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प्रधान सेवक का इनसाइडर विज़न

योजना आयोग के खात्मे के साथ भारत एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा . मेरी नज़र से भारतीय अर्थ-व्यवस्था का सबसे विचित्र आकार योजना आयोग था जो समंकों के आधार पर निर्णय ले रहा था. यानी आपका पांव आग में और सर बर्फ़ की सिल्ली पर रखा है तो औसतन आप बेहतर स्थिति में हैं.. योजनाकार देश-काल-परिस्थिति के अनुमापन के बिना योजना को आकृति देते . वस्तुत: आर्थिक विकास की धनात्मक दिशा वास्तविक उत्पादन खपत के बीच होता पूंजी निर्माण है. जो भारत में हो न सका .मेड इन इंडिया  नारे को मज़बूत करते हुए  प्रधान सेवक ने "मेक इन इंडिया " की बात की.. अर्थशास्त्री चकित तो हुए ही होंगे.  विश्व से ये आग्रह कि आओ भारत में बनाओ, भावुक बात नहीं बल्कि भारत के  श्रम को विपरीत परिस्थियों वाले मुल्कों में न भेज कर भारत में ही मुहैया कराने की बात कही. इस वाक्य में   भारत के औद्योगिक विकास को गति देने का बिंदु भी अंतर्निहित है . रेतीले शहर दुबई में लोग जाकर गौरवांवित महसूस करते हैं. तो यू.के. यू. एस. ए. में हमारा युवा  खुद को पाकर आत्ममुग्ध कुछ दिन ही रह पाता है. फ़िर जब मां-बाप के चेहरे की झुर्रियां उनको महसूस करने लगता हैं …