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आदर्श आंगनवाड़ी केंद्र शाहपुर : प्रयासों की सफ़लता की झलक नज़र आ रही है..

आयुक्त श्री दीपक खाण्डेकर को आदर्श केंद्र में जाकर हार्दिक प्रसन्नता हुई    माडल आंगनवाड़ी केंद्र डिंडोरी की गतिविधियों के अवलोकन के लिये 28.08.14 को जबलपुर से  कमिश्नर श्री दीपक खांडेकर ने डिंडोरी  कलेक्टर श्रीमति छवि भारद्वाज़ की क्रियेटिविटी का अवलोकन किया तो यकायक बोल उठे- "बड़ी तारीफ़ सुनी थी.. वैसा ही आदर्श केंद्र है. " उनके इस कथन ने हम सबको और अधिक उत्साहित कर दिया है. इस उच्च स्तरीय भ्रमण दल में श्री कर्मवीर शर्मा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डिंडोरी, एवम अन्य विभागों के अधिकारी भी थे.. आइये जानें क्यों मोहित हुए श्री खांडेकर ...                          एक बरस पहले जब आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडोरी का गांव शाहपुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कुमारी रेनु शर्मा और उनकी सहायिका श्रीमति राधा नामदेव सहित सभी स्थानीय बाल विकास कार्यक्रम से जुडीं कार्यकर्ताओं से मैंने अनुरोध किया कि केंद्रों पर प्री-स्कूल गतिविधियां सुचारू रूप से संपादित कराईं जावें  ताक़ि बच्चों की केंद्रों से उपस्थिति कम न हो तो सभी आंगनवाड़ी कर्मी को रास्ता न सूझ रहा था. सभी  बेहद तनाव में थीं कि क

पास उसके न थे-गहने मेरी मां , खुद ही गहना थी !

आज़ पोला-अमावश्या है  मां सव्यसाची स्वर्गीया प्रमिला देवी का जन्म दिवस .................. वही  क्यों कर  सुलगती है   वही  क्यों कर  झुलसती  है ? रात-दिन काम कर खटती, फ़िर भी नित हुलसती है . न खुल के रो सके न हंस सके पल --पल पे बंदिश है हमारे देश की नारी,  लिहाफ़ों में सुबगती  है ! वही तुम हो कि  जिसने नाम उसको आग दे  डाला वही हम हैं कि  जिनने  उसको हर इक काम दे डाला सदा शीतल ही रहती है  भीतर से सुलगती वो..!  कभी पूछो ज़रा खुद से वही क्यों कर झुलसती है.? मुझे है याद मेरी मां ने मरते दम सम्हाला है. ये घर,ये द्वार,ये बैठक और ये जो देवाला  है ! छिपाती थी बुखारों को जो मेहमां कोई आ जाए कभी इक बार सोचा था कि "मां " ही क्यों झुलसती है ? तपी वो और कुंदन की चमक हम सबको पहना दी पास उसके न थे-गहने  मेरी मां , खुद ही गहना थी ! तापसी थी मेरी मां ,नेह की सरिता थी वो अविरल उसी की याद मे अक्सर  मेरी   आंखैं  छलकतीं हैं. विदा के वक्त बहनों ने पूजी कोख  माता की छांह आंचल की पाने जन्म लेता विधाता भी मेरी जननी  तेरा कान्हा तड़पता याद में तेरी तेरी ही दी हुई धड़कन

प्रधान सेवक का इनसाइडर विज़न

    योजना आयोग के खात्मे के साथ भारत एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा . मेरी नज़र से भारतीय अर्थ-व्यवस्था का सबसे विचित्र आकार योजना आयोग था जो समंकों के आधार पर निर्णय ले रहा था. यानी आपका पांव आग में और सर बर्फ़ की सिल्ली पर रखा है तो औसतन आप बेहतर स्थिति में हैं.. योजनाकार देश-काल-परिस्थिति के अनुमापन के बिना योजना को आकृति देते . वस्तुत: आर्थिक विकास की धनात्मक दिशा वास्तविक उत्पादन खपत के बीच होता पूंजी निर्माण है. जो भारत में हो न सका .   मेड इन इंडिया  नारे को मज़बूत करते हुए  प्रधान सेवक ने "मेक इन इंडिया " की बात की.. अर्थशास्त्री चकित तो हुए ही होंगे.  विश्व से ये आग्रह कि आओ भारत में बनाओ , भावुक बात नहीं बल्कि भारत के  श्रम को विपरीत परिस्थियों वाले मुल्कों में न भेज कर भारत में ही मुहैया कराने की बात कही. इस वाक्य में   भारत के औद्योगिक विकास को गति देने का बिंदु भी अंतर्निहित है .                 रेतीले शहर दुबई में लोग जाकर गौरवांवित महसूस करते हैं. तो यू.के. यू. एस. ए. में हमारा युवा  खुद को पाकर आत्ममुग्ध कुछ दिन ही रह पाता है. फ़िर जब मां-बाप के चेहरे की

इनसाइडर विज़न आफ़ आउट साइडर :: 01 ( नरेंद्र मोदी के भाषण पर बी.पी गौतम का आलेख )

स्वतंत्र भारत में 15 अगस्त 1947 को प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में लाल किले से भाषण देने की परंपरा जवाहर लाल नेहरू ने शुरू की थी , जो गुलजारी लाल नंदा , लालबहादुर शास्त्री , इंदिरा गांधी , मोरारजी देसाई , चरण सिंह , राजीव गांधी , विश्व नाथ प्रताप सिंह , चन्द्रशेखर , पी.वी. नरसिम्हाराव , अटल बिहारी वाजपेई , एच. डी. देवगौड़ा , इंद्र कुमार गुजराल और मनमोहन सिंह तक की यात्रा करते हुए नरेंद्र मोदी तक आ गई है। 26 मई 2014 को शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी भारत के 18 वें प्रधानमंत्री हैं। स्वतंत्रता दिवस की वर्षगाँठ के अवसर पर लाल किले से उन्होंने अपना पहला भाषण दिया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से प्रधानमंत्री द्वारा दिये जाने वाले भाषण को देशवासी प्रति वर्ष ही पूरी गंभीरता से सुनते रहे हैं , लेकिन इस बार लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को लेकर आम जनता में एक अलग तरह का ही रोमांच था। दिल्ली से दूर अन्य शहरों , कस्बों और गाँवों में रहने वाले लोग भाषण सुनने को लेकर एक सीमा से अधिक उत्सुक नज़र आ रहे थे। ध्वजारोहण का एक ही समय होता है , जिससे तमाम लोग नरेंद्र मोदी के