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रविवार, मार्च 25

कैंसर से जूझ रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर जी का मार्मिक सन्देश


फेसबुक पर सदानंद गोडबोले जी की पोस्ट जो मूलत 
पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री जी का  मूल मराठी सन्देश  :: अनुवादक  पुखराज सावंतवाडी
की प्रस्तुति  कुमार निखिल द्वारा की जा रही है . 
मनोहर परिकर जी कैंसर से जूझ रहे हैं, अस्पताल के विस्तर से उनका यह संदेश बहुत मार्मिक है, आप भी पढ़ें...
"मैंने राजनैतिक क्षेत्र में सफलता के अनेक शिखरों को छुआ :::
दूसरों के नजरिए में मेरा जीवन और यश एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं :::;::;
फिर भी मेरे काम के अतिरिक्त अगर किसी आनंद की बात हो तो शायद ही मुझे कभी प्राप्त हुआ ::: 
आखिर क्यो
तो जिस political status जिसमें मैं आदतन रम रहा था ::: आदी हो गया था वही मेरे जीवन की हकीकत बन कर रह गई::;
इस समय जब मैं बीमारी के कारण बिस्तर पर सिमटा हुआ हूं, मेरा अतीत स्मृतिपटल पर तैर रहा है ::: जिस ख्याति प्रसिद्धि और धन संपत्ति को मैंने सर्वस्व माना और उसी के व्यर्थ अहंकार में पलता रहा::: आज जब खुद को मौत के दरवाजे पर खड़ा देख रहा हूँ तो वो सब धूमिल होता दिखाई दे रहा है साथ ही उसकी निर्थकता बड़ी शिद्दत से महसूस कर रहा हूं::;
आज जब मृत्यु पल पल मेरे निकट आ रही है, मेरे आस पास चारों तरफ हरे प्रकाश से टिमटिमाते जीवन ज्योति बढ़ाने वाले अनेक मेडिकल उपकरण देख रहा हूँ । उन यंत्रों से निकलती ध्वनियां भी सुन रहा हूं : इसके साथ साथ अपने आगोश में लपेटने के लिए निकट आ रही मृत्यु की पदचाप भी सुनाई दे रही है::::
अब ध्यान में आ रहा है कि भविष्य के लिए आवश्यक पूंजी जमा होने के पश्चात दौलत संपत्ति से जो अधिक महत्वपूर्ण है वो करना चाहिए। वो शायद रिश्ते नाते संभालना सहेजना या समाजसेवा करना हो सकता है।
निरंतर केवल राजनीति के पीछे भागते रहने से व्यक्ति अंदर से सिर्फ और सिर्फ पिसता :: खोखला बनता जाता है ::: बिल्कुल मेरी तरह।
उम्र भर मैंने जो संपत्ति और राजनैतिक मान सम्मान कमाया वो मैं कदापि साथ नहीं ले जा सकूंगा ::;
दुनिया का सबसे महंगा बिछौना कौन सा है, पता है ? ::: "बीमारी का बिछौना" :::
गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर रख सकते हैं :: पैसे कमा कर देने वाले मैनेजर मिनिस्टर रखे जा सकते हैं परंतु :::: अपनी बीमारी को सहने के लिए हम दूसरे किसी अन्य को कभी नियुक्त नहीं कर सकते हैं:::::
खोई हुई वस्तु मिल सकती है । मगर एक ही चीज ऐसी है जो एक बार हाथ से छूटने के बाद किसी भी उपाय से वापस नहीं मिल सकती है। वो है :::: अपना "आयुष्य" :: "काल" ::: "समय"
ऑपरेशन टेबल पर लेटे व्यक्ति को एक बात जरूर ध्यान में आती है कि उससे केवल एक ही पुस्तक पढ़नी शेष रह गई थी और वो पुस्तक है "निरोगी जीवन जीने की पुस्तक" ;::::
फिलहाल आप जीवन की किसी भी स्थिति- उमर के दौर से गुजर रहे हों तो भी एक न एक दिन काल एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है कि सामने नाटक का अंतिम भाग स्पष्ट दिखने लगता है :::
स्वयं की उपेक्षा मत कीजिए::: स्वयं ही स्वयं का आदर कीजिए ::::दूसरों के साथ भी प्रेमपूर्ण बर्ताव कीजिए :::
लोग मनुष्यों को इस्तेमाल ( use ) करना सीखते हैं और पैसा संभालना सीखते हैं। वास्तव में पैसा इस्तेमाल करना सीखना चाहिए व मनुष्यों को संभालना सीखना चाहिए ::: अपने जीवन की शुरुआत हमारे रोने से होती है और जीवन का समापन दूसरो के रोने से होता है:::: इन दोनों के बीच में जीवन का जो भाग है वह भरपूर हंस कर बिताएं और उसके लिए सदैव आनंदित रहिए व औरों को भी आनंदित रखिए :::"
(स्वादुपिंड के) कैंसर से पीड़ित अस्पताल में जीवन के लिए जूझ रहे मनोहर पर्रिकर का आत्मचिंतन ::::



