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जनवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बैंडिट क्वीन वाली सीमा याद है न ?

                                                            हाँ वही सीमाबिस्वास जो साधारण से चेहरा लिए जन्मी , एन एस डी से खुद को मांजा और बन गई विश्व प्रसिद्ध फ़िल्म बैंडिट क्वीन की सबसे चर्चित नायिका । सीमा विश्वास जो काम किया है वह उनका कला के प्रति समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है । अगर आप उनके जीवन जाने तो पता चलता है कि कला साधना असाधारण लोग ही कर पाते हैं । असाधारण लोग लक्ष्य पर सीधा देखते हैं ।   सीमा की कहानी देख कर लगा कि - "जीवन संघर्ष कुछ न कुछ देकर जाता है ।"   मुझे हमेशा महसूस होता है कि कलाकार की ज़िंदगी एक अभिशप्त गंधर्व की ज़िंदगी होती है । उसे औरों के सापेक्ष बेहद मेहनत करनी होती है ।   सीमा विश्वास नवाजुद्दीन सिद्दीकी ओम पुरी यह कोई खास चेहरे वाले नहीं है यह ग्लैमरस चेहरा नहीं लेकर आए हैं पर अपनी अभिनय क्षमता के दम पर आपने देखा होगा यह उत्कृष्टता के उन मानकों पर खरे उतरते हैं जो एक अभिनेता के लिए जरूरी है . अपने दौर में यह शापित गंधर्व कितना कष्ट सह रहे होंगे इसका अंदाज उनकी बायोग्राफी से लगाया जा सकता है . आईएएस बनना डॉक्टर इंजीनियर बनना औसत ख्वाहि

जीवन के प्रमेय : गिरीश बिल्लोरे

*जीवन के प्रमेय* हैं ये साध्य असाध्य से तुम इनको साध्य नाम मत दो ज़िन्दगी की त्रिकोणमिति में एक मैं हूँ जिसे सारे प्रमेय सिद्ध करने हैं वह भी तब जब कि आधार भी मैं ही हूँ ? जब आधार में हम न होते तब आसान था न सब मान लेते इस सिद्धि को ! है न पर तुम हो कि आधार से सम्पूर्ण साध्य की सिद्धी पर आमादा ओह ! ये मुझसे न होगा करूंगा भी तो सिर्फ अपने लिए सबको यही करना होगा ! ******** *एक अकेला कँवल* एक अकेला कँवल ताल में, संबंधों की रास खोजता ! आज त्राण फैलाके अपने, तिनके-तिनके पास रोकता !! बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छीन कँवल से दौड़ लगा देता है दरिया कभी कभी तो त्राण मसल के ! सब को भाता, प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता ? *गिरीश बिल्लोरे मुकुल*

स्वामी विवेकानंद 156 वीं जयंती पर आत्मचिंतन

*ये सब क्या आसान नहीं !* विवेकानंद की आत्मकथा की दूसरी बार अध्ययन करते समय मेरी निगाह उस पन्ने पर जाकर रुक जाती है , जहां कि स्वामी विवेकानंद ने आदि गुरु शंकराचार्य के हवाले से लिखा है की दुनिया में तीन चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं होती एक मनुष्यत्व दूसरी मुमुक्षत्व अर्थात  मुक्ति की कामना और तीसरी महापुरुषों का साथ ! तीनों का मिलना आज के युग में बेशक कठिन है । इसे कैसे प्राप्त करना है आगे बताऊंगा अभी तो जानिए कि स्वामी विवेकानंद के 39 वर्षीय जीवन का मूल्यांकन करना मेरे जैसे जड़ बुद्धि के लिए वैसा ही है जैसे काले वाले कम्बलों को रंगना ।            पर उनके जीवन क्रम से इतना अवश्य सीख चुका हूं कि किसी को अपने गुरु के रूप में स्वीकार लेना कदापि ठीक नहीं ।                       विवेकानंद के जीवन का प्रारम्भ इसी बात की ओर इशारा करता है । मैं यह लेख किसी भी प्रकार की धार्मिक दृष्टांत के तौर पर नहीं लिख रहा हूं मैं उतना ही नास्तिक हूं जितना विवेकानंद ने मुझे बताया उनकी सलाह है कि मैं नास्तिक रहूं... पर  किसके लिए पर किसके प्रति आस्थावान न रहूं   अपने कथन के आगे वाले हिस्सों में स्पष्ट क

नववर्ष चिंतन बनाम चिंता

नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं बीता 2018 कुछ दे गया कुछ ले गया और यह आदान-प्रदान स्वभाविक है यह साल भी आया है कुछ दे जाएगा कुछ ले जाएगा ।                2018 में अगर हनुमान जी के कास्ट सर्टिफिकेट के जारी करने का मामला प्रकाश में आया है तो कहीं ऐसा ना हो कि सर्टिफिकेट की फोटो कॉपी विभिन्न मंदिरों में चस्पा 2019 में अगर आप देखे हैं तो कोई बड़ी बात नहीं ।                सच कहूं अब तो किसी भी विषय पर लिखने में डर लगता है  किस विषय पर कौन क्या सोच है रहा  है । सामान्यतः देश को चलाने के लिए विचारधाराएं ला दी जाती हैं लेकिन देश क्या चाहता है जनता क्या चाहती है जन गण की सोच का मनोवैज्ञानिक यानी साइक्लोजिकल विश्लेषण करना जरूरी है । सियासत को चाहिए कि वे जिस भाषा में आपस में संवाद करते हैं उसका स्तर और बेहतर कर सकने में अगर सफल हुए तो जन गण उन्हें सम्मान के नजरिए से देखेंगे । ऐसा नहीं है कि  सियासी लोग काम नहीं करते उनका अपना काम करने का तरीका है मैं अपने तरीके से सोचते हैं उनका भी लक्ष्य की तिरंगे की आन बान शान बनी रहे लेकिन अचानक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सत्ता की ओर जब कदम बढ़ते हैं तो कुछ

लुईस ब्रेल के 210वें जन्मपर्व पर भावुक हुए निःशक्तजन मंत्री श्री लखन घनघोरिया

"दिव्यांग कल्याण मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता" कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा लुइस ब्रेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया गया तदुपरांत अतिथियों का स्वागत संस्था के अध्यक्ष श्री सज्जाद शफी सचिव श्री मति रेखा विनोद जैन प्राचार्य श्री पूनम चंद्र मिश्रा श्रीमती किरण केवट सुश्री रेखा नायडू प्रीति पगली सुभाषिनी दुबे श्वेता नामदेव  रेवा सिंह सेन आदि ने किया . डॉ राम नरेश पटेल ने इस अवसर पर कहा कि:_ " अगर लुइस ब्रेल ना होते तो निश्चित तौर पर ब्रेल लिपि का अविष्कार ना होता और बेल ब्रेल लिपि का आविष्कार ना होता तो मैं या मेरी तरह अन्य नेत्र दिव्यांगजन विश्व में कदापि लाभान्वित नहीं होते श्री राम नरेश पटेल ने लुइस ब्रेल के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला . संस्था अध्यक्ष श्री सज्जाद सैफी ने संस्था की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बहुत समय से श्री लखन घनघोरिया जी इस संस्था से जुड़े हैं और इनकी मदद से हम असाध्य काम भी कर पाए हैं संस्था में 117 नेत्र दिव्यांग बालिकाएं अध्ययनरत हैं . जिनकी प्रतिमा और क्षमताओं पर किसी भी प्रकार का संदेह किया

बाल भवन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल : विनय सक्सेना

नव वर्ष स्वागत हेतु सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत आज संभागीय बाल भवन में उत्तर मध्य विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री विनय सक्सेना ने मुख्य आतिथि के रूप में कहा कि वे संभागीय बाल भवन के लिए हरसंभव किसी भी तरह की कमी ना हो हम ऐसे प्रयास करेंगे बाल भवन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में अब शामिल हो गया है .   उन्होंने संचालक बाल भवन को निर्देशित किया कि बाल भवन के लिए अपेक्षित सामग्री एवं अन्य आवश्यकताओं का भी आँकलन कर विधिवत प्रस्ताव उन्हें सौंपा जाए ।अब भविष्य में मैं बच्चों से मिलने एवं उनकी कला साधना से परिचित होने अनौपचारिक रूप से आता रहूँगा . बच्चों   को सुविधा से वंचित न रखना सरकार   सर्वोच्च प्राथमिकता है . संस्था की वार्षिक उपलब्धियों का विवरण संचालक संभागीय बालभवन गिरीश बिल्लोरे द्वारा प्रस्तुत किया गया .   बाल भवन में इस अवसर पर निश्चय संस्था द्वारा सभा का क्षेत्र 40 कुर्सियां श्री आदित्य अग्रवाल ने भेंट स्वरूप प्रदान की जो श्री विनय सक्सेना के हाथों संचालक को सौंपी गई । कार्यक्रम अध्यक्ष श्री प्रोफेसर राजेंद्र ऋषि ने कहा कि- मैं चकित हूं कि नन्हे न