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सोमवार, अक्तूबर 3

बेटी बचाओ अभियान :गिरीश का गीत

साभार आईबीएन

मधुर सुर न सुनाई दें जिस घर से वो घर कैसा 
न माडी जाए रंगोली जिस दर पे वो दर कैसा ?
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बिना बेटी के घर लगते अमावस की घुप रातें 
न रुन झुन पायलें बजतीं न होती हैं मृदुल बातें
न दीवारों पे  रौनक और  देहरी से चमक गायब-
देखता जो भी सोचे ये घर तो है मगर कैसा ..?
                       मधुर सुर न सुनाई दें जिस घर से वो घर कैसा 
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वो बेटी ही तो होती है कुलों को जोड़ लेती है
अगर अवसर मिले तो वो मुहाने मोड़ देती है
युगों से  बेटियों को तुम परखते हो न जाने क्यूं..?
जनम लेने तो दो उसको जनम-लेने से डर कैसा..?
 मधुर सुर न सुनाई दें जिस घर से वो घर कैसा
                         मधुर सुर न सुनाई दें जिस घर से वो घर कैसा
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पालने से पालकी तक की  चिंता छोड़ के आना
वो बेटों से भी बेहतर है ये चिंतन जोड़ ते लाना
उसे तुमने जो अब मारा धरा दरकेगी ये तय है-
उसे ताक़त बनाओगे जमाने से डर कैसा
                         मधुर सुर न सुनाई दें जिस घर से वो घर कैसा 
                         न माडी जाए रंगोली जिस दर पे वो दर कैसा ?
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