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मंगलवार, अप्रैल 3

अरब इजरायली , विरोधाभाषी जीवन : डैनियल पाइप्स


क्या इजरायल की कुल जनसंख्या के 1\5 अरब यहूदी राज्य के प्रति स्वामिभक्त हो सकते हैं?

मस्तिष्क में इसी प्रश्न के साथ हाल में मैंने इजरायल के अरब निवासियों वाले क्षेत्र( जफा, बका अल गराबिया, उम्म अल फहम , हायफा , एकर, नजारेथ, गोलन पहाडियाँ , जेरूसलम) का दौरा किया और साथ ही मुख्यधारा के अरब और यहूदी इजरायलियों के साथ वार्ता की।
मुझे बहुत से अरब भाषी नागरिक मिले जो कि यहूदी राजनीति में जीवन व्यतीत करने को लेकर स्वयं में संघर्ष की स्थिति में हैं। एक ओर तो वे देश के विशेषाधिकार सम्पन्न धर्म के रूप में यहूदी धर्म का विरोध करते हैं , उस कानून का जो कि केवल यहूदियों को अपनी इच्छा के अनुसार आप्रवास का अधिकार वापस लौटने के कानून के अंतर्गत देता है, राज्य की मुख्य भाषा हिब्रू हो इसका विरोध करते हैं, ध्वज में डेविड के तारे को पसंद नहीं करते , राष्ट्रगान में " यहूदी आत्मा" उन्हें पसंद नहीं है। दूसरी ओर वे देश की आर्थिक सफलता की प्रशंसा करते हैं , स्वास्थ्य सुविधा के स्तर , कानून के शासन और चलायमान लोकतंत्रकी भी सराहना करते हैं।
इस संघर्ष की अनेक अभिव्यक्तियाँ भी हैं। छोटी, अशिक्षित और 1949 में पराजित अरब इजरायली जनसंख्या दस गुना अधिक बढी है , आधुनिक कुशलता प्राप्त कर ली है और अपने आत्मविश्वास को फिर से प्राप्त कर लिया है। इस समुदाय से कुछ लोगों ने अनेक उत्तरदायित्व और सम्मान के पद भी प्राप्त किये हैं, जिसमें सर्वोच्च न्यायलय के न्यायाधीश सलीम जोबरान, पूर्व राजदूत अली याह्या , सरकार के पूर्व मंत्री रालेब मजादेले और पत्रकार खालिद अबू तोमेह शामिल हैं।
लेकिन समाहित हुए ये कुछ लोग उस जनसमूह की तुलना में फीके हैं जो कि स्वयं को भूमि दिवस, नकबा दिवस और भविष्य दृष्टि रिपोर्ट के साथ जोड्ते हैं। रहस्योद्घाटन तो यह है कि अधिकतर अरब इजरायली सांसद जैसे कि अहमद तीबी और हनीन जुवाबी इजरायल विरोध या जायोनिज्म विरोध के मुखर वक्ता हैं। अरब इजरायली धीरे धीरे अपने यहूदी साथियों के विरुद्ध हिंसा में लिप्त हो रहे हैं।
निश्चित रूप से अरब इजरायली दो विरोधाभाष को जी रहे हैं। यद्यपि इजरायल में उनके साथ भेदभाव होता है पर साथ ही वे किसी सार्वभौम अरब देश( मिस्र या सीरिया) में जीवन व्यतीत कर रहे लोगों से कहीं अधिक अधिकार व स्थिरता का सुख भोग रहे हैं। दूसरा वे उस देश के नागरिक हैं जिसे कि उनके साथी अरब दूषित करते हैं और नष्ट करने की धमकी देते हैं।
इजरायल में मेरी बातचीत से मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि इन जटिलताओं के चलते यहूदियों और समान विचार के अरब में अरब इजरायली असंगत अस्तित्व के पूर्ण परिणामों पर चर्चा हो रही है। अतिवादी सांसद और हिंसक नवयुवकों को प्रतिनिधि न मानकर चंद कट्टरपंथी मान कर निरस्त कर दिया जाता है। इसके बजाय हमें सुनने में आता है कि यदि केवल अरब इजरायली ही अधिक सम्मान प्राप्त करें व केंद्रीय सरकार से अधिक नगर निकाय आर्थिक सहायता प्राप्त करें तो वर्तमान असंतोष कम हो सकता है, लोगों को इजरायल के अच्छे अरब तथा पश्चिमी तट और गाजा के अरब को बुरा अरब के रूप में विभाजित किया जाये साथ ही यह चेतावनी भी दी जा रही है कि यदि अरब इजरायलियों को आत्मसात नहीं किया गया तो वे फिलीस्तीनियों के साथ मिल जायेंगे।
