रविवार, सितंबर 2

काश आज तुम होते कृष्ण


भारत का भगवान जिसने बचपन को भरपूर जिया उनके जन्मपर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं*
💐💐💐💐
दुनियाँ भर के ऐसे पिता माता जो निर्णय थोपते तो लगता है उनके बच्चे बच्चे नहीं *प्रजा* हैं और वे *सम्राट एवम साम्राज्ञी* !
कल जब वे आए तो लगा .. आज एक नए राजा रानी आए हैं । बालमनोविज्ञान को घर की किसी सन्दूक में बंद करके उस पर अलीगढ़ी ताला मारके आने वाले ये राजा रानी मुझसे बताने लगे कि वे अपनी बेटी के लिए सब कुछ करने तैयार हैं । बेटी को रंगकर्म सीखना है । आइये इन राजा रानी और मेरे बीच हुए संवाद को देख लेते हैं -
मैं : आइये बैठिए
राजा :- हमारी बेटी को अभिनय सीखना है हमें अमुक जी ने आपकी संस्था के लिए सजेस्ट किया है
रानी :- बेटी को एक सीरियल में काम मिलेगा ऐसा बंदोबस्त हुआ है 5-6 माह बाद उसका स्क्रीन टेस्ट होगा ।
मैं :- बेटी कहाँ है ?
रानी :- स्कूल गई है ।
मैं :- ले आइये
राजा :- वहीं से कोचिंग जाएगी
मैं :- क्यों स्कूल में पढ़ाई नहीं कराते क्या ?रानी :- गणित में कमज़ोर प्रतीत होती है ।
मैं :- और विषय
राजा :- हमने सोचा सारे विषय की कोचिंग करा दें
मैं :- तो स्कूल की फीस नाहक दे रहे हो स्कूल छुड़वा दीजिये !
राजा :- (खुद को बचाने की गरज से) सर, इनको समझाया था पर ये तो ये ही हैं
इस बीच पहली बार सर शब्द सुनकर लगा गोया....आसमान का परिंदा थक कर नीचे पेड़ की शाखा की ओर आ रहा है !
रानी :- जी सर ये असंभव है , स्कूल छुड़ाना प्रैक्टिकली कैसे संभव है !
मैं :- तो फिर ट्यूशन छुड़वाई जा सकती है ?
रानी :- परन्तु क्यों ?
मैं :- वो इस लिए कि आपकी बेटी के पास समय कम है 6 माह में नाट्यकर्म सीखना है उसे 3 बजे तक स्कूल फिर ट्यूशन साढ़े चार तक और तुरंत 15 मिनिट में बालभवन पहुंचना जहां उसे कुछ सीखना है ।
राजा :- सर वो कर लेगी !
मैं :- आपकी बेटी से पूछा आपने ?
रानी - उससे क्या पूछना
राजा रानी जानतें हैं प्रजा की हक़ीक़त वे क्यों पूछेंगे । जन्म दिया, स्कूल ट्यूशन खाना वाना, सारा इन्वेस्टमेंट उनका तो बेटी से पूछताछ क्यों ? किसी ने क्या खूब कहा है कि - सत्ता को महल के बाहर की ध्वनियाँ कम ही सुनाई देती हैं । सत्ता शासक और प्रजा के बीच ऐसा ही रिश्ता
होता है । तभी तो कहा जाता है :- *जस राजा तस प्रजा*
साफ साफ समझ आ गया था कि माता पिता अब साम्राज्ञी-सम्राट बन चुके हैं । वे सर्वज्ञ हैं ऑलमाइटी हैं । कमाते हैं प्रजा पर खर्च करते हैं । धन के साथ अपने सपनों की खाद डाल कर बच्चों की फसल को बढ़ाते हैं सौदा करने के लिए प्रोडक्ट को मार्केट के हिसाब से ग्रूमिंग की अपॉरचुनिटी देनी हैं उनको । सेलेबल बनाके छोड़ेंगे । अभी तो फ़िलहाल हमने उनको सलाह दी कि हम आपकी बेटी के योग्य नहीं हम उसे निरन्तर काम में झौंकने में आपका साथ न दे सकेंगे । क्योंकि हम यहां बच्चों के लिए काम करतें हैं *आपकी बेटी रोबोट* है । रोबोट के साथ हमारे बच्चे असहज महसूस करेंगे । प्लीज़ आप इसे मुंबई के किसी संस्थान में भेज दें ।
फ़िलहाल तो हमने उनको निराश कर दिया है । पर एक बात यह अवश्य ही कही है कि बेटी से मिलवा दीजिये फिर देखता हूँ । कल फिर आएंगे वे बेटी के साथ मयूझे इंतज़ार रहेगा ।
*गिरीश बिल्लोरे मुकुल*

कोई टिप्पणी नहीं: