गुरुवार, सितंबर 6

पैरेरल यूनिवर्स हो सकते हैं ? -गिरीश बिल्लोरे मुकुल

पैरेलल यूनिवर्स की परिकल्पना और उस यूनिवर्स में पहुंचने के तौर-तरीके के संबंध में जो बात विजुअल मीडिया पर मौजूद है उस पर चर्चा करना चाहता हूं पैरेलल यूनिवर्स के संबंध में साफ कर देना चाहता हूं कि पैरेलल यूनिवर्स किसी भी स्थिति में मौजूद तो है असंख्य पैरेलल यूनिवर्स मौजूद है न की हमारे सौरमंडल से जुड़ा हुआ कोई एक मात्र सौरमंडल लेकिन एक सौरमंडल से दूसरे सौरमंडल में प्रवेश के कोई शॉर्टकट रास्ता है यह समझने के लिए ब्लैक होल थ्योरी को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है ।
मेरे हिसाब से पैरेलल यूनिवर्स में प्रवेश का तरीका केवल यांत्रिक होगा किंतु प्रोफ़ेसर हॉकिंस को अनदेखा करना भी गलत ही है इसका कारण है कि जो चुंबकीय रास्ते ब्लैक होल में तैयार होते हैं वह किधर जाते हैं यह एक सोचने का बिंदु है ।
मुझे लगता है और मैं महसूस भी करता हूं कि एक सौर मंडल दूसरे सौरमंडल से किसी तरह के ब्लैक होल से अवश्य ही जुड़ा होगा ब्लैक होल हमारे उस तक जाने का एक माध्यम होना असंभव है । अगर ऐसा है तो कभी भी उस माध्यम से किसी का आगमन होना किसी ने भी महसूस नहीं किया ना ही विश्व के किसी भी रडार, उपग्रहों ने ब्लैक होल के जरिए पृथ्वी पर प्रवेश करने वाले बाहरी प्राणियों वस्तुओं का आगमन रिकार्ड बिल्कुल नहीं किया । ऐसे कोई प्रमाण भी मौजूद नहीं है जिससे ब्लैक होल के जरिए धरती पर आने की पुष्टि हो सकी है ।
जहां तक नासा की रिसर्च का सवाल है नासा ने भी ऐसा कोई भी तथ्य आज तक जारी नहीं किया जिससे यह साबित हो कि ब्लैक होल के जरिए कोई यात्रा करते हुए हमारे यूनिवर्स में अथवा हमारी पृथ्वी पर अथवा सौरमंडल के किसी ग्रह में आया हो ।
जहां तक प्रश्न उठता है हमारी सौर मंडल में आने का तो बात स्पष्ट है की यांत्रिक तरीके से सामान्य यात्रा के जरिए हम कहीं जा सकते हैं अथवा कोई हम तक आ सकता है यात्रा के जो प्राकृतिक नियम है उसके बगैर अभी यह कहना मुश्किल है कि अन्य किसी सौरमंडल में हम किसी होल या ब्लैक होल के जरिए प्रवेश करें अब प्रश्न यह भी उठ रहा है कि क्या एक और समानांतर पृथ्वी है जहां समानांतर युग चल रहा है और उसका विकास आज की तरह है या हमारा एक दूसरा अनुरूप वहां पर मौजूद है । तो अवश्य ऐसे कई ग्रह हो सकते हैं जहाँ जीवन हो पर यह तथ्य केवल फंतासी है कि हमारे ग्रह की तरह कोई ग्रह है जहां हमारी जीवंत प्रकृतियाँ हैं ।
ऐसा सोचना गलत है यह मान्य है कि एक पृथ्वी हो सकती है जिसमें जीवन हो और वह किसी अन्य सौरमंडल का हिस्सा हो लेकिन यह सत्य नहीं है कि एक जो आप लेख पढ़ रहे हैं वह लेख किसी अन्य लेखक जो मेरा प्रतिरूप हो और उसे पढ़ने वाला आप का प्रतिरूप हो यह केवल काल्पनिक और गुमराह करने वाला तथ्य है जैसा कि YouTube के वीडियोज़ पर डाला गया है ।
जिसे कई लोग उसे सत्य भी मान भी चुके हैं।
सुधि पाठको इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि समानांतर सौर्य मंडल है । मैं तो उसके आगे भी कहता हूं कि हमारे समानांतर घई सौरमंडल है या यह भी अंतरिक्ष में केवल हमारा सौरमंडल ही मौजूद है बल्कि अंतरिक्ष में हजारों-हजार सौरमंडल की मौजूदगी से इनकार भी नहीं किया जा सकता अतः शोध के बिना अफवाह है कि- आप का प्रतिरूप किसी अन्य अंतरिक्ष से पृथ्वी के समतुल्य ग्रह पर मौजूद है बल्कि यह कल्पना अवश्य की जा सकती है कि उस अंतरिक्ष में हमारे जैसा संयोगवश कोई व्यक्ति घटना अथवा परिस्थिति मौजूद हो कई बार हमें किसी और को देखकर अपने मित्र का स्मरण हो आता है अपने परिचित का स्मरण हो आता है क्योंकि बहुत सारी बातें उस व्यक्ति ने आपके निकट परिचित रिश्तेदार के समान होती हैं और यह भी सत्य है कि दुनिया में एक जैसे कई व्यक्ति हो सकते हैं कम से कम एक तो तय है ।
( *गिरीश बिल्लोरे मुकुल* सोशल मीडिया एवम ब्लॉग रायटर हैं । )

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