मेरे मध्यस्थों ने इस्लाम के बारे में कोई प्रश्न नहीं किया । इसे अनुदार माना गया कि इस बात का उल्लेख किया जाये कि मुस्लिम ( जो कि अरब इजरायल का लगभग 84 प्रतिशत हैं) पूरी तरह इस्लाम से शासित हैं। इस्लामी कानून को लागू करने के अभियान पर कोई चर्चा ही नहीं हुई और लोग तत्काल दूसरे विषयों की ओर चले गये।
इस अवहेलना से मुझे 2002 से पूर्व के तुर्की की याद आती है जब मुख्यधारा के तुर्क यह मान बैठे थे अतातुर्क की क्रांति स्थायी है और यह अनुमान कर लिया था कि इस्लामवादी चंद कट्टरपंथी होकर रह जायेंगे। वे बहुत गलत सिद्ध हुए अब जबकि 2002 के अंत में लोकतांत्रिक ढंग से इस्लामवादियों के सत्ता में आने के एक दशक पश्चात निर्वाचित सरकार ने ठोस रूप से इस्लामी कानून को क्रियान्वित किया है और स्वयं को एक नवओटोमन क्षेत्रीय शक्ति बना लिया है।
मैं इजरायल में भी इसी प्रकार के विकास की भविष्यवाणी करता हूँ जैसे जैसे अरब इजरायल विरोधाभाष अधिक गम्भीर होगा , इजरायल के मुस्लिम नागरिक संख्या में अधिक होते जायेंगे , क्षमता और आत्मविश्वास में बढ्ने के साथ साथ देश के जीवन के साथ आत्मसात होते जायेंगे तथा यहूदी सार्वभौमिकता को उखाड फेंकने की मह्त्वाकाँक्षा भी अधिक जाग्रत होगी। इससे यही संकेत मिलता है कि जैसे जैसे इजरायल बाहरी खतरे से मुक्ति प्राप्त करता जायेगा अरब इजरायली कहीं अधिक बडा खतरा बनते जायेंगे। मेरी भविष्यवाणी है कि ये थियोडोर हर्ल्ज और लोर्ड बालफोर की दृष्टि के यहूदी गृहभूमि में आत्यंतिक बाधा हैं।
तो फिर क्या किया जा सकता है? लेबनान के ईसाई सत्ता से इस कारण बाहर हो गये क्योंकि उन्होंने बडी संख्या में मुसलमानों को शामिल कर लिया और आनुपातिक रूप से जनसंख्या में वे कम हो गये और देश का शासन नहीं कर सके। इस शिक्षा के आधार पर इजरायल की पहचान और सुरक्षा के लिये यह आवश्यक है कि वे अरब नागरिकों को कम करें इसके लिये उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कम करने की आवश्यकता नहीं है और न ही उन्हें वापस भेजे जाने की आवश्यकता है केवल इजरायल की सीमा को समायोजित करने के लिये कदम उठाये जायें , सीमांत क्षेत्रों में घेरेबंदी की जाये ,पारिवारिक मिलन के लिये नीतियों को कठोर किया जाये , पूर्व नटाल नीतियों को बदला जाये तथा शरणार्थियों के प्रार्थनापत्रों की सावधानीपूर्वक जाँच की जाये।
बिडम्बना है कि इन कार्यों का सबसे बडा परिणाम यह होगा कि अधिकतर अरब इजरायली मुखर रूप से यहूदी राज्य के अस्वामिभक्त नागरिक बने रहेंगे ( फिलीस्तीनी राज्य के स्वामिभक्त नागरिक के विपरीत) । इससे आगे अनेक मध्य पूर्वी मुस्लिम इजरायली बनने की आकाँक्षा रखते हैं ( जिसे मैं मुस्लिम आलिया कहता हूँ) । मेरे अनुसार इन प्राथमिकताओं से इजरायल की सरकार कठिन स्थिति में आ जायेगी और इसके लिये पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दे पायेगी जिसके चलते आज जो कुछ शांतिपूर्ण दिख रहा है वह कल के लिये समस्या बन जायेगा।

