संदेश

अक्तूबर, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Naymz Exchange My Posts

Naymz Exchange My Posts

अफसर और साहित्यिक आयोजन :भाग एक

:: एक अफसर का साहित्यिक आयोजन में आना :: ____________________________________________________ पिछले कई दिनों से मेरी समझ में आ रहा है और मैं देख भी रहा हूँ एक अफसर नुमा साहित्यकार श्री रमेश जी को तो जहां भी बुलाया जाता पद के साथ बुलाया जाता है ..... अगर उनको रमेश कुमार को केवल साहित्यकार के रूप में बुलाया जाता है तो वे अपना पद साथ में ज़रूर ले जाते हैं जो सांकेतिक होता है। यानी साथ में एक चपरासी, साहब को सम्हालता हुआ एक बच्चे को रही उनकी मैडम को सम्हालने की बात साहब उन्हें तो पूरी सभा सम्हाले रहती है। एक तो आगे वाली सीट मिलती फ़िर व्यवस्था पांडे की हिदायत पर एक ऐसी महिला बतौर परिचर मिलती जिसे आयोजन स्थली का पूरा भौगौलिक ज्ञान हो ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की शंका का निवारण सहजता से कराया जा सके। और कुछ लोग जो मैडम की कुरसी के उस सटीक एंगल वाली कुर्सी पर विराज मान होते हैं जहाँ से वे तो नख से शिख तक श्रीमती सुमिता रमेश कुमार की देख भाल करते हैं । उधर कार्यक्रम को पूरे यौवन पे आता देख रमेश जी पूरी तल्लीनता से कार्यक्रम में श

प्रयाग राज़ की मीट : आप अपनी कुंठा में हमें शामिल मत कीजिए

ब्‍लागरों की ब्‍ला-ब्‍ला सच बला बला के रूप में मुझे तो दिखाई दे रही है मुझे तो अंदेशा है कि इस पोस्ट को लिखा नहीं लिखाया गया है सो मित्रों आज पांडे जी के ज़रिये को साफ़ साफ़ बता दूँ की मुझे जबलपुर को लेकर किए गए इस कथन से आपत्ति है जो उन्हौनें लिखा हिन्‍दूवादी ब्‍लागरों को दूर रखकर आयोजक सेमिनार को साम्‍प्रदायिका के तीखे सवालों पर जूझने से तो बचा ले गये लेकिन विवाद फिर भी उनसे चिपक ही गये। सेमिनार से हिन्‍दूवादी या, और भी साफ शब्‍दों में कहें तो धार्मिक कटटरता की हद तक पहुंच जाने वाले तमाम ब्‍लागर नदारद रहे। यहां न तो जबलपुर बिग्रेड मौजूद थी और न साइबर दुनिया में भी हिन्‍दूत्‍तव की टकसाली दुनिया चलाने में यकीन रखने वाले दिखायी पडे। इस सवाल पर जब कुछ को टटोला गया तो कुछ ब्‍लागरों ने अपने छाले फोडे और बताया कि दूसरे ब्‍लागरों को तो रेल टिकट से लेकर खाने-पीने और टिकाने तक का इंतजाम किया गया लेकिन उन्‍हें आपैचारिक तौर से भी नहीं न्‍यौता गया। अब वे आवछिंत तत्व की तरह इसमें शामिल होना नहीं चाहते है। उन्‍होंने इस आयोजन को राष्‍टीय आयोजन मानने से भी इंकार कर दिया। अब उनकी इस शिकायत का जवाब त

क्षणिकाएं

############## एक   ############## एक कोयला जो उपयोगी तो है किन्तु शीतलता में हाथ काले कर ही देता है जलते ही आग से हाथ जलाता है ...? मित्र अगर उसे सलीके से उपयोग में लाओ तो कल तुम कह न सकोगे "एक कोयला .........." ############## दो ############## तुम जो देश को कानून को मुट्ठी में कस कर घूम रहे हो कभी सोचते होगे की सर्व शक्ति मान हो ? मित्र सच कहूं पराजय के लिए एक आह ही काफी होगी

