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बुधवार, नवंबर 12

भारतवंशियों का अमेरिका में बढ़ता प्रभाव और पाकिस्तानी मीडिया की छटपटाहट

 श्री सत्य नडेला 
बाबी ज़िंदल 
पाकिस्तानी मीडिया पर प्रसारित एक विशेष प्रसारण में अमेरिकी प्रशासन में भारतीय मूल के लुसियाना के गवर्नर  बाबी ज़िंदल एवं साउथ कैरलिना की गवर्नर  निकी हैली के नाम का प्रभाव पूर्ण ढंग से ज़िक्र किया. बाबी ज़िंदल को   को भविष्य में (2016 के अमेरिकी चुनाव ) में अमेरिका का राष्ट्रपति चुने जाने की संभावना का उल्लेख करते हुए चिंता व्यक्त की  है कि यू.एस. की पालिसी में प्रो-भारतीय सिद्धांतों को वज़न मिलेगा. 
भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों की बढ़ती साख और पाकिस्तानीयों की वर्तमान परिस्थिति पर केंद्रित कार्यक्रम   की शुरुआत करते हुए सी ई ओ माइक्रोसाफ़्ट  का ज़िक्र करते हुए कहा कि बड़ी कम्पनियों में भारतीय मूल के लोगों की भागीदारी बढ़ी है. स्मरण हो कि श्री सत्य नडेला, सी ई ओ माइक्रोसाफ़्ट हैं.  
 निक्की हैली मान. प्रधानमंत्री जी के साथ 
 यू.एस. प्रशासन में नीतिगत फ़ैसले लेने वाले ओहदेदारों  पुनीत तलवारी, निशा विश्वाल, राजीव शाह, सुश्री अजिता  राज़ी , (स्वीडन में अमेरिकी राज़दूत ) विक्रम सिंह, फ़रीद परेरा, जसमीत आहूजा, का ज़िक्र किया. यहां तक कि अमेरिकी मीडिया में फ़रीद ज़कारिया, विकास बज़ाज, ज़ेन मीर, संजय गुप्ता की उपस्थिति का भी ज़िक्र किया गया.  इस स्थिति के सापेक्ष पाकिस्तानी मूल के नागरिकों के घटते अस्तित्व यहां तक कि संवेदनशील जगहों में पाकिस्तानी लोगों के संघर्ष पर पीढा भी कहीं इशारों इशारों तो कभी खुल के सामने आई. उन्हैं दर्द है कि पाकिस्तान को आतंक का प्रश्रयदाता देश मान कर पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ़ विश्व के लोगों के  व्यव्हार में परिवर्तन आया है इसे आप पाकिस्तानी यूथ के दर्द समझ पाएंगे https://www.youtube.com/watch?v=JCewOLDd5Dc   . विकसित देशों में पाकिस्तान पर विश्वास की कमी इस का मूल कारण है. पाकिस्तानी प्रसारण में बेहद हताशा थी कि  पाकिस्तानी मूल के अमेरिकन      अपनी सार्थक उपस्थिति साबित नहीं कर पा रहे हैं ....? हालांकि वे मान  रहे थे कि पाकिस्तान की सियासत इसकी ज़िम्मेदार है.      जबकि एक लाइन में कहा जाए तो यह कहना ग़लत न होगा कि- " पाकिस्तान की विश्वश्नीयता में आई कमीं का खामियाज़ा है " ये मानना है पाक़िस्तानी युवाओं का जो पाकिस्तानी आंतरिक एवम वैश्विक नगैटिव परिस्थियों के चलते बाहरी देशों में अपमानित हो रहे हैं. 



जहां तक भारतीय मूल के लोगों की बात की जाए तो स्पष्ट रूप से भारतीय सामाजिक औदार्यपूर्ण संरचना, कर्मशीलता, एवं सहिष्णुता  आज़ादी के बाद भी  भारतवंशीयों के काम आई है.  अपनी कर्मशीलता एवम बुद्धि-ज्ञान के बलबूते पर जहां भी जाते हैं यक़ीन मानिये छा जाते हैं. और जहां अपनी मौज़ूदगी दर्ज़ कराते हैं तो थरथराहट अवश्य हो ही जाती है. 
भारत में अमेरिका के राज़दूत के रूप में रिचर्ड  राहुल वर्मा भी बराक ओबामा की रिपब्लिकन एवम विपक्षी दल  डेमोक्रेट्स के बीच समान रूप से पसंदीदा हैं. 
 विकी पीडिया पर प्रकाशित जानकारी के अनुसार 2010 के अमेरिकी सेंसस में भारतीय मूल  के मात्र .9%  यानि मात्र एक प्रतिशत के आसपास  अमेरिका में मौज़ूद हैं.  सोचिये अगर भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों की जनसंख्या में 9% का इज़ाफ़ा और हो जाए तो पाकिस्तान में कितनी हाय तौबा मच जाएगी 
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   पाकिस्तानी टी वी हिन्दुस्तान के नागरिकों के ज़ज़्बे को सराहते हैं 


इस चर्चा में देखिये 

           Indians in US are smarter than Pakistanis

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चर्चा देखने के लिये इस लिन्क का उपयोग भी किया जा सकता है 
लिन्क :- https://www.youtube.com/watch?v=gNEcZ83nzfw
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