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मंगलवार, दिसंबर 17

.संदीप आचार्य को श्रद्धांजली : श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’


गौरा रंगा, लम्बा कद, हंसमुख चेहरा, सुन्दर व सौम्य मुस्कान के साथ सरल स्वभाव जी  संदीप आचार्य जिसने इंडियन आइडल सीजन 2 में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी धमाकेदार एंट्री 2006 में करी आज वह हमारे बीच नहीं रहा। राजस्थान की मरूनगरी बीकानेर के इस चहेते व लाडले को आज अंतिम विदाई देने जैसे सारा शहर ही उमड़ पड़ा था। काल के क्रूर हाथों ने संदीप को हमारे से छीन लिया लेकिन मानो किसी को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि संदीप हमारे बीच नहीं रहा। संदीप जब किसी से भी मिलता तो अपने से बड़ों के पैर छूने नहीं भूलता था और बच्चों से उसका खास लगाव था और बच्चों के साथ खेलना उनकी बाल सुलभ हरकतों में शामिल होकर बच्चा बन जाता संदीप की आदत में था। बच्चों के लिए संदीप हमेशा चाचा और मामा रहा और संदीप हर बच्चे को अपनी ओर से चाॅकलेट देना या केाई गिफ्ट देना नहीं भूलता था।
मेरे से संदीप का जुड़ाव वैसे तो संदीप के बचपन से ही था। मेरे मामाजी मोटूलाल जी हर्ष ’मोटू महाराज’ और संदीप के पिताजी विजय कुमार जी आचार्य ‘गट्टू महाराज’ शुरू से ही मित्र हैं और उनका काम धंधा भी किसी समय साथ रहा है। इसलिए मेरे लिए संदीप के पिताजी हमेशा गट्टू मामा ही रहे और संदीप व उसका भाई आनंद मेरे लिए छोटे भाई की तरह ही हैं। मुझे याद है कि संदीप शुरू से ही शर्मिले स्वभाव का था और उसको स्टेज पर प्रस्तुति देने में झिझक रहती थी। वह  अकेले घंटों बैठकर इंस्ट्रूमेंटल धुनों पर रियाज करता था और अपने दोस्तों के बीच व परिवार के बीच बैठकर गाने से भी उसे परहेज नहीं था लेकिन स्टेज पर प्रस्तुति देने में उसे शुरू से ही हल्की परेशानी रही। मुझे याद है मेरे मित्र व संदीप के बहनोई रविन्द्र व्यास जी संदीप को लेकर काफी शादी समारोह में जाते थे और हम सब संदीप को स्टेज पर प्रस्तुति देने के लिए इतना प्रोत्साहित करते थे कि वह मजबूर होकर अपनी प्रस्तुति देता था। मेरी शादी में भी संदीप ने इसी तरह मेरे निवेदन पर अपने एक गाने की प्रस्तुति दी थी और उस समय वह इंडियन आईडल के मुकाम तक नहीं पहुॅंचा था। लेकिन जब सोनी टीवी के इंडियन आईडल मंे संदीप का मासूम चेहरा लोगों ने देखा तो जैसे बीकानेर व राजस्थान सहित पूरे देश का प्यार इस खूबसूरत गायक की गायकी पर उमड़ पड़ा था। इंडियन आईडल में जनता के एसएमएस से संगीत के सर्वोच्च पायदान पर संदीप की पहुॅंच ने ये साबित कर दिया था कि संदीप एक शानदार गायक ही नहीं बल्कि सबका चहेता बन चुका था। उस समय संदीप के लिए दिवानगी जो मैंने देखी थी वह किसी भी मशहूर फिल्मी हस्ती व राजनीति के नामी गिरामी चेहरे से कहीं ज्यादा थी। उस समय में ईटीवी राजस्थान में बीकानेर संवाददाता था और संदीप से जुड़ी हर खबर मैंने ईटीवी पर दिखाई थी। संदीप के इंडियन आईडल बनने के सारे दौर को मैंने ईटीवी के माध्यम से लोगों के सामने रखा था और वह दिन आज भी भुलाए नहीं भूलता जब संदीप के इंडियन आईडल बनने की घोषणा होने से पहले ही बीकानेर में शीतला गेट के बाहर स्थित संदीप आचार्य के घर पर हजारों की संख्या में लोगों का हूजूम था और संदीप के दादाजी ‘दाऊ जी होलेण्डर’ अपने पोते की इस गरिमामय सफलता की बधाई सबसे स्वीकार कर रहे थे। इंडियन आईडल बनने की घोषणा के साथ ही लोगों का ऐसा सैलाब था कि आमजन ने संदीप के परिवार के लोगों से मिलने के लिए उसके घर की खिडकियों तक को तोड़ दिया था और पूरे राजस्थान के साथ सारा बीकानेर सड़कों पर उतर गया था । कईं लोग शहर में घूम घूम कर थाली बजा रहे थे, कोई गुलाल उड़ा रहा था तो कोई पटाखे छोड़ रहा था, शहर की औरतों व बुजुर्गों ने तो कईं मंदिरों व मस्जिदों में मन्नतें पूरी की और रूपये बांट कर बधाईया दी। अपने लाडले के प्रति ऐसा प्रेम भुलाए नहीं भूल सकता लेकिन आज वही भीड़ थी वही लोग थे संदीप के घर के सामने का रास्ता रोक दिया