शापित-यक्ष

       दीवाली के पहले गरीबी से परेशान   हमारे गांव में लंगड़ , दीनू , मुन्ना , कल्लू , बिसराम और नौखे ने विचार किया इस बार लक्ष्मी माता को किसी न किसी तरह राजी कर लेंगें . सो बस सारे के सारे लोग माँ को मनाने हठ जोगियों की तरह   रामपुर की भटरिया पे हो लिए जहां अक्सर वे जुआ - पत्ती खेलते रहते थे पास के कस्बे की चौकी पुलिस वाले आकर उनको पकड़ के दिवाली का नेग करते ये अलग बात है की इनके अलावा भी कई लोग संगठित रूप से जुआ - पत्ती की फड लगाते हैं ..... अब आगे इस बात को जारी रखने से कोई लाभ नहीं आपको तो गांव में लंगड़ , दीनू , मुन्ना , कल्लू , बिसराम और नौखे की   कहानी सुनाना ज़्यादा ज़रूरी है . _________________________________________                       तो गांव में लंगड़ , दीनू , मुन्ना , कल्लू , बिसराम - नौखे की बात की वज़नदारी को मान कर   " रामपुर की भटरिया " के   बीचौं बीच जहां प्रकृति ने ऐसी कटोरी नुमा आकृति बनाई है बाहरी अनजान   समझ नहीं पाता कि " वहां छुपा जा सकता है . जी हां उसी स्थान पर ये लोग पूजा - पाठ की गरज से अपेक्षित एकांतवासे में चले गए .. हवन सामग्री उठा

काट लूं साले कुत्तों को और खबर बन जाऊं

चित्र
खजाना पर देर छापे आलेख का पुनर्प्रकाशन       उस दिन शहर के अखबार समाचार पत्रों में रंगा था समाचार मेरे विरुद्ध जन शिकायतों को लेकर हंगामा, श्रीमान क के नेतृत्व में आला अधिकारीयों को ज्ञापन सौंपा गया ?नाम सहित छपे इस समाचार से मैं हताशा से भर गए  उन बेईमान मकसद परस्तों को अपने आप में कोस रहा था  किंतु कुछ न कर सका राज़ दंड के भय से बेचारगी का जीवन ही मेरी नियति है. एक दिन मैं एक पत्रकार मित्र से मिला और पेपर दिखाते हुए उससे निवेदन किया -भाई,संजय इस समाचार में केवल अमुक जी का व्यक्तिगत स्वार्थ आपको समझ नहीं आया ? आया भाई साहब किंतु , मैं क्या करुँ पापी पेट रोटी का सवाल है जो गोल-गोल तभी फूलतीं हैं जब मैं अपने घर तनखा लेकर आता हूँ…..! तो ठीक है ऐसा करो भइयाजी,मेरी इन-इन उपलब्धियों को प्रकाशित कर दो अपने लीडिंग अखबार में ! ये कहकर मैने  अपनी उपलब्धियों को गिनाया जिनको  सार्वजनिक करने से कल तक शर्माते था . उनकी बात सुन कर संजय ने कहा  भैयाजी,आपको इन सब काम का वेतन मिलता है ,कोई अनोखी बात कहो जो तुमने सरकारी नौकर होकर कभी की हो ? मैं -अनोखी बात…….? संजय ने पूछा -अरे हाँ, जिस बात को ल

क्या ब्लागर्स के सामने भी विषय चुकने जाने का संकट है ?

चित्र
  "गौतम"  ने जो चित्र प्रस्तुत किया है उससे भी ज़रूरी विषयों पर अगर हम समय जाया कर और करा रहें हैं तो ठीक है वर्ना सच हमारा मिशन सिर्फ और सिर्फ मानवता के  रक्षण से सम्बंधित होना ज़रूरी है. केवल धार्मिक सिद्धांतों की पैरवी तर्क-कुतर्क /वाद प्रतिवाद / हमारे लिए गैर ज़रूरी इस चित्र के सामने.......!! बेबसी और लाचारी   का यह चित्र आपने न देखा हो तो अपने शहर के कूड़ा बीनने वाले बच्चों को देखिए जो होटलों से फैंकी जूठन में  भोजन तलाशते बच्चों को सहज देख सकतें हैं मित्रों  आप भी गौर से देखिये इस चित्र में मुझे तो सिर्फ बच्चे दिख रहें हैं और इधर भी देखिए =>   {यही आज का सबसे  ज़रूरी विषय है } इसको आप ने नहीं पहचाना..... इस दीन के लिए ही तो देवदूत संदेशा लातें हैं. देववाणी भी इनकी ही सेवा का सन्देश देती है मेरे वेद तुम्हारी कुरान  ....उसका ग्रन्थ .... इसकी बाइबल क्या कुतर्क के लिए है . फिर तुम्हारी मेरी आस्था क्या है ... जिसकी परिभाषा ही हम न जान पाए मेरी नज़र में आस्था  हम बोलतें हैं क्योंकि बोलना जानते हैं किंतु आस्था बोलती नहीं वाणी से हवा में ज़हर घोलती नहीं सूखे ठूंठ पर

सलीम खान को प्रतिबंधित कर देना चाहिए..?

इस स्वच्छ भारत में जब एक हिन्दू लड़की ने कुरान लिखी हो उसे और कितना स्वच्छ बनाने पर तुले श्रीमान सलीम खान साहब. आप अपने अंतस में देखिये कि आप भारत में भारत को किस तरह स्वच्छ कर रहें है. यद्यपि मैं आप जैसे छोटे कद के अल्पग्य मित्रों को तरजीह नहीं देता किन्तु साम्प्रदायिक-रूप से समन्वित शांत चेतना में आप के लेख आगजनी करते नज़र आए अत: मुझे बतौर साहित्यकार आप जैसे "अल्प-बुद्धि" व्यक्ति को रकने के लिए भारत के आमनागरिकों के हितार्थ  आप पर प्रतिबन्ध लगाने का अनुरोध कर रहा हूँ. सब जानतें हैं कि विश्व में सबसे अधिक स्वतन्त्रता भारत के संविधान ने सभी धर्मों/वर्गों/जातियों/को दी है. आप के किसी भी आलेख में ऐसी किसी रचनात्मकता के दर्शन विलुप्त है.  मित्र मैं हिन्दू हूँ मेरी जाति ब्राह्मण है किन्तु मैं न तो हिन्दू हूँ न ब्राह्मण हूँ अगर तुम मुझसे पूछो मित्र यही कहता हूँ कि मै भारतीय हूँ.  एक सच और तुम्हारे सामने उजागर करता हूँ मेरी जन्म-दात्री माँ के अलावा मोहतरमा परवीन हक जो अब रिटायर्ड प्रोफेसर हैं मुझे अपने तीन बेटों में जोड़ कर चौथा पुत्र मानतीं है. उनके पति ज़नाब हाजी हक साहब ने एक

ड्राय-वीक

                                  _____________________________________________________________________________     ड्राय-वीक घोषित होने की खबर एन गांधी जयंती के एक दिन पहले अखबार में देख  सुरेश की पत्नि बेहद खुश थी सात दिन तक सुरेश मदिरा-सेवन नहीं करेंगा इस साल नौदुर्गा के तुरंत बाद ड्राय-वीक घोषित होने से सुरेश के परिवार में उत्साह सा था....बबलू कह रहा था पापा को अब हम सब समझा पाएंगे मुन्नी की राय थी कि पापा को शराब से दूर रखके उनके जीवन में सदाचार लाने के लिए ईश्वर ने अवसर दिया है....सारा परिवार गोया दीवाली मना रहा था ....दीवाली से पहले ही सपनों के दीप सजा रहे थे.       रात पत्नि को पति और बच्चों को पिता की प्रतीक्षा थी.दिन भर की थकन के बाद सुरेश बाबू घर आए तो पिछले बरस वाले तनाव से दूर मुस्कुराते हुए गृह-प्रवेश करते देखे गए.बच्चे कुछ अधिक उत्साहित थे.... बबलू मुन्नी को लग रहा था अब पापा रोज़ शाम को इसी तरह मुस्कुराते आएंगें उनकी इस सोच को तब धक्का लगा जब पापा बोले:-"सुनती हो इस ड्राय-वीक" में मुझे कोई समस्या नहीं पूरे हफ़्ते का जुगाड कर लिया है.