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चावल के दानों पर हुए अत्याचार का प्रतिफ़ल: पोहा उर्फ़ पोया...

मित्रो पोएट्री जैसे मेरा प्रिय शगल है ठीक उसी तरह मेरे सहित बहुतेरे लोगों का शौक सुबह सकारे पोहा+ईट= पोहेट्री है.  पो्हे के बारे  गूगल बाबा की झोली  किसम किसम की रेसिपी और सूचनाएं अटी पड़ी है. पर एक जानकारी हमने खोजी है जो गूगल बाबा के दिमाग में आज़ तलक नईं आई होगी कि हम बहुत निर्दयी हैं.. क्योंकि  हम चावल Rice के दानों पर हुए अत्याचार के प्रतिफ़ल पोहे सेवन कितना मज़ा ले लेकर करतें हैं.  जैसे ही ये भाव मन में आया तो मन बैरागी सा हो गया. किंतु दूसरे ही क्षण लगा बिना अत्याचार के हम अन्नजीवी हो ही नहीं सकते सो मन का वैराग्य भाव तुरंत ऐसे गायब हुआ जैसे किसी सरकारी  के मन से ऊपरी आय से घृणा भाव तिरोहित होता है. अस्तु ..आगे बांचिये . पोहा जबलईपुर में खासकर करमचन्द चौक पर सुबह-सकारे मिलता है तो  इंदोर (इंदौर) में किसिम किसिम के पोए चौराए चौराए (चौराहे-चौराहे) मिलते हैं. हम अपनी मौसेरी बहन के घर पहुंचे तो हमको सेओं-पोया,कांदा-पोया,आलू-पोया, पोया विद ग्रीन-मैंगो, न जाने  कितने कितने  स्वाद भरे पोए (पोहे) खिलाए सुधा ताई ने. 

                अंतर्ज़ाल की सुप्रसिद्ध लेखिका अर्चना चावजी से हम अनुरोध करन…