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मंगलवार, जून 05, 2012

शो मस्ट गो आन


साभार:-"Owaisihospital "
वातावरण की गहमा गहमीं के बाद  एक निर्वात सी स्थिति थी सहमे सहमे चेहरे . कुछ देर पहले की ही तो बात है   स्ट्रैचर  पर बेहोश देह आई.सीं.यू. में प्रवेश करा दी मुस्तैद स्टाफ़ ने. लगभग भागता हुआ ड्यूटी-डाक्टर मरीज के लिये सही डाक्टर को बुलाने में सफ़ल हो जाता है. अगले दस मिनिट में  आत्मविश्वास से लकदक एक काया प्रवेश करती है आई.सी.यू. में. परिजन नि:शब्द किंतु उनकी पथराई आंखें अपलक गोया पूछतीं हैं -"बचालोगे न ? "
             कुछ देर के बाद ही स्ट्रैचर को मरीज़ सहित ओ.टी. में आकस्मिक आपरेशन  के लिये ले जाया गया. और अगले पंद्रह मिनिट बाद हताश डाक्टर के मुंह से "सारी" निकलता है. परिजनों में से किसी एक के मुंह से चीख.. और एक धैर्यवान युवक सम्भवत: बेटा तो न था पडौसी सी रहा होगा..(बेटे तो विदेशों में होते हैं ) जेब से रुपये निकालते हुये  रिशेप्शन पर कुछ बतियाता है.
     फ़र्स्ट फ़्लोर से ग्राउंड-फ़्लोर तक के सारे मरीज़ों के परिजनों के चेहरों पर एक अज़ीब सा भाव था. भयातुर ही तो थे वे ..
   पडौसी का बेटा सेल फ़ोन से  :- "बोस साहब नहीं रहे.." की सूचना जारी करता है.  मेरे लगभग बराबर खड़ा डाक्टर बुदबुदा रहा था..."पता नहीं बाडी कब ले जाते हैं ?" आनन फ़ानन बोस साहब के पडौस वाला लड़का सब कुछ व्यवस्थित कर देता है. बोस साहब जो अब बोस साहब न होकर बाडी थे को घर ले जाया जाता है.
आधे घण्टे बाद एक निर्वात सी स्थिति थी सहमे सहमे चेहरे धीरे धीरे नार्मल होने लगते हैं. जैसे कुछ हुआ ही न हो.
एक युवा बाप के कष्ट को न देख सकने की स्थिति देख कर मुक्ति की कामना करता है उसकी सुर्ख लिपिस्टिक वाली बीवी सहमति जताती है. कुछ लोग बुके लेकर हालिया भर्ती मिश्रा साहब को फ़िल्मी स्टाइल में पेईंग वार्ड में घुसते हैं. विधायक जी सदलबल क्षेत्र के यशस्वी दादाजी के हालचाल लेने उनके कमरे में घुस जाते हैं. मौका मिलते ही वो लड़का उस लड़की से बातें करने लगता है. सच शो फ़िर से चालू हो जाता है कभी न रुकने वाला शो..
 





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