रविवार, जुलाई 18

मन निर्जन प्रदेश

बिना तुम्हारे
मन एक निर्जन
प्रदेश
जहां दूर दूर तक कोई नहीं
बस हमसाया
तुम्हारी यादें और
आवाज़ बस
चलो इसी सहारे
चलता रहूंगा तब तक जब तक कि तुम से
न होगा मिलन
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4 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

जीजिविषा जीवन की
जीजिविषा मिलन की

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सुन्दर!

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

दादा जी, अब तो मिलन जरुरी हो गया है
कहो तो बेवस्था करें,मिलन की,बहुत दिन हो गया मिले:)


मस्त रहो मस्ती में,आग लगे बस्ती में

मर्द को दर्द,श्रेष्ठता का पैमाना,पुरुष दिवस,एक त्यौहार-यहाँ भी आएं

Girish Billore Mukul ने कहा…

समीर भाई एवम ललित भैया को जौहार पहुंचे
कब आ रहे हैं जबलपुर
वर्मा जी का आभार

Wow.....New

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