Vandana

Tuesday, May 19

आओ बहस करें: बांये पथचारीयों को समर्पित

आओ बहस करें
जूतम-पैजार तक
मोहल्ले से बाज़ार तक
दो हों तो भी
और हों हज़ार तक
आओ हम बहस करें
आओ हम बहस करें
काम करे और कोई
आओ हम बहस करें
विषय के चुक जाने तक
आम के पाक जाने तक
नक्सलियों के आयुध से
जीभों का उपचार करें
गांधी अब याद आया
कल दीं दयाल का
विष पिलाने का आर्ट
आपमें कमाल का
घर मेरे है आग लगी
रास कलस ताक रखें
बस्ती के जलने तक हम
"कारण पे बात रखें "
सोमनाथ टूटा था
सोमनाथ है हताश
मोगरे के पेड़ पे क्यों
न उगे है पलाश
बाएँ पथ धारी हम
इस की तलाश करें
प्रश्न हम सहस करें
आओ हम बहस करें

4 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari said...

आओ हम बहस करें -चलो!!

बेहतरीन!!

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " said...

आओ बहस करें
जूतम-पैजार तक
मोहल्ले से बाज़ार तक
दो हों तो भी
और हों हज़ार तक
आओ हम बहस करें
Shukriya sameer ji

श्याम सखा 'श्याम' said...

खामखा बहस करने वालों का सुन्दर खाका खेंचा है आपने
श्याम सखा

प्रकाश गोविन्द said...

kya baat hai janaab

bahut badhiya

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उसने मुझे सलीब पे चड़ने नहीं दिया,
ताकत खुदा की गोया वो जान गया है..?
जबसे वो जान ने लगा ख़ुद में खुदा बसा
तब से यकीं कीजिए वो अनुमानने लगा !!

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