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शनिवार, अक्तूबर 10

क्या ब्लागर्स के सामने भी विषय चुकने जाने का संकट है ?


 


"गौतम"  ने जो चित्र प्रस्तुत किया है उससे भी ज़रूरी विषयों पर अगर हम समय जाया कर और करा रहें हैं तो ठीक है वर्ना सच हमारा मिशन सिर्फ और सिर्फ मानवता के  रक्षण से सम्बंधित होना ज़रूरी है. केवल धार्मिक सिद्धांतों की पैरवी तर्क-कुतर्क /वाद प्रतिवाद / हमारे लिए गैर ज़रूरी इस चित्र के सामने.......!!

का यह चित्र आपने न देखा हो तो अपने शहर के कूड़ा बीनने वाले बच्चों को देखिए जो होटलों से फैंकी जूठन में  भोजन तलाशते बच्चों को सहज देख सकतें हैं
http://www.abroaderview.org/images/vietnam/hanoi/Street_children_in_Sapa.jpgमित्रों  आप भी गौर से देखिये इस चित्र में मुझे तो सिर्फ बच्चे दिख रहें हैं और इधर भी देखिए =>  {यही आज का सबसे  ज़रूरी विषय है }
इसको आप ने नहीं पहचाना..... इस दीन के लिए ही तो देवदूत संदेशा लातें हैं. देववाणी भी इनकी ही सेवा का सन्देश देती है मेरे वेद तुम्हारी कुरान  ....उसका ग्रन्थ .... इसकी बाइबल क्या कुतर्क के लिए है . फिर तुम्हारी मेरी आस्था क्या है ... जिसकी परिभाषा ही हम न जान पाए मेरी नज़र में आस्था 
हम बोलतें हैं क्योंकि बोलना
जानते हैं किंतु आस्था बोलती नहीं
वाणी से हवा में ज़हर घोलती नहीं
सूखे ठूंठ पर होता है जब
बूंद बूंद भावों का छिडकाव
स्नेहिल उष्मा का पड्ता है प्रभाव
तभी होता है उसमें अंकुरण
मेरे भाई
यही तो है आस्था का प्रकरण...!!     


 सच प्रेम ही इस संसार की नींव है इसे सलीम/जोज़फ़/कुलवंत/गिरीश जैसों की क्षमता नहीं की झुठला सकें