बुधवार, जनवरी 18

फिलीस्तीनियों के "वापसी के अधिकार" को समाप्त करना


डैनियल
पाइप्स

1967 से 1993 के मध्य पश्चिमी तट या गाजा से कुछ सैकडों की संख्या में ही फिलीस्तीनियों ने इजरायली अरब लोगों से विवाह कर (जो कि इजरायल की कुल जनसंख्या का पाँचवा भाग हैं) और इजरायल की नागरिकता प्राप्त कर इजरायल में निवास करने के अधिकार को प्राप्त किया। इसके बाद ओस्लो समझौते ने कम चर्चित परिवार पुनर्मिलन प्रावधानों के द्वारा इस छोटी सी धारा को एक नदी में परिवर्तित कर दिया। 1994 से 2002 के मध्य फिलीस्तीन अथारिटी के 137,000 निवासी इजरायल में आ चुके हैं और उनमें से अनेक छल और बहुविवाह में संलिप्त हैं।
इजरायल के समक्ष दो कारण हैं जिसके चलते उसे इस अनियंत्रित आप्रवास से चिंतित होना चाहिये। पहला, यह सुरक्षा के लिये खतरा उत्पन्न करता है। शिन बेट सुरक्षा सेवा के प्रमुख युवाल दिस्किन ने 2005 में ध्यान दिलाया था कि आतंक की गतिविधियों में लिप्त पाये गये 225 इजरायली अरब में से 25 जो कि 11 प्रतिशत है अवैध रूप से परिवार पुनर्मिलन प्रावधानों के तहत इजरायल में प्रविष्ट हुए थे। वे 19 इजरायलियों को मारने आये और 83 को घायल किया और उनमें से सबसे अधिक दुष्ट शादी तुबासी था जिसने कि 2002 में हमास की ओर से हाइफा के माज्जा रेस्टोरेंट पर आत्मघाती आक्रमण किया और 15 लोगों की ह्त्या की।
दूसरा, यह चोरी छुपे फिलीस्तीनियों के " वापसी के अधिकार" के रूप में कार्य करता है और इजरायल के यहूदी स्वरूप को कमतर बनाता है। जो 137,000 नये नागरिक इजरायल में आये हैं वे इजरायल की कुल जनसंख्या का 2 प्रतिशत हैं जो कि कम संख्या नहीं है। युवाल स्टीनिज जो कि अब वित्त मन्त्री हैं उन्होंने 2003 में ही फिलीस्तीन अथारिटी की परिवार पुनर्मिलन की नीति को इजरायल में फिलीस्तीनियों की संख्या बढाने और इसके यहूदी चरित्र को कमतर करने के प्रयास के रूप में आँक लिया था। बाद में एक फिलीस्तीनी मध्यस्थ अहमद क़ुरेयी ने इस आशंका को सही सिद्ध किया , " यदि इजरायल सीमा के सम्बंध में हमारी योजना को अस्वीकार करता है ( एक फिलीस्तीनी राज्य ) तो हमें इजरायल की नागरिकता की माँग करनी चाहिये"
इन दो खतरों की प्रतिक्रिया में इजरायल की संसद ने जुलाई 2003 में " इजरायली कानून में नागरिकता और प्रवेश" कानून पारित किया। इस कानून के अंतर्गत फिलीस्तीनी परिवारों को स्वतः ही इजरायल की नागरिकता या निवास को प्रतिबंधित कर दिया गया और इसके साथ कुछ तदर्थ और सीमित अपवाद लगा दिये गये जिसके द्वारा गृह मंत्रालय को यह प्रमाणित करना होता है कि वे स्वयं को इजरायल के साथ जुडा हुआ पाते हैं और अन्य प्रकार से सहायक हैं। काफी कटु आलोचना के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री एरियल शेरोन ने वर्ष 2005 में इस बात को दुहराया , " इजरायल राज्य को अपने यहूदी चरित्र को संरक्षित रखने और बनाये रखने का पूरा अधिकार है चाहे इसका अर्थ यह भी हो कि इससे नागरिकता की नीति पर भी प्रभाव पड्ता हो" ।
