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बबली जी की टिप्पणी

प्रेम  फर्रुखाबादी जी 
   "जय माता दी " 
आज़ आपका ब्लाग देखा कई दिनों से बिज़ी था सो नए डवलप्मेंट बीस-पचीस बार घुटना खुजाने के बाद पकड पाया. फ़र्ज़ी नाम से अभद्र टिप्पणी करने वालों की "आत्मा" के मरने की खबर आपको मिल चुकी होगी. वैसे ब्लागिंग में आपसी पीठ खुजाउ प्रवृत्ति को सभी अच्छी तरह समझतें हैं. मुझे तो यकीन नहीं हो रहा आप सरीखे ब्लागर से किसी की कोई "रार" हो सकती है. किंतु आपको एक बात साफ़ तौर पर बता दूं कि "कुछ गुरु चेला" हिंदी-ब्लागिंग की जिस प्रकार दुर्गति कर रहे हैं वैसी कल्पना किसी ने नहीं की थी. मुझे पुख्ता सूचना है कि हिन्दी ब्लागिंग में कुछ  "गिरोह" सक्रीय हैं जो ये सब कराते रहतें है. इससे उनको आनंद की अनुभूति ठीक वैसे ही होती है जैसे की -"किसी गधे को बैसाख माह में दूर तक घास चरने से होती है  "

आप के मुद्दे को लेकर  कल दिनांक 24 /09/09 को  रात्रि आठ बजे  सिटी-काफ़ी हाउस में एक शोक (खोज) सभा रखी गई है जिसका सारा खर्च मैं वहन करने जा रहा हूं आप सभी ब्लागराने-जबलपुर नाव पर बैठकर सादर आमंत्रित हैं.   बबली जी  की इन लाइनों को द…