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सितंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रामायण के राम जनजन के राम

एक था रावण बहुत बड़ा प्रतापी यशस्वी राज़ा ,  विश्व को ही नहीं अन्य ग्रहों तक विस्तारित उसका साम्राज्य वयं-रक्षाम का उदघोष करता आचार्य चतुरसेन शास्त्री के ज़रिये जाना था रावण के पराक्रम को. उसकी साम्राज्य व्यवस्था को. ये अलग बात है कि उन दिनों मुझमें उतनी सियासी व्यवस्था की समझ न थी. पर एक सवाल सदा खुद पूछता रहा- क्या वज़ह थी कि राम ने रावण को मारा   ?  राम को हम भारतीय जो आध्यात्मिक धार्मिक भाव से देखते हैं राम को मैने कभी भी एक राजा के रूप में आम भारतीय की तरह मन में नहीं बसाया. मुझे उनका करुणानिधान स्वरूप ही पसंद है. किंतु जो अधिसंख्यक आबादी के लिये करुणानिधान हो वो किसी को मार कैसे सकता है   ?  और जब एक सम्राठ के रूप में राम को देखा तो सहज दृष्टिगोचर होती गईं सारी रामायण कालीन स्थितियां राजा रामचंद्र की रघुवीर तस्वीर साफ़ होने लगी   रामायण-कालीन वैश्विक व्यवस्था का दृश्य   रावण के संदर्भ में हिंदी विकीपीडिया में दर्ज़ विवरण को देखें जहां बाल्मीकि के हवाले से (श्लोक सहित ) विवरण दर्ज़ है-   अहो रूपमहो धैर्यमहोत्सवमहो द्युति:।   अहो राक्षसराजस्य सर्वलक्षणयुक्तता॥ आगे

फिल्म रेड में होंगी जबलपुर की 81 वर्षीया श्रीमती पुष्पा जोशी

27 अगस्त 1936 में नर्मदांचल में जन्मीं 81 वर्षीया   श्रीमती पुष्पा जोशी जी की पौत्रवधु श्रीमति हर्षिता ने एक वीडियो ज़ायका बनाकर उनके  ज़िंदगी के जायके को ऐसा तड़का लगाया कि उसकी ख़ुशबू  से कुछ ऐसा लगा कि मशहूर फिल्म प्रोड्यूसर भूषण कुमार दुआ   ,  निर्देशक राजकुमार गुप्ता   और अजय देवांगन  ऐसे प्रभावित हुए कि उनने श्रीमती पुष्पा जोशी को   अपनी “आगामी सच्चे कथानक पर आधारित  फिल्म - रेड ” में चरित्र अभिनय के लिए आमंत्रित कर लिया . मेरे एलबम बावरे फ़कीरा के विमोचन अवसर पर श्री सक्सेना,  चिरंजीव आभास, श्रेया, जाकिर हुसैन मैं स्वयं, श्रीमती पुष्पा जोशी, श्री ईश्वरदास जी रोहाणी, ......, श्री सतीश बिल्लोरे, मेरे बाबूजी श्रीयुत काशीनाथ बिल्लोरे   फिल्म में उत्तर प्रदेश के  आयकर अधिकारी की मुख्य भूमिका अजय देवांगन की होगी तथा फिल्म   की नायिका हैं इ-लीना डी'क्रूज़   होंगी .  साथ ही सौरभ शुक्ल इस फिल्म में अभिनय करेंगे .  जबलपुर 81 वर्षीया    श्रीमती पुष्पा जोशी   पिछले एक सप्ताह से    फिल्म रेड की शूटिंग लखनउ में व्यस्त हैं .   फिल्म रेड के प्रोड्यूसर हैं भूषण कुमार तथा इसका निर्द

प्रबंधकीय कमजोरियां उजागर हुईं है बी एच यू में

27 नवम्बर 2014 को  काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के 26 वें कुलपति प्रोफेसर गिरीशचंद्र त्रिपाठी ने गुरुवार को अपना पदभार ग्रहण करते हुए  कहा था-  " बीएचयू में प्रवेश करते ही महामना की मूर्ति स्मरण हो गई और ऐसा लगा कि मेरे कंधों पर उनकी कल्पना को मूर्त रूप देने की ज़िम्मेदारी का पूरा भार है जिसे मैं पूरी निष्पक्षता के साथ पूरा करूंगा ।" उनकी शब्दावली में उम्रदराज शिक्षा शास्त्री होने के कारण सभी को सहज विश्वास हो सकता है किन्तु उनका व्यक्तित्व इतना कठोर सा क्यों नज़र आ रहा है 22 सितम्बर 17 से आज तक यानी 24 सितम्बर 2017 तक के घटना क्रम में .  जबकि वे कार्यभार ग्रहण करते समय ही  चुकें थे कि - " परिसर में प्रवेश करते समय जब मैंने छात्रों के भाव देखे तो उनकी आंखों में दिखाई देने वाली उम्मीद से मैं भाव विभोर हो उठा । विश्वविद्यालय में वे सभी प्रयास किये जायेंगे जिससे ये विश्व के सभी विश्वविद्यालयों में अग्रणी हो सके । यहां शिक्षा के हर आयाम पर ज़ोर दिया जाएगा जिससे नवीन तकनीक से जुड़कर छात्रों का मनोबल और दृढ़ हो सके।" नवागत वी सी ने तीन साल पूरे होते होते बेटियों से बात

आतंकिस्तान : धोये क्या निचोये क्या ..?

