवरी 1990  बांग्ला फिल्म अभिनेत्री ने अपने पति निखिल जैन को बिना तलाक दिए बाहर का रास्ता दिखा दिया और अब ये दोनों विवाह के बंधन में नहीं है। मीडिया को दिए गए पत्र में नुसरत जहां ने कहा है कि उनकी डेस्टिनेशन वेडिंग टेक्निकली एक वेडिंग नहीं कही जा सकती।
 टीएमसी सांसद नुसरत ने साफ कर दिया है कि क्योंकि उनकी शादी निखिल से विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत होनी थी किंतु ऐसा ना हो सका इस कारण अब ना तो तलाक की कोई गुंजाइश है और ना ही कोई कानूनी बाध्यता है। 31 वर्षीय अभिनेत्री एवं सांसद के टर्की में हुए कथित विवाह के समाचार पर और अब नई खबरों से ब्लॉग लेखक का निजी कोई आकर्षण नहीं है परंतु कुछ दिनों पहले मलाला यूसुफजई ने जो बयान दिया उसे लेकर खासा विवाद पाकिस्तान मीडिया में आया है। बताओ और सामाजिक विचारक मैं महसूस करता हूं कि इस तरह के बेमेल विवाह अक्सर सफल नहीं होते हैं। अति महत्वाकांक्षा जो दोनों ओर से भरपूर थी पारिवारिक विवाह संस्था को क्षतिग्रस्त करती है यह स्वभाविक है। मलाला यही कहती है आप सहमत हो या ना हो मलाला के कथन से मुझे इत्तेफाक है। सामान्य तौर पर विवाह संस्था और निकाह जिसे मैं व्यक्तिगत तौर पर कॉन्ट्रैक्ट रिलेशनशिप के तौर पर देखता हूं में बड़ा फर्क है । 
     विवाह स्प्रिचुअल रिलेशनशिप की श्रेणी में आता है जबकि निकाह को एक इंस्ट्रुमेंटल रिलेशनशिप के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
      क्योंकि यह वही स्थिति थी जिस के संबंध में मलाला ने अपने विचार व्यक्त किए। मलाला कहती है कि आपसी संबंध खास तौर पर दांपत्य संबंध का आधार निकाहनामा नहीं होना चाहिए। देखा जाए तो कुछ हद तक यह ठीक भी है म्युचुअल अंडरस्टैंडिंग इसमें बहुत मायने रखती है। क्योंकि यह भारतीय कानून के मुताबिक विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत अंतर धर्म विवाह के रूप में चिन्हित नहीं हो पाया अतः सांसद का कथन भी अपनी जगह बिल्कुल सही है कारण जो भी हो ना तो यह निकाह  ना ही यह विवाह था इसे केवल लिव इन रिलेशनशिप के रूप में चिन्हित किया जा सकता है। जहां तक पाकिस्तान में हुए बवाल का संबंध है वह भी स्वभाविक तौर पर उठना अवश्यंभावी था। क्योंकि लिव इन रिलेशनशिप को पाकिस्तान में ऐसा कोई वैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है जो महिला के अधिकार को संरक्षित कर सके। लेकिन भारत में लिव इन रिलेशनशिप को  ज्यूडिशियल सपोर्ट मिला हुआ है और महिलाओं के अधिकार सुरक्षित हैं। इस ब्लॉग पोस्ट के जरिए आपको यह बताना चाहता हूं कि वास्तव में भारत की न्याय व्यवस्था बहुत  ही हंबल और कल्याणकारी है। इस दिशा में  विभिन्न प्रकरणों में पारित आदेशों का अर्थ यह नहीं है कि हमारे माननीय न्यायाधीशों ने लिव इन रिलेशनशिप को बढ़ावा देने की कोशिश की बल्कि यह है कि भारतीय न्याय व्यवस्था चाहती है कि किसी भी भारतीय नागरिक के अधिकारों का संरक्षण होता रहे। 
   नुसरत जहां ने जिस तरह से आरोप अपने लिव-इन पार्टनर निखिल जैन पर लगाए हैं अगर वे कोई सिविल वाद एवं क्रिमिनल पिटीशन या कंप्लेंट करती हैं और परीक्षण में यह सब मुद्दे सही पाए जाते हैं तो एक आम अपराधी की तरह श्री निखिल जैन पर कार्यवाही संभव है। अच्छा होता कि आपसी समझदारी से इस विवाह संस्था को जारी रखा जाता ।
मूल रूप से कलाकार एवं जन नेता श्रीमती नुसरत जहां की फिल्म बंगाल में बेहद पसंद की जाती थी उनमें कुछ फिल्मों के नाम है शोत्रू (2011), खोखा 420 (2013), खिलाड़ी (2013)
      सुधि पाठक जाने यह लेख किसी के सेलिब्रिटी होने के कारण नहीं लिखा गया बल्कि एक सामान्य दृष्टिकोण से लिखा गया है ।

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