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वृषभानुज यानी सांड

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मुझे उसे उसकी हरकत देख कर सांड कहना था . किन्तु किसी को सरे आम सांड कह देना मुझ जैसे कवि को क्या किसी को भी अलस्तर-पलस्तर से सँवरने की तैयारी होती और कुछ नहीं . रहा सवाल क्रोध निकालने का सो कहना तो था ही . राजपथ चारी वो सत्ता के मद में चूर जब मेरे दफ्तर आया तो अपनी कथित गरीब "प्रजा"के कार्य न होने का आक्रोश निकाल रहा . ... कुछ इस तरह वो चीखे :-"साब, आप ने तुलसा बाई को आँगनवाडी वर्कर न बनाया मैं आपकी दीवालें पोत दूंगा ! सी एम् साहब आ रहे हैं उनके सामने पेश कराउंगा ! आप अपनी कुर्सी बच्चा लीजिये " मैंने कहा श्रीमान जी आप जन-प्रतिनिधि हैं गरीब जनता को सही बातें सिखाइए . झूठे आश्वासन देकर आप खुद फंस जाते हैं फिर हम पर दवाब बनाते है गलत काम करने के लिए ? "देखता हूँ,क्या और कितना गलत सही करतें हैं ? यह जानते हुए की श्रीमान का नाम "........" है मैंने कहा:-"वृषभानुज जी हम चाहेंगे की आप कलैक्टर साब की कोर्ट में इस मामले को लगा दीजिये " वो:-"मेरा नाम वृषभानुज नहीं है " मैं:"आप मेरे लिए सम्माननीय है मुझे आज से आपको यह नाम देने स

आओ बहस करें: बांये पथचारीयों को समर्पित

आओ बहस करें जूतम-पैजार तक मोहल्ले से बाज़ार तक दो हों तो भी और हों हज़ार तक आओ हम बहस करें आओ हम बहस करें काम करे और कोई आओ हम बहस करें विषय के चुक जाने तक आम के पाक जाने तक नक्सलियों के आयुध से जीभों का उपचार करें गांधी अब याद आया कल दीं दयाल का विष पिलाने का आर्ट आपमें कमाल का घर मेरे है आग लगी रास कलस ताक रखें बस्ती के जलने तक हम "कारण पे बात रखें " सोमनाथ टूटा था सोमनाथ है हताश मोगरे के पेड़ पे क्यों न उगे है पलाश बाएँ पथ धारी हम इस की तलाश करें प्रश्न हम सहस करें आओ हम बहस करें