मंगलवार, मार्च 5

हम और घाट शुद्धिकरण के संकल्प

तेरे तरल प्रवाह फलक तट
वांग्मयी बातों का दौर ।।
एक सुदामा ज्ञान अकिंचन-
खोज रहा गुरु या कुछ और ।।
   मित्रो आप भली प्रकार भिज्ञ हैं एक समय शरीर को भूख कम ही लगती है ऊर्जावान रहें उतना ही आहार ज़ायज़ होता है ।
       परन्तु मानसिक रूप से भूख में अचानक इज़ाफ़ा देख खुद हतप्रभ हूँ । दुनियां भर के झंझावात के अवलोकन के बाद एक विस्तृत भीड़ में अकेला महसूस कर रहा हूँ । सोचा करता हूँ अब अकेला क्यों हूँ.... ? उम्र के साथ ऐसे ही बदलाव आते हैं.... खुद के बारे में सोचना भी लगभग बंद सा हो गया ।
                रेवा के एक घाट पर आना जाना होता है ।  कल भी था सपत्नीक तिलवाराघाट गया था । अचेता और अनिच्छा से निकला पर प्रवास पर  बाद में यही प्रवास  इच्छानुकूलित प्रवास हो गया ।
    मन में केवल माँ के बारे में सोच रहा था । अक्सर ऐसा ही होता है । ग्वारीघाट और तिलवाराघाट जाकर माँ बहुत याद आतीं हैं ।  जिनकी भस्मी इसी रेवा में प्रवाहित हुई थी । तो माँ रेवा में माँ का आभास हुआ । फिर लगा वाकई रिक्तता केवल मां ही भरती है । माँ कभी दिवंगत नहीं होती है । लगा रेवा से संवाद करूँ.... पर भिक्षुकों ने आ घेरा खीसे में जो भी फुटकर  था बांट दिया फिर बाक़ी भिक्षुको को साफ तौर पर इंकार कर दिया श्रीमती जी ने तब तक रेवा में दुग्धाभिषेक  कर दिया ।
     इस बीच  देखा शिव की प्रतिमा पर लादे गए विल्व धतूरे गेहूं की बालियां, बेर , देख मन खुश हुआ दुःख भी साथ साथ होने लगा । कुछ बच्चे तीन जिनमें मल्लाह, बर्मन, सरनेम वाले दो और एक शर्मा कुल का था । सभी छटी क्लास के थे पास के स्कूल के थे । एक बच्चा केवल कच्छे में था तो  शेष सभी ने पतला शर्ट नेकर डाल रखी थी बारी बारी से शिव लिंग पर पड़ी सामग्री में से सिक्के तलाश रहे थे । बेहिचक संवादी हो गया उनके साथ । प्यार किया उनको और कहा - "डस्टबिन" में कचरा डाल दो शिव पर वैसे भी इस दुनिया ने बेहद बोझ डाल दिया है । बच्चे मेरी बात का आधा हिस्सा समझ पाए और काम में जुट गए शर्मा ने बाल्टी उठाई रेवा जल लाकर बेतरतीबी से प्रभु के इर्द गिर्द को धो दिया । बाक़ी सउत्साह चढ़ावा उठा कर डस्टबिन में डाल  रहे थे । उधर Sulabha यानी श्रीमती जी  बेतहाशा फोटोग्राफी में मशगूल हो गईं ।
      बेटी Shraddha असहजता से हमको देख रही थी ।
      मेरा मन अत्यधिक मस्तिष्क सक्रिय हो गया घाट की सफ़ाई के बारे में  । यूं तो घाट अब अपेक्षाकृत साफ हैं पर भक्त के तौर पर मेरी भी ज़िम्मेदारी है ।
          मन ने सोचा था कि शिवमहिम्न स्त्रोत का पाठ करूँ पर बुद्धि ने कहा आज तुम जितना भी हो सकता है तट को साफ कराओ । बस 6 गुणा 14 फ़ीट  का हिस्सा साफ करा लिया । शिव की आसंदी साफ हो चुकी थी । असर ये भी हुआ कि लोग पालीथीन की थैलियों को साथ वापस ले जा रहे थे । कचरा डस्टबिन में डाल कर माँ को प्रणाम कर वापस हो रहे थे ।
    स्वच्छता सिर्फ मोदी का मिशन नहीं हम सबका है । संस्कार फ़ोटो खिंचवा कर अख़बार में छपवा कर नहीं विस्तारित होते हैं उनके विस्तार के लिए यह सब कुछ करना होता है ।
 .        एक संकल्प लिया है #शुद्धि का जो मित्र तिलवाराघाट स्वच्छता अभियान में जुड़ना चाहते हैं कृपया कमेंट बॉक्स में सहमति दीजिये । हम केवल मंगलवार को एक दिन चलेंगे आप तैयार हैं तो एक सवाल ज़रूर करें कि- "क्या करना है"
मित्रो चलें तो वहां फिर क्या करेंगे और कैसे क्या करना है हम आप वहीं तय कर सकते हैं है न ...?

2 टिप्‍पणियां:

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति उस्ताद जाकिर हुसैन और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। एक बार आकर हमारा मान जरूर बढ़ाएँ। सादर ... अभिनन्दन।।

Nitish Tiwary ने कहा…

बहुत सुंदर पोस्ट।

मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
iwillrocknow.com