भारतीय उपमहाद्वीप क्षेत्र में आतंक का आवास बना पाकिस्तान कितना भी कोशिश करे भारत की बराबरी कदापि नहीं कर सकता । बावज़ूद इसके की चीन का उसे सपोर्ट हासिल है । चीन से इसकी रिश्तेदारी केवल एक आभासी वर्चुअल रिश्तेदारी है । रहा सवाल पाकिस्तान की आतंकी आश्रय शाला का तो वह अपनी आवाम की जगह आतंक को सर्वाधिक बड़ी जवाबदेही मानता है । कारण यह भी है कि टेरेरिज्म से पाक सेना को राहत मिलती है । यानी पाकिस्तान आतंकियों आउटसोर्सिंग से सैन्यकर्मियों की पूर्ति करते हुए मिलिट्री स्थापना व्यय  कम करता है ।  भारतीय विदेशी मुद्रा   भण्डार नवीनतम प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर 400.72 अरब USD हो गया . यह समाचार भारतीयों के लिए एक सुखद एवं उत्साहित करने वाली खबर है.             सरकारी मुद्दों पे संवेदित खबरिया चैनल का एक विश्लेषण देखिये   NDTV   ने अपनी खबर में भारतीय विदेशी मुद्रा   भण्डार के मामले में अपनी छोटी किन्तु असरदार रिपोर्ट में स्वीकारा है कि भारत में अप्रत्याशित ढंग से विदेशी मुद्रा भण्डार में इजाफा हुआ है. सितम्बर 2017 में हुई समीक्षा के हवाले से प्रकाशित समाचार के अनुसार :-    रिजर्व बैंक के

उन्नति तिवारी की कविता

दीपावली मुबारक हो

बात पिछली दीपावली की है । भूल गया था ,  पर इस बार दीपावली की धूमधाम शुरू होते ही याद आ गई। त्योहार की धूमधाम भरी तैयारियों में पिछले साल श्रीमती गुप्ता ने ढेरों पकवान बनाए सोचा मोहल्ले में गज़ब का प्रभाव जमा देंगी।   बात ही बात में गुप्ता जी को ऐसा पटाया की यंत्रवत श्री गुप्ता ने हर वो सुविधा मुहैय्या कराई जो एक वैभवशाली दंपत्ति को को आत्म प्रदर्शन के लिए ज़रूरी थी। “ माडल ” जैसी दिखने के लिए श्रीमती गुप्ता ने साड़ी ख़रीदी और गुप्ता जी को कोई तकलीफ न हुई। घर को सजाया सँवारा गया ,  बच्चों के लिए नए कपड़े बने । कुल मिलाकर यह कि दीपावली की रात पूरी सोसायटी में गुप्ता परिवार की रात होनी तय थी । चमकेंगी तो गुप्ता मैडम , घर सजेगा तो हमारे गुप्ता जी का , सलोने लगेंगे तो गुप्ता जी के बच्चे , यानी ये दीवाली केवल गुप्ता जी की होगी ये तय था । समय घड़ी के काँटों पे सवार दिवाली की रात तक पहुँचा ,  सभी ने तयशुदा मुहूर्त पे पूजा पाठ की । उधर सारे घरों में गुप्ता जी के बच्चे प्रसाद आत्मप्रदर्शन के उद्देश्य से पैकेट बांटने निकल पड़े । जहाँ भी वे गए सब जगह वाह वाह के सुर सुन कर बच्चे अभिभूत थे क

सरित-प्रवाह और समय प्रवाह

सुधि पाठक             सुप्रभात एवं शारदेय नवरात्री के पूजा-पर्व पर पर आपकी आध्यात्मिक उन्नति की कामना के आह्वान के साथ अपनी बात रखना चाहता हूँ .              नदियों के किनारे विकसित सभ्यता का अर्थ समृद्ध जीवन ही है . आज प्रात: काल से मैं अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत करने जा रहा हूँ. ज़िंदगी अपनी 54 वर्ष के बाद बदलेगी मुझे यकीन नहीं हो रहा . हमारा नज़रिया होता है कि नदी अपने साथ समय की तरह बहाकर बहुत कुछ ले जाती है परन्तु हम बहुत देर समझ सोच पाते हैं कि नदियाँ अपने साथ बहुत कुछ लेकर भी आतीं हैं . और अपने किनारों को बांटतीं हुईं  निकल भी जातीं हैं . ठीक वैसे तरह  सरिता के प्रवाह सा समय भी बहुत कुछ लेकर आता और लेकर  जाता है. इस लेकर आने और लेकर जाने के व्यवसाय में नहीं से अधिक लाभ स्थानीय रूप से होता है.      हम सभी समय-सरिता के इस पार या उस पार रहा करतें हैं . जहां हम आत्म चिंतन के ज़रिये इस प्रवाह के साथ कुछ न कुछ  चाहते न चाहते बह जाने देतें हैं. कुछ नया जो बहकर आता है उसे आत्मसात कर लेतें हैं. 29 नवम्बर 1962 को मेरा जन्म हुआ था. जीवन का हिसाब किताब जन्म से ही रखना चाहिए  सो