मंगलवार, सितंबर 17

नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला हुई बेनक़ाब


मलाला के झूठ का पर्दा फाश किया ताहिर गौरा ने- पिछले शनिवार को मलाला यूसफजई का एक ट्वीट सामने आया मलाला कहती है कि - "मलाला ने ट्वीट कर दावा किया  है कि उसने कश्मीर के पत्रकारों वकीलों छात्रों से बात की है ।"
   एक्टिविस्ट एवं पत्रकार स्तंभकार ताहिर गोरा ने अपनी टिप्पणी में कहा कि- "#मलाला क्या तुमने कभी कुछ पल बिताएं हैं उनके साथ जो जिनके अधिकारों का हनन हो रहा है पाकिस्तान में ?     अपने राष्ट्र पाकिस्तान में हिंदू सिख ईसाई धर्म को मानने वालों की बेटियों के मानवाधिकारों के बारे में विचार किया है ? मज़ाहिरों बलोच अहमदियों के बारे में जानकारी है तुमको ?
   ट्वीट को देखकर लगता है कि - " मलाला एक सस्ती लोकप्रियता के लिए अपनी सेलिब्रिटी होने का दुरुपयोग कर रही है या मलाला प्रो आर्मी डेमोक्रेटिक सिस्टम के नरेशन को सामने ला रही है । मैंने भी अपने ट्वीट में मलाला को स्पष्ट किया है कि अगर इतनी ही जानकारी है तो तुमको ( मलाला को ) मानव अधिकार एक्टिविस्ट के रूप में यह भी जानना चाहिए था कि अब तक क्या होता रहा है कश्मीर में क्या वहां सभी बालक बालिकाओं को हिंसा नहीं पढ़ाई जा रही थी ?
 - कश्मीर के मामले में हिंदुस्तान के हर नागरिक को समझ लेना चाहिए कि मलाला जैसी हरकतें करने वालों को सीधे ट्वीट कर सटीक जवाब दें मलाला जैसी तथाकथित सेलिब्रिटीस को यह समझाना जरूरी है जितना सुरक्षित हिंदुस्तान है उतना पाकिस्तान तो कदापि नहीं । पाकिस्तान के ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट बहुधा कनाडा या विश्व के अन्य देशों में रह रहे हैं उनमें एक ताहिर गौरा साहब भी हैं ।
    हिंदुस्तान की सरजमीं पर रहने वाला हर हिंदुस्तानी चाहे वह किसी भी धर्म जाति रंग भाषा से बाबस्ता हो उसके मानवाधिकार अधिक सुरक्षित है पाकिस्तान जैसे राष्ट्र में मानव अधिकार की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं । सोशल एक्टिविस्ट को चाहिए कि मलाला को जवाब जरूर लिखें और तथ्यों के साथ  लिखें ताकि विश्व को समझ में आए कि पाकिस्तान का असली चेहरा क्या है

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