इस कानून को चुनौती देने वाले वकील सावसान जाहेर के अनुसार अपवाद के कुल 3,000 प्रार्थना पत्र में से केवल 33 को ही संस्तुति दी गयी। परिवार पुनर्मिलन के मामले में कठोर प्रावधान अपनाने वाला इजरायल अकेला देश नहीं है उदाहरण के लिये डेनमार्क में ऐसा कानून दशकों से प्रयोग में है यदि अन्य लोगों को छोड दें तो इस देश का इजरायल का पति भी नीदरलैंड और आस्ट्रिया की तरह ही एक मुकद्दमा लड रहा है।
पिछले सप्ताह इजरायल के सर्वोच्च न्यायालय ने 6-5 के बहुमत से इस मह्त्वपूर्ण कानून को स्थाई बना दिया। किसी व्यक्ति के विवाह के अधिकार को मान्यता देते हुए भी न्यायालय ने इस बात से इंकार कर दिया कि इसके साथ ही निवास का अधिकार भी प्राप्त होता है। न्यायालय के मनोनीत प्रधान अशर दन ग्रुनिस ने अपने बहुमत के निर्णय में अपने विचार व्यक्त किये , " मानवाधिकार राष्ट्रीय आत्मह्त्या का निर्देश नहीं है" ।
यहूदियों की ओर फिलीस्तीनी आप्रवास की यह परिपाटी 1882 से आरम्भ हुई जब यूरोप के यहूदियों ने अपना अलिया ( उत्थान का हिब्रू शब्द , जिसका अर्थ है इजरायल भूमि के लिये आप्रवास) । उदाहरण के लिये विन्स्टन चर्चिल ने इस बात को पाया था कि किस प्रकार फिलीस्तीन में यहूदी आप्रवास से उसी प्रकार अरब आप्रवास को उत्प्रेरणा मिली। , " उत्पीडन से कहीं दूर अरब लोग देश में बडी संख्या में भर गये और अपने को कई गुना बढाया जब तक कि उनकी जनसंख्या बढ नहीं गयी"।
संक्षेप में, आपको इजरायलवाद ( जायोनिस्ट) के उच्च स्तरीय जीवन और कानून पालक समाज का लाभ प्राप्त करने के लिये यहूदी होना आवश्यक नहीं है। इस विषय के एक छात्र जान पीटर्स का अनुमान है कि एक दोहरा यहूदी और अरब आप्रवासी " कम से कम बराबर सापेक्ष का" 1893 से 1948 के मध्य विकसित हुआ। इसमें कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है , अन्य आधुनिक यूरोपवासी जो कि कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों में बसे ( आस्ट्रेलिया और अफ्रीका) और ऐसे समाज का निर्माण किया जिन्होंने कि मूलवंशियों को भी आकर्षित किया।
फिलीस्तीनी अलिया की यह परिपाटी इजरायल के जन्म के समय से ही जारी है। वे इजरायलवाद विरोधी ( जायोनिस्ट विरोधी) हो सकते हैं लेकिन आर्थिक आप्रवासी, राजनीतिक विद्रोही , समलैंगिक , सूचनाकर्ता और सामान्य मतदाता जो आत्मनिर्भर हैं वे फिलीस्तीन अथारिटी या हमास के नर्क के गर्त की अपेक्षा मध्य पूर्व के विशिष्ट आधुनिक और उदार राज्य को पसंद करते हैं। और यह भी ध्यान देने योग्य है कि कुछ इजरायली अरब ही अपने विवाहित जोडे के साथ पश्चिमी तट और गाजा में रहना पसंद करते है जबकि कोई भी कानूनी बाधा उन्हें ऐसा करने से नहीं रोकती।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का एक दीर्घकालिक मह्त्व है। जैसा किIsrael Hayom में एली हजान ने लिखा है, " न्यायालय ने अघोषित और घोषित दोनों ही प्रकार से निर्णय दे दिया है कि इजरायल एक यहूदी राज्य है, और इसके साथ ही वर्षों पुरानी बहस का समाधान कर दिया है" । पिछले दरवाजे से " वापसी के अधिकार" को बंद करने से इजरायल की इजरायलवादी ( जायोनिस्ट) पहचान और भविष्य सुरक्षित हो गया।