गया था लेकिन आज वह खुशी का दौर महज सात साल बाद ऐसे गम में बदल चुका था जिसकी पूर्ति होना संभव नहीं था। शहर के हर सख्स की आॅंखस नम थी पर कोई किसी को कुछ करने की स्थिति में नहीं था सबकी आॅंखों में बस एक ही सवाल था कि ऐसा कैसे हो गया मानो उनका चेहरा ये कह रहा हो कि ऐसा हो ही नहीं सकता। सबका प्यारा दुलारा संदीप इन लोगों को छोड़ कर अनन्त में विलीन हो चुका था ये बात प्रसिद्ध गायक उदित नारायण ने तो मानी ही नहीं और सोनू निगम, फराह खान, अन्नू मलिक, राजा हसन, सहित ऐसी कईं हस्तियां थी जिनका गुड ब्याॅय जा चुका था हमेशा हमेशा के लिए सबको छोड़ कर। लोगों को याद आ रहा था वह दिन जब संदीप इंडियन आईडल बनने के बाद पहली बार बीकानेर आया था तो मानो शहर ने अपना सारा प्यार अपने इस बालक के लिए बिछा दिया था। हर गली, मौहल्ले, नुक्कड़ सहित सरकारी कार्यालयों में संदीप ही संदीप था। हाथी की सवारी किए संदीप ने सबका अभिवादन स्वीकार किया और बीकानेर का सर गौरव से ऊॅंचा हो गया था उस दिन कि बीकानेर के एक लाडले ने पूरे भारत में शहर का नाम रोशन किाय है। आज भी वह दिन सबकी आॅंखें के सामने था जब बीकानेर के रेलवे स्टेडियम में संदीप को सुनने के लिए इतना जन समुद्र आया था कि संदीप को महज कुछ ही मिनटों में स्टेज छोड़ कर उतरना पड़ा। यहां उपस्थित लोगों के लिए ये यादें ही अब सहारा थी संदीप की। महल उदास.....और गलियां सूनी...चुप चुप है दिवारें.....शायद ऐसे ही मौकों के लिए किसी गीतकार ने ये लाईनंे लिखी होगी।
इंडियन आईडल बनने के बाद ईटीवी और न्यूज पोर्टल खबरएक्सप्रेस डाॅट काॅम के लिए भी मैंने संदीप आचार्य का साक्षात्कार लिया था और ये बात मैंने महसूस की कि बुलंदी को छूने के बाद भी संदीप में कोई घमंड नहीं था वह वैसा ही था जैसा पहले था। बीकानेर आने के बाद अपने शहर के सब लोगों ने मिलना, पान की दुकान पर जाना, शहर के जागरणों में अपने पुराने दोस्तों के साथ भजन व गाने गाना, बारातों में स्टेज पर अपने परिवार व दोस्तों के लिए गाने गाना व अपने बचपन के मित्रों के साथ जी भर कर क्रिकेट खेलना उसकी आदत थी। बीकानेर के लोगों के लिए यह गर्व था कि उनका प्यारा बेटा जो भारत का सितारा बन चुका था जब भी बीकानेर आता तो अपने स्टारडम की छवि को बीकानेर के बाहर ही छोड़ कर आता था। किसी को किसी भी बात के लिए ‘ना’ कहना संदीप की आदत में था ही नहीं और अपने परिवार व समाज के संस्कारों को कभी उसने छोड़ा नहीं था। पिछले दिनों संदीप आचार्य ने बीकानेर के लोगों से विधानसभा चुनावों में ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील भी की थी उस समय भी जब वह स्टेज पर होता तो बीकानेर के बच्चों, बड़ों, बुजुर्गों सहित प्रशासन के अधिकारियों का प्यार उसके लिए बरबस ही सामने आ जाता था। आज अपनी इन सब यादों को छोड़कर संदीप जा चुका है। उसके साथ जीए व बिताए हर एक पल को आज सब लोग याद कर रहे हैं और फेसबुक, ट्वीटर, वाट्सअप सहित कईं सोसल साईट्स पर आज संदीप को श्रद्धांजली दी जा रही है। एक बात हर किसी के मुॅंह पर थी कि 2006 के शुरूआत में कोई भी नहीं जानता था कि बीकानेर में ऐसा भी कोई छोरा है और 2006 में ही इस छोरे के कारण शहर की पहचान बनी थी.....सबके मन में ये ही सवाल आ रहा था कि ...बना के क्यूं बिगाडा रे.............। एक साल पूरा ही हुआ था संदीप की शादी को और एक महिना भी नहीं हुआ उसके बेटी हुए लेकिन काल इतना क्रूर होता है यह सच सामने था। उसकी गाए एक गाने की आवाज आज भी याद आती है:-

 । ओम शांति ओम शांति ओम शांति।

                                                          श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
                                                          पुष्करणा स्टेडियम के पास
                                                          नत्थूसर गेट के बाहर
                                                          बीकानेर {राजस्थान} 334004
                                                          मोबाईल - 9950050079