रविवार, दिसंबर 18

धर्मेंद्र पानी की टंकी पे चढ़े थे वो सरकारी थी : बीडीओ रामगढ़


फिल्मों को नया डायमेंशन देना शोले ने किया । शोले एक बदलाव की फिल्म कही जा सकती है ।
 अब आप ही बताएं कि पानी की टंकी के सवाल पर डायरेक्टर का माथा फिर गया था कि जिस गाँव में बिजली नहीं वहां पानी की टंकी का  का होना ? असल बात कौनों को नईं मालूम जो हमको रामगढ़ वाले बीडीओ ने सुनाई बीडीओ साब रिटायर्ड हैं ।
इन दिनों वे मानसिक रूप से कन्फ्यूज़ हैं । केजरीवाल मोदी जी पप्पू भैया अम्मा बुआ आदि वाले खबरिया विचार के बीच उनने बताया - हाँ तो गिरीश बाबू उस व्हेन आई वाज़ बीडीओ एट रामगढ़ गौरन्मेंट डिसाइडेट टू प्रोवाइड टेप वाटर एट रामगढ़   और फिर टेंडर हुआ पाइप और टंकी बनाने का टंकी बन गई पाईप का टेंडर रुक गया किसी कमीशनी रीज़न से ।
रहा बिजली का मुद्दा तो तर् खिंच रहे थे ।
खामखां बेकार पड़ी टंकी पर धर्मेंद्र को चढ़वाने का आइडिया हमारे बड़े बाबू का । सिप्पी को उसने ही उकसाया था तब वो सीन जोड़ा गया बाद में उसी ने कानूनी नोटिस भेजा अतिरिक्त किराए का ।
अब बड़े बाबू ठहरे बड़े बाबू उस दौर में सिप्पी साहेब से टंकी का किराया भी वसूला गया । खजाने में जमा है कुछ हमाई जेब में  चलिए छोड़िये बेवज़ह सिप्पी साब पे टंकी को लेके बकबका रहे हो

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