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बाढ़ भी एक उत्पाद है...?

     केदारनाथ आपदा पर  न्यू मीडिया के ब्लागिंग वाले भाग के महारथी श्री अनूप शुक्लाने अपने ब्लाग ”फ़ुरसतिया”  पर जो लिखा उसे चैनल केचैनल गुरु अपने चेलों को बाढ़ की रिपोर्टिंग के तरीके सिखा रहे हैं. वे बता रहे हैं:-"किसी भी अन्य न्यूज की तरह चैनलों के लिये बाढ़ भी एक सूचना है. एक घटना है. एक उत्पाद है. अगर कहीं बाढ़ आती है तो अपन को यह देखना है कि कितने प्रभावी तरीके से इसको कवर करते हैं."-  अनूप शुक्लाजी आप जानते हैं न –“ खबरिया चैनल्स की अपनी मज़बूरी है. जनता जल्दी खबर चाहती है.  खबर जो सूचना है जो बिकती है.. पोतड़ों.. साबुन... पर्फ़्यूम के मादक विग्यापनों के साथ सब चाहते हैं.. देखना किसी का मरना, किसी का तड़पना,किसी का किसी को गरियाना तो  किसी का गिरना, ऐसा मानते हैं खबरिया चैनल.                                       एग्रेसिव मीडिया वृत्ति का ये एक उदाहरण है. कुछ हद तक सचाई भी है.. खबरिया चैनल्स इस बारे में एक मत हैं.. कि लोगों को जितना नैगेटिव दिखाओ उतना ही तरक्क़ी होगी..?                                     मेरे परिचित मित्र कहते हैं- “रात पौने नौ की न्यूज़ का दौर चुक गया …