शनिवार, दिसंबर 5

जीत लें अपने अस्तित्व पर भारी अहंकार को

आज
तुम मैं हम सब जीत लें
अपने अस्तित्व पर भारी
अहंकार को
जो कर देता है
किसी भी दिन को कभी भी
घोषित "काला-दिन"
हाँ वही अहंकार
आज के दिन को
फिर कलुषित न कर दे कहीं ?
आज छोटे बड़े अपने पराये
किसी को भी
किसी के भी
दिल को तोड़ने की सख्त मनाही है
कसम बुल्ले शाह की
जिसकी आवाज़ आज भी गूंजती
हमारे दिलो दिमाग में

6 टिप्‍पणियां:

praneykelekh ने कहा…

aapne ye gana kaisa lagaya mujhe jaroor bataye mai abhi bloging mein naya hoon
pranay1020@gmail.com
yaha mujhe apna jawab bheje

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर जी

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन!!!

वाणी गीत ने कहा…

बुल्ले शाह दी सौं...कौन नहीं मानेगा ...!!

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुंदर

Devendra ने कहा…

अच्छी कविता