शनिवार, जुलाई 31

आज हमारा जगराता है ............................

आज सुनिए एक गज़ल-------------------गिरीश पंकज जी की................इनके बारे मे पढिये इस ब्लॉग पर.......

8 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुन्दर शब्द और उनकी अभिव्यक्ति।

Girish Billore Mukul ने कहा…

गिरीश जी तो हैं ही श्रेष्ठता सुरों में भी कम नहीं

Satish Saxena ने कहा…

गिरीश पंकज जो को प्रस्तुत करके निस्संदेह आपके ब्लाग का सम्मान बढ़ा है ! गिरीश बिल्लौरे और अर्चना जी को शुभकामनायें !

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर, गिरीश जी और अर्चना जी को शुभकामनायें !

शिवम् मिश्रा ने कहा…

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आप को बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं

girish pankaj ने कहा…

dil se dhanyvaad, kyonki aajkal bina fixing k koi kisi par dhyan nahi deta. aabhar billore ji ka bhi ki unke saujanya se archana ji jaisi aawaaj mili meri ghazal ko.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत ही सुन्दर गीत!
--
अर्चना चावजी ने गाया भी बहुत अच्छा है!

Satish Saxena ने कहा…

@गिरीश बिल्लोरे,
आपके पेज को लोड होने में बहुत समय लगता है ...आपके पाठकों को इससे असुविधा होती होगी और फलस्वरूप निश्चित ही पाठक संख्या कम होगी, कृपया कोई निदान सोंचे ! इतने बढ़िया काम को करने के लिए आपको शुभकामनायें !

Wow.....New

1939 का जबलपुर एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस : डा आनंद राणा इतिहासकार

  अग्रिम आभार : विश्व संवाद केंद्र जबलपुर  1944 में अगर भारत आज़ाद मान लिया जाता तो देश की दशा कुछ और ही होती ऐसा सबका मानना है । उनको भारत क...