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January, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कवि की तरह ही ब्रांडिंग कर नेता बनना चाहते हैं कुमार विश्वास : बीपी गौतम स्वतंत्र पत्रकार

सार्वजनिक कवि सम्मेलनों के साथ एकल मंच पर श्रृंगार रस के प्रख्यात कवि
कुमार विश्वास श्रोताओं से अक्सर यह अपील करते रहे हैं कि अगली पंक्ति पर
तालियों की आवाज इलाहाबाद तक पहुंचनी चाहिए, इस अपील के साथ जब वह
श्रोताओं को सुनाते थे कि “दीदी कहती हैं उस पगली लडकी की कुछ औकात नहीं,
उसके दिल में भैया तेरे जैसे प्यारे जज़्बात नहीं, वो पगली लड़की मेरी
खातिर नौ दिन भूखी रहती है, चुप-चुप सारे व्रत करती है, मगर मुझसे कुछ ना
कहती है, जो पगली लडकी कहती है, मैं प्यार तुम्ही से करती हूँ, लेकिन मैं
हूँ मजबूर बहुत, अम्मा-बाबा से डरती हूँ, उस पगली लड़की पर अपना कुछ भी
अधिकार नहीं बाबा, सब कथा-कहानी-किस्से हैं, कुछ भी तो सार नहीं बाबा, बस
उस पगली लडकी के संग जीना फुलवारी लगता है, और उस पगली लड़की के बिन मरना
भी भारी लगता है”, तो आईआईटी खड़गपुर के युवा हों या आईआईटी बीएचयू के,
आईएसएम धनबाद के युवा हों या आईआईटी रूड़की के, आई आईटी भुवनेश्वर के
युवा हों, चाहे आईआईएम लखनऊ के साथ एनआईटी जालंधर और एनआईटी त्रिचि के
युवा रात-रात भर उनकी रचनाओं पर झूमते रहे हैं, इसी तरह जब वे मदहोश होकर
यह गाते थे कि “दिल बरबाद कर के इस मेँ क्य…

मकर संक्रान्ति : सूर्य उपासना का पर्व

भारतमेंसमय-समयपरअनेकत्योहारमनाएजातेहैं. इसलिएभारतकोत्योहारोंकादेशकहनागलतनहोगा. कईत्योहारोंकासंबंधऋतुओंसेभीहै. ऐसा