बुधवार, फ़रवरी 10

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी से राष्ट्रीय बालश्री सम्मान प्राप्त बाल-प्रतिभाओं ने की मुलाक़ात


बालश्री विजेता बच्चों के साथ मान. शिवराज सिंह जी , महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह जी, एवं श्री जे एन कन्सौटिया, प्रमुख-सचिव, महिला बाल-विकास      

मध्य प्रदेश के इतिहास में ये पहला अवसर था की राष्ट्रीय स्तर के 9 बालश्री सम्मान प्रदेश के झोली में आए हैं. । महिला सशक्तिकरण संचालनालय अंतर्गत संचालित जवाहर बालभवन एवं अधीनस्त संभागीय बालभवनों के बाल कलाकारों क्रमश:  मास्टर निनाद अधिकारी (संतूर, जवाहर बालभवन, भोपाल ) कुमारी हिबा खान (कला, जवाहर बालभवन, भोपाल,) कुमारी कृति मालवीय ( लेखन जवाहर बालभवन, भोपाल) मास्टर तनय तलैया (साइंस,संभागीय बालभवन उज्जैन) कुमारी प्रियंका पाटकर (लेखन,संभागीय बालभवन ग्वालियर, ) शुभमराज अहिरवार, (कला, संभागीय बालभवन जबलपुर), कुमारी चंद्रिका अग्रवाल (कला- संभागीय बालभवन सागर, ), कुमारी रूचि तिवारी (कला- अभिनव बालभवन भोपाल,), तथा मास्टर ईशान शुक्ला (लेखन- अभिनव बालभवन भोपाल) के क्षेत्र में प्राप्त हुए हैं . देश के 63 बालश्री सम्मान हेतु चयन प्रक्रिया चयनित किया जिसमें मध्य-प्रदेश इन 09 बच्चों का चयन हुआ. राष्ट्रीय बालभवन, के तत्वावधान में विज्ञान-भवन में गत 3 फरवरी 2016 को मान. मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी ने हर बच्चे को 15-15 हज़ार रूपए के किसान विकास पत्र, एक ट्राफी, पुस्तकें प्रदान कर सम्मानित किया .
श्री विशाल नाडकर्णी विशेष-कर्तव्यस्थ अधिकारी , (महिला बाल मंत्री कार्यालय) श्रीमती तृप्ति त्रिपाठीसंचालक जवाहर बालभवन भोपालश्री एम. एस. पवारसहायक संचालक भोपालसंभागीय बाल भवनों के सहायक संचालक गिरीश बिल्लोरेजबलपुरश्री हीरेन्द्र सिंह ग्वालियरके अलावा श्री आर. सी मिश्रा
विगत 8 फरवरी 2016 को मध्य-प्रदेश के बालश्री से सम्मानित बच्चों महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह से भेंट की. तथा उनकी अगुआई में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी से मिले. बच्चों ने अपने भाव एक कविता के रूप में मुख्यमंत्री जी को भेंट की . बालश्री विजेताओं को बधाई देकर स्नेह व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री महोदय ने इन प्रतिभाओं के लिए विशेष कार्यक्रम बनाने का दायित्व माननीया मंत्री जी को सौंपा .
           
              मानी शुभम राज की बात ... शुभम के पिता श्री जगदीश राज़ मिलेंगे सी एम साहेब

                      जबलपुर के शुभमराज ने भेंट के दौरान बताया कि - उनके सब्जी विक्रेता पिता श्री जगदीशराज अहिरवार की बरसों से आपसे मिलाने इच्छा है . मुख्यमंत्रीजी ने शुभम का पूरा पता फोन नंबर प्राप्त कर वादा किया कि वे शुभम के पिता से अवश्य मिलेंगे .

सिंहस्थ में देंगे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बालभवनों  के बच्चे

                  श्री जे एन कन्सौटिया प्रमुख सचिव महिला बाल विकास, ने बालश्री विजेता बच्चों से मुक्तरूप से बातचीत की तथा सिंहस्थ में प्रदेश के सभी बालभवनों की संयुक्त-सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए तैयारी करने के लिए कहा.

                        आयुक्त महिला-सशक्तिकरण एवं विशेष कर्तव्यस्थ श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव से भेंट कर बच्चों ने उनसे प्रोत्साहन पाया. स्मरण हो कि महिला सशक्तिकरण संचालनालय द्वारा अपने अंतर्गत संचालित हो रहे बालभवनो में नवाचार करने के लिए निरंतर प्रेरित किया जा रहा है.                                      
                              इस अवसर पर श्री विशाल नाडकर्णी विशेष-कर्तव्यस्थ अधिकारी , (महिला बाल मंत्री कार्यालय) श्रीमती तृप्ति त्रिपाठी, संचालक जवाहर बालभवन भोपाल, श्री एम. एस. पवार, सहायक संचालक भोपाल, संभागीय बाल भवनों के सहायक संचालक गिरीश बिल्लोरे, जबलपुर, श्री हीरेन्द्र सिंह ग्वालियर, के अलावा श्री आर. सी मिश्रा की उपस्थिति उल्लेखनीय रही.