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रविवार, अगस्त 12

वाह मनीष सेठ वाह बाबा हमें गर्व है आप पर ..!!


हमारे मित्र मनीष सेठ इन दिनों कटनी में एकीकृत बाल विकास सेवा विभाग के  जिला अधिकारी हैं. बेहद चंचल हंसमुख हमारे अभिन्न मित्र हैं.हम आपस में  लड़ते झगड़ते भी खूब हैं.. स्वभाविक है इस सबके बिना मज़ा कहां आता है दोस्तों में.. और फ़िर जबलपुरिया नमक पानी ऐसा ही तो है कि बिना लड़े-झगड़े खाना पचता ही नहीं .. आपस में बाबा का संबोधन किया करतें हैं हम बात  1999 की दीवाली की है.. अचानक सड़क पर चलते चलते मुझे जाने क्या हुआ क्रेचेस फ़िसल गई और पोलियो वाले पैर में फ़ीमर बोन का भयानक फ़्रेक्चर फ़ीमर बोन कनेक्टिंग बाल से टूट कर अलग हो गई थी. कुछ मित्र होते हैं जो बुरे वक्त में नज़दीक होते हैं सबसे पहले मित्र मनीष सेठ ही थे जो मेरे सामने दिखे लगभग डपटते हुए उनको बोलते सुना -"बेवकूफ़ हो, मालूम है कि दीवाली के दिन बाज़ार में कार रिक्शे विक्शे जा नहीं पाते पैदल ही जाता पड़ता है तो क्या ज़रूरत थी कि बाज़ार जाओ, " .. इस बात में एक वेदना की प्रतिध्वनि मुझे आज़ भी याद है. आज़ वो घटना ताजी हो गई जब मेरे मेल बाक्स में ये संदेश मिला जो श्री आदित्य शर्मा जी का लिखा हुआ था.. आप ही देखिये आप भी कह उठेंगे 
   वाह मनीष सेठ जी Manish Seth वाह हमें गर्व है आप पर 
                       30 जुलाई सोमवार को प्रात: मुंबई से आये अज्ञात फोन से ज्ञात हुआ कि मेरे अनुज का बेग हावडा-मुंबई मेल में लावारिस मिला है, मेरा अनुज आशुतोष शर्मा रायगढ छत्तीसगढ था, तहकीकात से ज्ञात हुआ कि वह रायगढ से इन्दौर आने के लिये बिलासपुर के लिये शनिवार रात्रि 3.00 बजे निकला था, उसके बाद कोर्इ लोकेशन नही थी, सूचना विचलित करने वाली थी। दोपहर में एक फोन से ज्ञात हुआ कि अनुज को शहडोल रेल द्वारा इन्दौर के लिये रवाना किया गया है, उसी फोन पर संपर्क से ज्ञात हुआ कि बिलासपुर-इन्दौर ट्रेन है, मेरा अनुज अर्घमूर्छित अवस्था में है, और अन्य डिब्बे में बैठा है, मेरी उससे कोई बात नही हो पा रही थी, लेकिन र्इश्वर की कृपा से वह सुरक्षित है, इस बात का संतोष था।उस क्षेत्र मे मेरा कोई रिश्तेदार, मित्र या परिचित भी नही था, ऐसी सिथति में कैसे संपर्क हो उसकी मदद कैसे कर सके, इसी दुविधा में परेशान था। तभी मुझे र्इश्वरीय प्रेरणा मिली और मेने महिला बाल विकास जिला कार्यालय कटनी फोन लगाया जहां मेरी श्री मनीष सेठ (डी.पी.ओ. है मुझे यह भी जानकारी नही थी) से बात हुर्इ, उन्हें पूर्ण सिथति से अवगत करवा कर, मदद की अपेक्षा की गर्इ,ट्रेन सायं 6.20 पर कटनी पहुचनी थी। श्री मनीष सर से हमारा कोई परिचय भी नही था, मन कुछ आशंकित भी था। किन्तु  सर श्री मनीष सेठ ने एक अपरिचित के लिये पूर्ण मानवीय संवेदनाओं का प्रमाण देते हुए, मेरी सहायता की, वह स्वयं अपने स्टाफ को लेकर कटनी स्टेशन पहुचे, स्टाफ के साथ टे्रन की एक-एक बोगी में तलाश कर मेरे अनुज को ढूंढ निकाला मेरी उससे बात करवाई, उसके खाने-पीने की व्यवस्था की, उसकी आर्थिक मदद की, उसके सह यात्री को ध्यान रखने की समझार्इश देकर सहयात्री के मोबाइल नंबर उपलब्ध करवाये, जिस पर में सतत संपर्क में रह सका। आदरणीय सेठ सर एवं उनके सहयोगियों के इस विशिष्ट सहयोग का धन्यवाद ज्ञापित करने एवं आभार प्रदर्शन के लिये मेरे शब्द अत्यन्त बोने है।इस घटनाक्रम से मुझे यह दृढ विश्वास हुआ कि महिला बाल विकास विभाग में कार्यरत रहकर मेंने कितना बडा परिवार पाया है, म.प्र. के 50 जिलों में हमारा परिवार है, जो परिचित हो या अपरिचित किन्तु मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण होकर विपरीत परिसिथतियों में हमारी सहायता के लिये सदैव तत्पर है।इस घटनाक्रम का उल्लेख कर विभाग में सभी को प्रेषित करने का उददेश्य भी यही है कि हम म.प्र. में कही भी अकेले नही है, हर जगह हमारा परिवार मौजूद है, परस्पर सहयोग की भावना को प्रबल करने हेतु संकलिपत रहें। 
एकबार पुन: श्री मनीष सेठ जिला कटनी एवं उनके सहयोगी समस्त स्टाफ का हदय की अंतरंग गहराइयों से बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार ..................................................

भवदीय
आदित्य शर्मा
महिला एवं बाल विकास विभाग
परियोजना- ब्यावरा
जिला राजगढ (म.प्र.)